सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कोरोना काल के बाद दूसरी बार, 25 साल के इतिहास में सबसे लंबी गिरावट; समझें क्यों गिर रहा है शेयर बाजार?

Published: Thu, 01 Oct 2026 06:26 PM (IST)

शेयर बाजार में जारी गिरावट से निवेशक चिंतित हैं, निफ्टी 50 कोविड के बाद पहली बार 200-हफ़्ते के मूविंग एवरेज ...और पढ़ें

निफ्टी 22400 के ऊपर बंद हुआ।

निफ्टी 22400 के ऊपर बंद हुआ।

HighLights

  1. निफ्टी 50 ने 25 सालों में सबसे लंबी गिरावट का दौर देखा।

  2. कोविड के बाद पहली बार 200 WMA के नीचे बंद हुआ।

  3. कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड गिरावट के मुख्य कारण।

नई दिल्ली। शेयर बाजार (Share Market Fall) में जारी गिरावट से आम निवेशक डरा हुआ है। क्योंकि, अगस्त और सितंबर के बाद अक्तूबर में भी मार्केट के गिरने का सिलसिला जारी है और मार्केट की यह गिरावट आम नहीं बल्कि काफी परेशान करने वाली है। दरअसल, कोविड-19 के दौरान आई गिरावट के बाद पहली बार बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 अपने 200-हफ़्ते के मूविंग एवरेज से नीचे बंद हुआ है। लगातार जारी इस गिरावट के कारण इंडेक्स में पिछले 25 सालों में सबसे लंबा गिरावट का दौर देखा गया है, जिसमें लगातार आठ हफ़्तों तक नुकसान हुआ है।

गुरुवार, 1 अक्टूबर को कारोबार के दौरान इंडेक्स 22,500 के नीचे बंद हुआ। US 10-साल के बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की मजबूत कीमतों के कारण सेंटीमेंट कमजोर रहने से निफ्टी की शुरुआत निचले स्तर पर हुई और इसके बाद क्रूड में मजबूती ने नेगेटिव सेंटीमेंट को और बढ़ाया, जिससे इंडेक्स नीचे की ओर फिसल गया।

क्या है मूविंग एवरेज और 200 WMA?

शेयर बाज़ार में मूवरिंग एवरेज, एक प्रमुख टेक्निकल इंडिकेटर है, जिसका उपयोग किसी शेयर या इंडेक्स के लंबी अवधि के ट्रेंड को सटीकता से मापने के लिए किया जाता है। यहां 200 WMA से मतलब 200 वीकली मूविंग एवरेज है। आमतौर पर 200 दिनों का मूविंग एवरेज (200 DMA) तोड़ना किसी शेयर में मंदी के संकेत देता है।

Nifty लगातार गिरा

इस हफ़्ते, निफ्टी में 3 प्रतिशत की गिरावट आई। अलग-अलग सेक्टरों में लगभग सभी बड़े सेक्टरोल इंडेक्स में हायर लेवल पर प्रॉफ़िट-बुकिंग देखी गई। कंज्यूमर और ऑटो इंडेक्स में सबसे ज़्यादा गिरावट आई, जो क्रमशः 6.15 प्रतिशत और 5.85 प्रतिशत गिरे।

पिछले महीने में निफ्टी में लगभग सात प्रतिशत की गिरावट आई है और 2026 में अब तक यह 14 प्रतिशत से ज़्यादा गिर चुका है। मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण विदेशी फंड की तेज़ी से निकासी और US बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का असर भारतीय बाज़ारों पर लगातार पड़ रहा है।

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में इक्विरस वेल्थ के मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज ने कहा, "कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और उसके कारण डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से निवेशक परेशान हैं। इससे घरेलू इक्विटी मार्केट में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई है, हालांकि हालिया गिरावट के बाद IT शेयरों ने इस ट्रेंड के उलट प्रदर्शन किया है।"

इस साल विदेशी निवेशकों ने 3.15 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जिसमें सबसे ज़्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सर्विसेज़ और IT सर्विसेज़ के शेयरों में हुई है।

आगे क्या लेवल अहम?

बाज़ार में मज़बूती से वापसी के लिए निफ़्टी को सभी सेक्टर में खरीदारी के साथ 22,600 के स्तर पर वापस आना होगा। HST वेल्थ के फ़ाउंडर और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा, "अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज़ी बनी रहती है, विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है या निफ़्टी 22,400 के स्तर से नीचे गिरता है, तो सोमवार को ट्रेडिंग शुरू होने पर बाज़ार कमज़ोर स्थिति में हो सकता है।"

ये भी पढ़ें - कच्चे तेल में भूचाल! एक महीने में 29% का उछाल; अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर; वित्त मंत्रालय इशारों में बताया

वहीं, एम्बिट इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ के अनुसार, बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट का दौर जारी रह सकता है, जिससे 10 साल से चली आ रही बढ़त का सिलसिला टूट सकता है और 2026 का अंत नुकसान के साथ हो सकता है।