31 अगस्त से 4 सितंबर तक कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? इन फैक्टर्स पर रखें नजर; GDP डेटा सबसे अहम
अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा घरेलू जीडीपी आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी रोजगार डेटा से तय ...और पढ़ें

अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल?
HighLights
घरेलू जीडीपी आंकड़े और अमेरिकी रोजगार डेटा महत्वपूर्ण
कच्चे तेल की कीमतें और एफपीआई निवेश भी प्रभावित करेगा
वैश्विक आर्थिक संकेतक बाजार की दिशा तय करेंगे
नई दिल्ली। स्थानीय शेयर बाजार की दिशा अगले सप्ताह घरेलू सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और अमेरिका के गैर-कृषि रोजगार के आंकड़ों से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। इसके अलावा वाहन बिक्री के आंकड़े और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती हैं।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, ‘‘आने वाला सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के कारण बाजार के लिए काफी अहम रहने वाला है। घरेलू जीडीपी आंकड़ों के साथ वैश्विक आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करेंगे।’’
कब आएंगे जीडीपी आंकड़े?
भारत की वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े 31 अगस्त को जारी किए जाएंगे। इसके अलावा निवेशकों की नजर अगस्त के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों, जीएसटी संग्रह, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की चाल पर भी रहेगी।
मिश्रा के अनुसार, अमेरिका के रोजगार आंकड़े इस सप्ताह सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संकेतक होंगे। अगस्त के गैर-कृषि पेरोल के आंकड़े चार सितंबर को जारी होने हैं। इन आंकड़ों से सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड प्रतिफल और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर भी देखने को मिल सकता है।
FPI का रुख कैसा?
इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में भारतीय शेयरों में करीब 30,919 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध लिवाल रहे हैं। एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर ने कहा कि घरेलू मोर्चे पर पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।
ऊंची ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है, जिससे जिंस कीमतों में भी तेजी आई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी मौद्रिक नीति फिलहाल वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा कारक बनी हुई है।
अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर नजर
निवेशकों की नजर अब चार सितंबर को आने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और आगामी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर रहेगी। इन आंकड़ों से सितंबर में ब्याज दरों को लेकर बाजार की मौजूदा उम्मीदों में बदलाव आ सकता है। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 276.32 अंक यानी 0.35 प्रतिशत टूट गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 76.35 अंक या 0.31 प्रतिशत के नुकसान में रहा।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
