नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर आप निवेश में यकीन रखते हैं तो आपको वित्त वर्ष 2019 की शुरुआत में ही फाइनेंशियल प्लानिंग कर लेनी चाहिए। शुरुआत में ही योजना बनाने से आप गलत प्रोडक्ट में निवेश करने से बच सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने एक सूची तैयार की है। हम आपको बता रहे हैं कि आपको किन कामों को अप्रैल महीने में ही पूरा कर लेना चाहिए।

अपने नियोक्ता को प्रस्तावित निवेश की डेक्लेरेशन जमा करा दें: हर वित्त वर्ष की शुरुआत में आपको अपने नियोक्ता को डेक्लेरेशन देना होता है कि आप विभिन्न निवेश और खर्चों के माध्यम से टैक्स बचाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकांश कंपनियों में ये अप्रैल महीने के मध्य तक करना होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि आपकी सैलरी से टीडीएस न कटे। अपने नियोक्ता के निवेश डेक्लेरेशन जमा करने के बाद उसकी एक कॉपी अपने पास भी रखें।

साल के लिए टैक्स सेविंग निवेश करें: निवेश डेक्लेरेशन मुहैया कराना जरूरी है लेकिन आपको बचत भी जल्द शुरू कर देनी चाहिए। साल के शुरुआत में शुरू करने का ये फायदा होता है कि आपको टैक्स सेविंग प्रोडक्ट चुनने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। इससे आप किसी भी गलत प्रोडक्ट में निवेश करने से बच जाते हैं।

जल्द बचत शुरू करने का एक फायदा ये भी है कि आपको अपने निवेश पर पूरे साल का ब्याज मिलता है। एक व्यक्ति जो अप्रैल के शुरुआती पांच दिनों में पब्लिक प्रोविडेंट फंड में लंप सम निवेश करता है उसे उस व्यक्ति की तुलना में ज्याद ब्याज मिलेगा जो पांच मार्च के बाद निवेश कर रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे अप्रैल के शुरुआती दिनों में निवेश करने से ही पूरे वित्त वर्ष के लिए ब्याज मिल जाता है।

पीपीएफ पर ब्याज मासिक आधार पर मिनिमम बैलेंस पर महीने के पांचवें दिन और आखिरी दिन के बीच कैल्कूलेट होता है, लेकिन क्रेडिट मार्च के अंत में होता है।

फॉर्म 15जी/15एच करें जमा: अगर आपको लगता है कि वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आपको बैंक में जमा पर मिलने वाला ब्याज 10,000 रुपये से ज्यादा (वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह लिमिट 50,000 रुपये है ) होने वाला है लेकिन आपकी जो ग्रॉस टोटल इनकम है वो बेसिक एग्जेंम्पशन लिमिट (2.5 लाख रुपये) से कम है तो टीडीएस से बचने के लिए बैंक के पास फॉर्म 15जी (वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15एच) जमा करें। अगर बैंक टीडीएस काटता है तो आपको रिफंड क्लेम करने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करना पड़ेगा ताकि आपको टैक्स न देना पड़े।

26 एएस फॉर्म जांचें और टीडीएस क्रेडिट को टैली करें: आईटीआर फाइलिंग शुरू करने से पहले यह जांच लें कि आपकी कंपनी का नियोक्ता या बैंक टीडीएस काट रहा है या नहीं। ये आप फॉर्म 26 एएस में देख सकते हैं। आपको बता दें कि फॉर्म 26एएस इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई फाइलिंग वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है। इसे फिर आप टीडीएस सर्टिफिकेट से मैच कर सकते हैं।

अपने बोनस का करें समझदारी से इस्तेमाल: अगर आपकी कंपनी अप्रैल या मई में बोनस देती है तो बजाय उसे खर्च करने के आप उसका इस्तेमाल अपने डेट कम करने के लिए कर सकते हैं। जैसे आप अपने लोन को प्रीपे या रिपे कर सकते हैं। या फिर किसी वित्तीय लक्ष्य के लिए निवेश कर सकते हैं। हालांकि, निवेश से पहले ये देख लें कि कितने समय में आप अपने वित्तीय लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

अपने निवेश पोर्टफोलियो को करें रिव्यू: अपने निवेश पोर्टफोलियो का अच्छे से रिव्यू करें और यह देखें कि क्या आपका निवेश आपके लक्ष्यों के अनुरूप है। अगर आपको सैलरी हाइक मिलता है तो उस अतिरिक्त पैसे को समझदारी से इसतेमाल करें। या फिर इस पैसे का इस्तेमाल अपने मौजूदा लक्ष्यों को पूरा करने में भी किया जा सकता है। या फिर इस पैसे को नए निवेश में भी लगा सकते हैं। अपनी बीमा जरूरतों को भी देखें। सुनिश्चित करें तो आपके पास पर्याप्त स्वास्थ्य और जीवन बीमा है।

अंतिम तारीख से पहले फाइल करें अपना आईटीआर: इस साल से देरी से फाइल की गई आईटीआर पर जुर्माना लगना शुरू हो रहा है। नए कानून के तहत अगर आईटीआर 31 जुलाई, 2018 के बाद और 31 दिसंबर, 2018 से पहले फाइल करते हैं तो योग्य ब्याज के साथ 5000 रुपये जुर्माना भी देना पड़ेगा। वहीं अगर इसे 31 दिसंबर, 2018 के बाद और 31 मार्च, 2018 से पहले किया जाता है तो 10,000 रुपये जुर्माने के रूप में देने होंगे।

छोटे करदाताओं के लिए इसमें थोड़ी राहत है। 31 जुलाई, 2018 के बाद ऐसे करदाता जिनकी एक साल में पांच लाख से ज्यादा आय नहीं है तो उन्हें देरी से फाइलिंग की स्थिति में 1000 रुपये जुर्माना देना होगा। वहीं 31 जुलाई, 2018 की अंतिम तारीख से अगर आप चूक जाते हैं तो 31 मार्च 2019 से पहले जरूर फाइल लें। ऐसा इसलिए क्योंकि इसके बाद वित्त वर्ष 2017-18 के लिए आप आईटीआर फाइल नहीं कर पाएंगे।

Posted By: Surbhi Jain