नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया है कि छोटी बचत योजनाओं जैसे कि पीपीएफ और एनएससी पर मिलने वाली ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही इसके आने वाले दिनों में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खातों को मेच्योरिटी से पहले बंद करने की सुविधा देने पर विचार हो रहा है। इसके अतिरिक्त अवयस्कों के नाम से छोटी बचत योजनाओं में खाते खोलने की भी अनुमति दी जा सकती है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सरकार गवर्नमेंट सेविंग्स सर्टिफिकेट्स एक्ट, 1959 और पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक्ट, 1968 को गवर्नमेंट सेंविंग्स बैंक्स एक्ट, 1873 में समाहित करने की तैयारी में है। मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव का मुख्य लक्ष्य एक ऐसा कानून बनाना है, जिससे जमाकर्ताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके। उन्हें अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग-अलग नियमों और कानूनों से नहीं गुजरना पड़े।

मौजूदा बेनिफिट्स को सुनिश्चित करने के अलावा भी प्रस्तावित बिल के तहत जमाकर्ताओं को नए लाभ मिलने की भी उम्मीद है। ये प्रावधान संशोधित एक्ट में सम्मिलित किये जाएंगे। जानिए ऐसी छह राहतों के बारे में-

प्रीमैच्यौर क्लोजर-
क्या है मौजूदा व्यव्स्था- पीपीएफ एक्ट के मुताबिक, पीपीएफ खाते को पांच वित्तीय वर्ष पूरे होने से पहले बंद नहीं किया जा सकता। अगर जमाकर्ता पांच वर्षों से पहले पीपीएफ खाते को बंद करना चाहता है तो वह नहीं कर सकता।

क्या है प्रस्तावित व्यव्स्था- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) खातों को मेच्योरिटी से पहले बंद करने की सुविधा देने पर विचार हो रहा है। मेच्योरिटी से पहले पैसे निकालने की सुविधा मेडिकल इमरजेंसी और उच्च शिक्षा के लिए अचानक पड़ने वाली जरूरतों में खाताधारक के लिए मददगार होगी।

अवयस्कों की ओर से निवेश-

क्या है मौजूदा व्यव्स्था- छोटी बचत योजनाओं में अब तक कोई भी व्यस्क किसी अव्यस्क की जगह खाता खुलवा सकता है। प्रस्तावित कानून में संरक्षक को इससे जुड़े अधिकार और दायित्वों पर भी चर्चा हो सकती है।

क्या है प्रस्तावित व्यव्स्था- अब तक अगर किसी अव्यस्क की ओर से खाते में कोई राशि जमा की जाती है तो इस पर कोई साफ कानून नहीं था। जिस पर आगामी बदलाव में कोई नियम लाए जा सकते हैं। ये निश्चित तौर से बच्चों में बचत की आदत को प्रोत्साहित करेंगे।

उत्तराधिकारी को मिलने वाले लाभ की प्रक्रिया-

मौजूदा व्यवस्था- एक्ट के मौजूदा प्रावधान के तहत, अगर जमाकर्ता की मृत्यु हो जाती है और नामांकन मौजूद रहता है तो बकाया शेष राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाएगी।

प्रस्तावित व्यवस्था- सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बताया था कि नामांकित व्यक्ति को महज कानूनी वारिस के लाभ के लिए ट्रस्टी के रूप में राशि एकत्र करने का अधिकार है। इसेक चलते एक्ट के प्रावधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले में मतभेद हो रहे थे। इसलिए नामांकित व्यक्तियों के अधिकार अब स्पष्ट रूप से परिभाषित किए गए हैं।

नामांकन-

मौजूदा व्यवस्था- मौजूदा एक्ट के तहत, अव्यस्क के नाम पर खाता खोलने के संबंध में नामांकन का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही मौजूदा एक्ट के मुताबिक अगर खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, कोई नामांकित व्यक्ति नहीं है और राशि निर्धारित सीमा से ज्यादा है तो इस राशि का भुगतान लीगल एर (विधिक उत्तराधिकारी) को दर दिया जाएगा। इसके लिए संरक्षक को सक्सेशन सर्टिफिकेट हासिल करना होता है।

प्रस्तावित व्यव्स्था- इस असुविधा को दूर करने के लिए अव्यस्कों के नाम पर खोले गए खाते के संबंध में नामांकन के प्रावधान शामिल किए गए हैं। साथ ही ऐसे प्रावधान किये गये हैं कि अगर अव्यस्क की मृत्यु हो जाती है और कोई नामांकन नहीं किया गया है तो बाकाया शेष राशि सरंक्षक को दे दी जाएगी।

शिकायत सुधार (ग्रेवियेंस रिड्रैसल)

मौजूदा व्यवस्था- मौजूदा एक्ट में ग्रेवियेंस रिड्रैसल को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है

प्रस्तावित व्यवस्था- संशोधित एक्ट, सरकार को शिकायतों के निवारण और स्मॉल सेविंग से संबंधित विवादों के सौहार्दपूर्ण और शीघ्र निपटान के लिए एक तंत्र बनाने की अनुमति देता है।

अन्य बदलाव-
सभी तीन अधिनियमों में शारीरिक रूप से कमजोर और अक्षम व्यक्तियों के नाम पर खातों के संचालन के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं थे। इस संबंध में प्रावधान अब किए गए हैं।

Posted By: Surbhi Jain