यहां ₹10 प्रतिकिलो बढ़े अरहर के दाम, त्योहारों से पहले फिर महंगी होगी दाल? आयातक देशों के बिगड़ हाल
त्योहारों से पहले भारत में दाल की आपूर्ति और दाम प्रभावित होने की आशंका है। क्योंकि अफ्रीकी देशों में अरहर ...और पढ़ें
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आफ्रीकी देशों में बढ़े अरहर के दाम
HighLights
अफ्रीकी देशों में अरहर दाल की कीमतें ₹10 प्रति किलो बढ़ीं।
कमजोर फसल के कारण वैश्विक बाजार में तुअर की आपूर्ति प्रभावित।
भारत में त्योहारों से पहले दाल की कीमतों पर असर की आशंका।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत दालों का बड़ा आयातक देश है। खासकर अरहर दाल की सप्लाई के लिए कई देशों पर निर्भर है, जिसके चलते अक्सर इसकी कीमतें सुर्खियों में रहती हैं। अब फेस्टिव सीजन से पहले एक बार फिर अरहर की कीमत बढ़ने का अनुमान लगाया जाना लगा है।
दरअसल इसकी आपूर्ति में महत्वपूर्ण माने जाने वाले अफ्रीकी देशों में उम्मीद से कमजोर फसल की आशंका के कारण वहां कीमतों में 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि उत्पादन कम रहने की संभावना के चलते आने वाले महीनों में ग्लोबल मार्केट में तुअर की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है।
कीमतों में ₹10 प्रतिकिलो की बढ़ोतरी
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के चेयरमैन बिमल कोठारी के अनुसार, अफ्रीकी देशों में तुअर की कीमतें करीब ₹10 प्रति किलोग्राम बढ़ गई हैं। पहले जो तुअर ₹65 प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी, वह अब ₹70-₹75 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स में कोठारी के हवाले से कहा गया कि शुरुआत में व्यापार जगत को उम्मीद थी कि अफ्रीका में पिछले साल की तुलना में बेहतर फसल होगी, लेकिन अब अनुमान बदले हैं। मौजूदा आकलन के अनुसार उत्पादन पिछले साल से कम रह सकता है, जिससे बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
MSP से अब भी नीचे हैं अंतरराष्ट्रीय भाव
अफ्रीकी बाजारों में कीमतें जरूर बढ़ी हैं, लेकिन वे अब भी भारत सरकार द्वारा तय तुअर के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,450 प्रति क्विंटल से नीचे हैं। यही वजह है कि आयात फिलहाल भारतीय खरीदारों के लिए आकर्षक बना हुआ है। और फिलहाल के लिए किसी तरह के दाम बढ़ने की खबर नहीं है।
तुअर आयात 44% बढ़ा
भारत अपनी घरेलू अरहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए मोजाम्बिक, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और मलावी जैसे देशों से बड़ी मात्रा में आयात करता है। कैलेंडर वर्ष 2026 के पहले सात महीनों (जनवरी-जुलाई) में भारत का तुअर आयात 44 प्रतिशत बढ़कर 5.79 लाख टन पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 4.01 लाख टन था। इसके अलावा भारत को हाल ही में ब्राजील के रूप में नया अरहर सप्लायर देश मिलने की भी संभावना है।
देशवार आयात की बात करें तो
- मोजाम्बिक से 2.18 लाख टन
- म्यांमार से 1.35 लाख टन
- तंजानिया से 1.04 लाख टन
- सूडान से 68,499 टन से अधिक
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घरेलू फसल पर भी नजर
कोठारी ने मीडिया को बताया कि भारत में भी अरहर की फसल को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे जैसी परिस्थितियों की आशंका जताई गई थी, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की चर्चा है। हालांकि सितंबर में हुई अच्छी बारिश से फसल को राहत मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि फसल की कटाई में अभी लगभग ढाई महीने का समय है, इसलिए उत्पादन को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में बुवाई का क्षेत्रफल घटा है लेकिन गुजरात और उत्तर प्रदेश में अच्छी बढ़त हासिल हुई है। इसके अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी तुअर के रकबे में वृद्धि दर्ज की गई है।
