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PPF vs VPF: दोनों में क्या अंतर, किसमें 100% सेफ्टी से साथ मिलता है 8% से ज्यादा ब्याज? आप के लिए क्या है सही

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:02 PM (GMT+05:30)

PPF और VPF दोनों ही रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश विकल्प हैं, जो अच्छा ब्याज और टैक्स-फ्री लाभ प्रदान करते हैं।

PPF से बिल्कुल अलग है VPF (ai photo)

PPF से बिल्कुल अलग है VPF (ai photo)

HighLights

  1. PPF 7.1% ब्याज, 15 साल लॉक-इन, सभी भारतीय नागरिक खोल सकते हैं।

  2. VPF 8.25% ब्याज, EPF से जुड़ा, केवल वेतनभोगी व्यक्ति निवेश कर सकते हैं।

  3. दोनों ही EEE टैक्स लाभ और सुरक्षित निवेश विकल्प प्रदान करते हैं।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: जब भी फाइनेंशियल प्लानिंग की बात आती है तो रिटायरमेंट इसका सबसे बड़ा हिस्सा होता है। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सबसे अहम है कि किस योजना में निवेश करना सही रहेगा जो आपके पैसों के लिए सुरक्षित विकल्प हो। ऐसे में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) दोनों भरोसेमंद और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आते हैं। ये उन कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए अच्छे हैं जो लंबे समय तक लगातार रिटर्न चाहते हैं।

भारत सरकार द्वारा शुरू की गई PPF और VPF बचत योजनाएं हैं। इनमें आमतौर पर ब्याज दर ज्यादा होती है और मिलने वाला पैसा टैक्स-फ्री होता है, जिससे ये रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए असरदार साधन बन जाती हैं। लेकिन यहां सबसे अहम सवाल अब यह आता है कि इन दोनों योजना में से आपके लिए सबसे सही क्या है तो आइए जानते हैं।

विशेषता PPF VPF
ब्याज दर  7.1% सालाना
8.25% सालाना तय ब्याज दर
कौन खोल सकता है? कोई भी भारतीय नागरिक वेतनभोगी व्यक्ति
निवेश की अवधि 15 साल (5-5 साल बढ़ा सकते हैं) पांच साल अनिवार्य
निवेश की सीमा
न्यूनतम ₹500, अधिकतम ₹1.5 लाख
 कुल सीमा ₹1.5 लाख
टैक्स बेनिफिट्स EEE (निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी टैक्स फ्री)
धारा 80C के तहत, ₹1.5 लाख तक
पैसे निकालने की सुविधा नियमों के अनुसार लोन और आंशिक निकासी की सुविधा
निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए अनुमति
मुख्य उद्देश्य लंबी अवधि में फंड तैयार करना और रिटायरमेंट प्लानिंग में मदद
सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (Public provident fund)

अगर आप रिटायरमेंट या किसी लंबे वित्तीय लक्ष्य के लिए धीरे-धीरे बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं, तो PPF सबसे बेस्ट है। इसमें 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें निवेश, मिलने वाला ब्याज (PPF interest) और मैच्योरिटी का पूरा पैसा टैक्स-फ्री (EEE कैटेगरी) होता है। PPF में सालाना न्यूनतम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख तक निवेश किया जा सकता है। इस स्कीम में सरकार द्वारा 7.1% (PPF Interest) का सालाना ब्याज मिलता है।

बता दें कि भारत में कोई भी पोस्ट ऑफिस, सरकारी बैंक या कुछ प्राइवेट बैंक PPF अकाउंट की सुविधा देते हैं, जिसमें हर महीने कम से कम ₹100-500 जमा करने होते हैं। इसके लिए KYC जरूरी है, जिसमें आपको ठीक से भरा हुआ फॉर्म, अपने आधार कार्ड की कॉपी, पते का सबूत और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करनी होगी। आप ऑनलाइन बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग के जरिए सीधे अपने बैंक में भी PPF अकाउंट खुलवा सकते हैं।

वॉलंटरी प्रोविडेंट फंड (Voluntary Provident fund)

जो लोग रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा जमा करना चाहते हैं, VPF उनके लिए काम का विकल्प हो सकता है। इसका एक फायदा यह है कि पैसा सीधे सैलरी से कट जाता है। आपको हर महीने अलग से निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन VPF का पैसा EPF से जुड़ा रहता है। इसलिए इसे सामान्य बैंक खाते की तरह जब चाहें तब निकाल नहीं सकते। निकासी पर EPF के नियम लागू होते हैं।

बता दें कि VPF पर सालाना ब्याज दर 8.25% है। इसके अलावा, PPF की तरह ही, ₹2,50,000 तक के योगदान पर यह EEE कैटेगरी का विकल्प है। सालाना ₹1.5 लाख तक का योगदान पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत सेक्शन 80C के तहत टैक्स-फ्री होता है। खास बात यह है कि VPF में योगदान करना स्वैच्छिक है, लेकिन एक बार इसे चुनने के बाद, व्यक्ति कम से कम 5 साल तक इससे बाहर नहीं निकल सकता। अगर 5 साल की न्यूनतम अवधि से पहले पैसे निकाले जाते हैं, तो उस पर टैक्स लगेगा।

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