नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। केंद्र सरकार पीपीएफ जैसी सभी छोटी योजनाओं के लिए एक जैसी व्यवस्था करने जा रही है। वित्त विधेयक-2018 के मुताबिक पीपीएफ एक्ट, 1968 खत्म कर दिया जाएगा और सरकार की तरफ से चलाई जा रही 10 प्रमुख बचत योजनाओं के खाते बचत खातों में तब्दील कर दिए जाएंगे।

पीपीएफ एक्ट समाप्त हो जाने के बाद उन लोगों को ज्यादा ब्याज का फायदा नहीं मिलेगा, जो नया निवेश करेंगे। सभी नए निवेश गर्वनमेंट सेविंग बैंक एक्ट, 1873 के मुताबिक होंगे। हालांकि उन लोगों को ज्यादा ब्याज मिलता रहेगा, जिन्होंने वित्त विधेयक-2018 लागू होने से पहले से निवेश कर रखा है।

नई व्यवस्था तभी लागू हो पाएगी जब संसद से यह विधेयक पारित हो जाएगा। इन योजनाओं पर असरपीपीएफ एक्ट खत्म होने की स्थिति में डाकघर बचत खाते, नेशनल सेविंग मंथली इनकम, नेशनल सेविंग आरडी अकाउंट, सुकन्या समृद्घि अकाउंट, नेशनल सेविंग टाइम डिपॉजिट (1,2,3 और 5 साल), सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम, एनएससी, पीपीएफ और किसान विकास पत्र।

जब्त हो सकेंगे पीपीएफ खाते

वित्त विधेयक में स्पष्ट कर दिया गया है कि सभी योजनाओं की मौजूदा ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। लेकिन, एक बड़ा नुकसान यह होगा कि फिलहाल पीपीएफ खाते कोर्ट द्वारा जब्ती मुक्त होते हैं, जबकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह सुविधा खत्म हो जाएगी।

Posted By: Surbhi Jain