सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अनिल अग्रवाल की वेदांता को फिर से चाहिए लोन, 3500 करोड़ रुपये के NCD को बोर्ड ने दी मंजूरी; क्यों पड़ी जरूरत?

Published: Fri, 18 Sep 2026 03:50 PM (IST)

अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ₹3,500 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) ...और पढ़ें

वेदांता को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु फंड चाहिए।

वेदांता को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु फंड चाहिए।

HighLights

  1. वेदांता को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु फंड चाहिए।

  2. बोर्ड ने ₹3,500 करोड़ के NCD जारी करने को मंजूरी दी।

  3. निजी प्लेसमेंट के जरिए निवेशकों से फंड जुटाया जाएगा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। Vedanta News: भारत की दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता को फिर से पैसों की जरूरत आन पड़ी है। अनिल अग्रवाल की कंपनी इस जरूरत को पूरा करने के लिए NCD के जरिए फंड जुटाएगी। वेदांता लिमिटेड के बोर्ड ने शुक्रवार, 18 सितंबर को हुई अपनी बोर्ड मीटिंग में निवेशकों से कुल ₹3,500 करोड़ तक का फंड जुटाने के लिए प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी करने पर विचार किया और उसे मंजूरी दी।

NSE में दी गई जानकारी के अनुसार, वेदांता लिमिटेड फंड जुटाने की इस प्रक्रिया के तहत ₹3,500 करोड़ तक की राशि जुटाने के लिए 3,50,000 (यानी 3.5 लाख) तक नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी करेगी, जिनमें से हर एक की फेस वैल्यू ₹1 लाख होगी। प्रतिभूतियों को बीएसई लिमिटेड पर सूचीबद्ध किया जाएगा और सार्वजनिक निर्गम के बजाय संस्थागत और अन्य पात्र निवेशकों को निजी प्लेसमेंट मार्ग के माध्यम से पेश किया जाएगा।

एक से अधिक किस्तों के जरिए जुटाया जाएगा फंड

अनिल अग्रवाल की कंपनी ने कहा कि फंड जुटाने की पूरी प्रक्रिया एक या ज्यादा किश्तों में पूरी की जाएगी। ये NCDs अनसिक्योर्ड, रेटेड, लिस्टेड और रिडीमेबल होंगे। कंपनी ने दी गई जानकारी में इनके खास कार्यकाल, कूपन रेट और ब्याज भुगतान के शेड्यूल का खुलासा नहीं किया है। इन शर्तों की जानकारी डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट में दी जाएगी। ₹3,500 करोड़ का यह इश्यू, फरवरी 2026 में वेदांता द्वारा मंजूर किए गए ₹3,000 करोड़ के NCD इश्यू से बड़ा है।

वेदांता ने अपनी फाइलिंग में कहा- "हम आपको सूचित करते हैं कि कंपनी की अधिकृत डायरेक्टर्स की कमेटी ने आज, यानी शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को हुई बैठक में अनसिक्योर्ड, रेटेड, लिस्टेड, रिडीमेबल, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स जारी करने पर विचार किया और उसे मंजूरी दी।"

NCD क्या होता है?

NCDs यानी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर एक तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट हैं। कंपनियां इसका इस्तेमाल करके निवेशकों से एक तय समय के लिए फंड जुटाने के लिए करती हैं, जिसके बदले में उन्हें ब्याज के रूप में रिटर्न मिलता है। हालांकि, कन्वर्टिबल डेट इंस्ट्रूमेंट के उलट, NCDs को मैच्योरिटी पर इक्विटी शेयरों में नहीं बदला जा सकता है।

यह भी पढ़ें- अनिल अग्रवाल की वेदांता का बड़ा कदम, ₹10534 करोड़ चुकाए; 3 कंपनियों से हटीं पाबंदियां

"शेयर से जुड़े अपने सवाल आप हमें business@jagrannewmedia.com पर भेज सकते हैं।"

(डिस्क्लेमर: यहां शेयरों को लेकर दी गई जानकारी ब्रोकरेज हाउस की रिपोर्ट पर आधारित है। चूंकि, स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।)