Share Market: शेयर बाजार में हावी 'लाल' निशान! 7 हफ्तों से जारी है गिरावट का सिलसिला, निवेशकों के छूटे पसीने
भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी ...और पढ़ें

भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद।
HighLights
भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद।
कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, एफआईआई बिकवाली प्रमुख कारण।
डीआईआई खरीदारी से बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।
आईएएनएस, मुंबई। वैश्विक चिंताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.88 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
साप्ताहिक आधार पर निफ्टी 0.88 प्रतिशत कमजोर हुआ, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन इसमें 0.34 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 73,895 पर बंद हुआ, लेकिन पूरे सप्ताह में इसमें 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांक 1.6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए थे, जबकि शुक्रवार को चुनिंदा शेयरों में वैल्यू बाइंग के चलते सीमित रिकवरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह भर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार करता रहा।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंताओं ने तेल बाजार को सहारा दिया। हालांकि सप्ताह के अंत में तेल कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपए और कॉरपोरेट लागत पर दबाव की आशंकाएं थोड़ी कम हुईं। दूसरी ओर, अमेरिकी बॉन्ड बाजार ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
अमेरिकी ट्रेजली यील्ड 5.10% के ऊपर
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंची यील्ड वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को सख्त बनाती है और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बना सकती है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रही। एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक, एफआईआई लगातार छठे सप्ताह शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने सप्ताह के दौरान 11,490 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखते हुए 16,398 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया, जिससे बाजार में गिरावट कुछ हद तक सीमित रही। सितंबर महीने में अब तक एफआईआई कुल 18,531 करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि डीआईआई ने 52,617 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है।
इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से लगभग 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है। बाजार की नजरें अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी टिकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को एक नया सात-दिवसीय प्रस्ताव दिया है, जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत और व्यापक युद्धविराम के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई है।
क्या है निफ्टी का सपोर्ट और रजिसेटेंस
निवेशकों का मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो तेल कीमतों पर भू-राजनीतिक प्रीमियम कम हो सकता है। तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि 23,000 का स्तर निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट क्षेत्र बना हुआ है, जबकि 23,200 का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस है। बाजार की दिशा काफी हद तक विदेशी निवेश प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एफआईआई की बिकवाली जारी रहती है और वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी रहती हैं, तो बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी फिलहाल बाजार को बड़े नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अगले सप्ताह निवेशकों की नजर विशेष रूप से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों, अमेरिका-ईरान वार्ता के घटनाक्रम और अमेरिका की दूसरी तिमाही (क्यू2) जीडीपी के आंकड़ों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)
