सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Share Market Closed: शेयर बाजार में तूफानी तबाही! सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा गिरा; निवेशकों के 10 लाख करोड़ स्वाहा

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:10 PM (GMT+05:30)

भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट दर्ज की गई, सेंसेक्स 1000 से अधिक अंक और निफ्टी 371 ...और पढ़ें

शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट, निवेशकों को नुकसान।

शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट, निवेशकों को नुकसान।

HighLights

  1. शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट, निवेशकों को नुकसान।

  2. सेंसेक्स 1045 अंक, निफ्टी 371 अंक से ज्यादा लुढ़का।

  3. कच्चे तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से 10 लाख करोड़ स्वाहा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।Share Market Closed: भारत के शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा। बुधवार की गिरावट के बाद गुरुवार को भी बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। मार्केट में भारी गिरावट के कारण शेयरों के दाम गिरे और निवेशकों का भरोसा कम हुआ, जिससे निफ्टी 50 इंडेक्स 22,179.90 के स्तर पर आ गया, जो 2026 में इसका सबसे निचला स्तर और 52-हफ्ते का भी निचला स्तर था। 

पूरे सेशन के दौरान जारी बिकवाली की वजह से निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए और निफ्टी पर लिस्टेड सभी कंपनियों के मार्केट कैप में कुल इतनी ही गिरावट आई।

बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44 प्रतिशत गिरकर 71,593.24 पर और निफ्टी 371.25 अंक या 1.64 प्रतिशत गिरकर 22,231.80 पर बंद (BSE NSE Closed) हुआ।

इन शेयरों में दिखी सबसे ज्यादा गिरावट

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में अदाणी इंटरप्राइजेज, JSW स्टील, मैक्स हेल्थकेयर, ITC और इंटरग्लोब एविएशन शामिल थे, जबकि बढ़त वाले शेयरों में इंफोसिस, एक्सिस बैंक और HCL टेक शामिल थे।

सभी सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए; ऑटो, एनर्जी, FMCG, इंफ्रा, मीडिया, मेटल, ऑयल एंड गैस, फार्मा और रियल्टी सेक्टर में 2-3% की गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में से प्रत्येक में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।

क्यों बाजार में आई गिरावट

भारत के शेयर बाजार में आई आज तूफानी गिरावट के पीछे की मुख्य वजह इंट्राडे आधार पर कच्चे तेल की कीमतों में $104 प्रति बैरल से ज्यादा की तेजी रही।ऐसा पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई में रुकावट की आशंकाओं के कारण हुआ है।

कोटक नियो के श्रीकांत चौहान ने कहा, "साथ ही, अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.35% हो गई है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ है और उभरते बाजारों से पूंजी की निकासी तेज हुई है।"

विश्लेषकों ने कहा कि RBI के 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी से इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ा, जिसका असर बाजार पर दिखा।

इतना ही नहीं विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहना बड़े शेयरों पर दबाव बनाए रख सकता है।

LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट VP, जतिन त्रिवेदी ने कहा- "रुपया लगभग 0.07% की मामूली बढ़त के साथ 96.78 के आसपास ट्रेड कर रहा है, हालांकि 102 के ऊपर मजबूत डॉलर इंडेक्स और US बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर सेंटीमेंट पर दबाव बना रहा है। ग्लोबल यील्ड के ऊंचे स्तर के कारण FII का फ्लो भी सतर्क बना हुआ है, जिससे करेंसी पर दबाव बढ़ रहा है। चूंकि सेंट्रल बैंक अब सख्त पॉलिसी की ओर बढ़ रहे हैं, इसलिए अगर कच्चे तेल की कीमतें काबू में रहती हैं, तो रुपये में थोड़ी रिकवरी देखने को मिल सकती है। रुपये की रेंज 96.45–97.00 के बीच रह सकती है।"

यह भी पढ़ें- UP का इकलौता शहर जिसकी प्रति व्यक्ति आय ₹12 लाख के पार, कहलाता है 'अरबपतियों का जिला'; दिल्ली को भी देता है टक्कर!

"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

(डिस्क्लेमर: यहां शेयर बाजार की जानकारी दी गयी है, निवेश की सलाह नहीं। जागरण बिजनेस निवेश की सलाह नहीं दे रहा है। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)