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अगले हफ्ते बाजार का मूड तय करेंगे ये 3 बड़े ट्रिगर: कंपनियों के नतीजे, फेड की ब्याज दरें और कच्चा तेल लिस्ट में शामिल

By Jagran BusinessEdited By: Kashid Hussain
Published: Sun, 25 Oct 2026 01:02 PM (IST)

भारतीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह तिमाही नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले और कच्चे तेल की ...और पढ़ें

शेयर बाजार का अगला हफ्ता कैसा रहेगा? (AI फोटो)

शेयर बाजार का अगला हफ्ता कैसा रहेगा? (AI फोटो)

HighLights

  1. तिमाही नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला बाजार को प्रभावित करेंगे

  2. कच्चे तेल की कीमतें और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण

  3. जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग पर भी निवेशकों की नजर रहेगी

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रमों से तय होगी। विश्लेषकों ने यह राय जताई है। इसके अलावा, जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग, विदेशी निवेशकों की कारोबारी गतिविधियां और वैश्विक बाजारों के रुझान भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि निवेशक 28 अक्टूबर को जारी होने वाले सितंबर के औद्योगिक उत्पादन और विनिर्माण उत्पादन के आंकड़ों पर नजर रखेंगे।

तिमाही नतीजों पर फोकस

कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस सप्ताह टीवीएस मोटर, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, सन फार्मा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडियन ऑयल, बैंक ऑफ बड़ौदा और गेल इंडिया समेत कई कंपनियां अपने वित्तीय परिणाम घोषित करेंगी।
मिश्रा के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 28 अक्टूबर को होने वाली ब्याज दर संबंधी घोषणा इस सप्ताह वैश्विक बाजारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहेगी। निवेशक ब्याज दर पर फैसले के साथ ही फेडरल रिजर्व के नीतिगत बयान और अधिकारियों की टिप्पणियों का विश्लेषण करेंगे, ताकि भविष्य में ब्याज दर की दिशा का संकेत मिल सके।

फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक

एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक वैश्विक बाजारों के लिए प्रमुख फैक्टर होगी। बाजार को फिलहाल ब्याज दर में बदलाव की उम्मीद कम है, ऐसे में फेडरल रिजर्व का नीतिगत रुख और भविष्य को लेकर उसके संकेत अधिक महत्वपूर्ण होंगे।
उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई पर सख्त रुख बनाए रखता है, तो अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर में मजबूती आ सकती है। इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। वहीं, यदि फेडरल रिजर्व संतुलित रुख अपनाता है, तो वैश्विक बाजारों को अस्थायी राहत मिल सकती है।

औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े

राधाकृष्णन के अनुसार, घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़े और कंपनियों के तिमाही नतीजे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं वैश्विक दबाव का कितना मुकाबला कर पाती हैं।
इस बीच, जियो प्लेटफॉर्म्स का शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होगा। इस घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर रहेगी और इसका प्राथमिक बाजार की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतें

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए चिंता का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेजी भारत के ऊर्जा आयात बिल को बढ़ा सकती है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने, रुपये पर दबाव पड़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक भी वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण होगी। निवेशक ब्याज दर के भविष्य के रुख पर संकेत तलाशेंगे, क्योंकि अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल का ऊंचा स्तर डॉलर और वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।

इससे पहले, बीते कम कारोबारी सत्रों वाले सप्ताह में घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,605.44 अंक यानी 2.15 प्रतिशत टूट गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 546.15 अंक यानी 2.36 प्रतिशत नीचे आया।

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