SCSS Calculation: रिटायरमेंट के बाद बिना रिस्क पक्की इनकम! ₹30 लाख और ₹10 लाख के निवेश के लिए समझें कैलकुलेशन
SCSS Interest Rate: यह लेख सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) के बारे में बताता है, जिसमें 8.2% वार्षिक ब्याज दर ...और पढ़ें

SCSS Calculation: रिटायरमेंट के बाद बिना रिस्क पक्की इनकम! ₹30 लाख और ₹10 लाख के निवेश के लिए समझें कैलकुलेशन
HighLights
SCSS वरिष्ठ नागरिकों के लिए 8.2% ब्याज दर पर।
₹30 लाख निवेश पर तिमाही ₹61,499 ब्याज मिलता है।
₹10 लाख निवेश पर तिमाही ₹20,499 ब्याज प्राप्त करें।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप भी रिटायरमेंट पर बिना किसी रिस्क के हर महीने पक्की कमाई चाहते हैं (Retirement Income)? अगर हां, तो सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सीनियर सिटीजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकती है। ये योजना खास तौर पर वरिष्ठ नागरिकों (Saving Scheme for Senior Citizen) के लिए चलाई जा रही है और फिलहाल इस पर 8.2% का सालाना ब्याज मिलता है। तो आइए समझते हैं कि SCSS में ₹30 लाख के निवेश पर हर महीने कितने रकम आपके हाथ में आएगी।
कैसे ब्याज होता है कैलकुलेट?
सरकार हर तिमाही में छोटी बचत योजनाओं के लिए नई ब्याज दरों का एलान करती है। ऐसे में हाल ही में सरकार की ओर से अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही के लिए भी ब्याज दरों का एलान किया गया था, जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया (ब्याज दर 8.2% पर स्थिर है)।
इस योजना में खाता खुलवाने के लिए सामान्य तौर पर व्यक्ति की उम्र 60 साल या उससे अधिक होनी चाहिए। हालांकि रिटायर्ड सिविलियन कर्मचारियों को 55 से 59 साल की उम्र में भी कुछ तय शर्तों और समयसीमा के तहत खाता खुलवाने की छूट मिलती है।
कैलकुलेशन से समझें:
- कुल निवेश: 3000000
- निवेश की अवधि: 5 साल
- ब्याज दर: 8.2%
- एक साल का ब्याज: 246000
- 5 सालों में कुल ब्याज: ₹1230000
- हर तिमाही मिलने वाली ब्याज: ₹61499
₹10 लाख के निवेश पर कितनी रकम मिलेगी?
- कुल निवेश: 1000000
- निवेश की अवधि: 5 साल
- ब्याज दर: 8.2%
- एक साल का ब्याज: ₹81,996
- 5 सालों में कुल ब्याज: ₹4,10,000
- हर तिमाही मिलने वाली ब्याज: ₹20499
कैलकुलेशन से साफ है कि अगर आपने इस योजना में ₹10 लाख का निवेश किया है, तो हर तिमाही आपको बिना झंझट के ₹20499 मिलते रहेंगे।
क्या पहले बंद करवा सकते हैं खाता?
वैसे तो इस स्कीम में समय से पहले खाता बंद करवाने की सुविधा मिलती है लेकिन फिर इसके लिए कुछ शर्तें मानने पड़ती हैं और पेनाल्टी भी लगती है। इसके अलावा इस योजना से मिलने वाले ब्याज पर इनकम टैक्स के नियमों से हिसाब से टैक्स भी लगता है।
