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Stock Market Outlook: अगले हफ्ते बाजार की चाल तय करेंगे 3 बड़े ट्रिगर्स! RBI की नीति और Q2 नतीजों पर नजर

By IANSEdited By: Ashish Kushwaha
Published: Sun, 04 Oct 2026 01:28 PM (IST)

पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में वैश्विक दबाव के कारण भारी गिरावट दर्ज की गई। अगले सप्ताह बाजार की दिशा ...और पढ़ें

शेयर बाजार अगले हफ्ते: आरबीआई नीति, Q2 नतीजे और वैश्विक तनाव तय करेंगे बाजार की चाल

शेयर बाजार अगले हफ्ते: आरबीआई नीति, Q2 नतीजे और वैश्विक तनाव तय करेंगे बाजार की चाल

HighLights

  1. आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा और Q2 नतीजे होंगे मुख्य ट्रिगर।

  2. पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा तय करेगा।

  3. पिछले सप्ताह सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट, तकनीकी रूप से कमजोर स्थिति।

एजेंसी, नई दिल्ली| छुट्टियों के कारण छोटे रहे कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह निवेशकों की निगाहें आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही (क्यू2) के कॉरपोरेट नतीजों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर रहेंगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो भारतीय बाजार में तेज राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर, आरबीआई की नीति, महंगाई पर उसका दृष्टिकोण और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही दिखाई दी। सोमवार को सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत गिरा, जबकि अगले दो सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सूचकांक में 0.79 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई।

साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार यह गिरावट बाजार में जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

तकनीकी दृष्टि से देखें तो निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक साप्ताहिक आरएसआई (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) लगभग 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और बाजार में कमजोर मोमेंटम को दर्शाता है। हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी देखने को मिल सकती है।

तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए निकट अवधि में 22,800 और 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। वहीं नीचे की ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख समर्थन (सपोर्ट) माने जा रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार की धारणा पर वैश्विक कारकों का प्रभाव सबसे अधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स बढ़ने, महंगाई को लेकर चिंताओं और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क बना रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है।

हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (आईआईपी) बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई के संशोधित 7.4 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है।

ऊर्जा बाजार का रुख भी अगले सप्ताह निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड अपने उच्च स्तरों से नीचे आया है क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है।

वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी रहेगी। नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जैसे आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं और उसका असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए आरबीआई की नीति समीक्षा, क्यू2 नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। इन घटनाक्रमों के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेशकों को नई दिशा के संकेत मिल सकते हैं।

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