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विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार को दिया डरावना झटका! 34843 करोड़ रुपये की निकासी से सहमे घरेलू निवेशक

By Jagran BusinessEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Sun, 01 Nov 2026 02:20 PM (IST)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में भारतीय शेयर बाजार से 34,843 करोड़ रुपये की निकासी की, जो लगातार दूसरा ...और पढ़ें

अक्टूबर में FPI ने भारतीय बाजार से 34,843 करोड़ रुपये निकाले।

अक्टूबर में FPI ने भारतीय बाजार से 34,843 करोड़ रुपये निकाले।

HighLights

  1. अक्टूबर में FPI ने भारतीय बाजार से 34,843 करोड़ रुपये निकाले।

  2. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक ब्याज दरें निकासी का कारण।

  3. अंतिम सप्ताह में FPI ने खरीदारी की, DII ने दी स्थिरता।

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की निकासी का सिलसिला अक्टूबर में भी जारी रहा। विदेशी निवेशकों ने अक्टूबर में भारतीय शेयरों से 34,843 करोड़ रुपये की निकासी की है। यह लगातार दूसरा महीना है, जब विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार से पैसा निकाला है। हालांकि, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में विदेशी निवेशक फिर से लिवाल बने और उन्होंने 26 से 30 अक्टूबर के दौरान करीब 6,300 करोड़ रुपये का निवेश किया।

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे। इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

2026 में अब तक FPI ने निकाले 2.95 लाख करोड़ रुपये

अक्टूबर की निकासी के बाद 2026 में अबतक भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की कुल निकासी बढ़कर 2.95 लाख करोड़ रुपये हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर के अंतिम कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी से निकट अवधि में निवेश धारणा में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन केवल एक सप्ताह की खरीदारी को विदेशी पूंजी की वापसी का स्थायी संकेत नहीं माना जा सकता।

मीरा मनी के सह-संस्थापक आनंद के. राठी के अनुसार, अक्टूबर के दौरान विदेशी निवेशकों की बिकवाली का प्रमुख कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर चिंता और कंपनियों के तिमाही नतीजों की संभावनाएं रहीं। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत में महंगाई बढ़ाने के साथ कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव डाल सकती हैं। वहीं, अमेरिका में आकर्षक बॉण्ड प्रतिफल वैश्विक निवेशकों को वहां निवेश के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। राठी के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की खरीदारी आगे भी जारी रहेगी या नहीं, यह काफी हद तक वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के नतीजों पर निर्भर करेगा।

घरेलू निवेशकों ने दी स्थिरता

इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों ने विदेशी निवेशकों की बिकवाली को संभालने और बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा कि अक्टूबर के अंतिम चार कारोबारी सत्रों में से तीन में एफपीआई नकद बाजार में शुद्ध खरीदार रहे।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला, भारत की बड़ी कंपनियों के शेयरों का आकर्षक मूल्यांकन और घरेलू अर्थव्यवस्था में निरंतर वृद्धि के संकेत विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार के संभावित कारण हो सकते हैं। बजाज ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष (शोध) पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि एफपीआई की बिकवाली से खरीदारी की ओर वापसी बाजार की धारणा के लिहाज से सकारात्मक है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं इस तेजी की गति को सीमित कर सकती हैं।

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