OPS vs NPS: दोनों में कौन सी स्कीम आपके लिए सबसे सही, आठवें वेतन आयोग में क्यों उठ रही ओपीएस बहाली की मांग? समझें
8th Pay Commission Latest New: कर्मचारी संगठन आठवें वेतन आयोग में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की मांग कर ...और पढ़ें

आठवें वेतन आयोग में OPS बहाली की मांग: OPS और NPS में कौन बेहतर, जानें पूरा विश्लेषण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| ओल्ड पेंशन स्कीम यानी ओपीएस... ये वो स्कीम है, जिसकी आठवें वेतन आयोग (8th pay commission) में सबसे ज्यादा चर्चा है। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि आठवें वेतन आयोग में सैलरी-पेंशन बढ़ने के साथ ही ओल्ड पेंशन स्कीम को भी बहाल कर दिया जाए। ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का मानना है कि पुरानी व्यवस्था ही कर्मचारियों के बुढ़ापे की असली सुरक्षा है। लेकिन सरकार का तर्क है कि पुरानी पेंशन योजना अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा आर्थिक बोझ है, जिसके चलते सरकार इस पर ज्यादा बात करने से बचती है।
अब आठवें वेतन आयोग में OPS बहाली की चर्चा तेज हो गई है तो ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर NPS और OPS में अंतर क्या है? दोनों में से कर्मचारियों के लिए सबसे फायदेमंद कौन है? इसे लेकर मंजीत पटेल ने खुलकर अपनी बात रखी और बताया कि कर्मचारियों के लिए असल मायनों में कौन सी स्कीम सबसे सही है।
OPS vs NPS: दोनों में क्या है अंतर?
NPS क्या , इससे कितना फायदा: डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया कि एनपीएस यानी नेशनल पेंशन स्कीम (National Pension Scheme) कॉर्पस आधारित योजना है। यानी कर्मचारी का जितना पैसा जमा होगा, उसी के हिसाब से पेंशन बनेगी। कर्मचारी अपनी सैलरी का 10% देता है और सरकार 14% योगदान करती है। कुल मिलाकर 24% हर महीने जमा होता है। लंबी नौकरी, जैसे 30 साल या उससे ज्यादा, तो बड़ा कॉर्पस बनेगा और पेंशन बेहतर मिलेगी। लेकिन जिनकी नौकरी कम साल की है या जल्दी रिटायरमेंट हो गया, उन्हें कम पेंशन मिल सकती है। यही NPS की सबसे बड़ी आलोचना है।
OPS क्या है, इसके क्या हैं फायदे: ओपीएस यानी ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme) में 10 साल की सेवा के बाद पेंशन का अधिकार बन जाता था। यानी 10 साल की नौकरी के बाद कभी भी रिटायरमेंट होने पर 50% पेंशन पक्की थी और जीपीएफ के रूप में कटा हुआ कर्मचारी का पैसा बिना कटौती के पूरा वापस मिल जाता था। सबसे बड़ी बात यह है कि 20 साल की नौकरी के बाद कर्मचारी कभी भी वॉलंटरी रिटायरमेंट ले सकता था जिसमें सारे लाभ पूर्ण रूप से मिलते थे और पेंशन अंतिम वेतन पर आधारित थी, कॉर्पस पर नहीं। इसलिए इसे 'गारंटीड' और सुरक्षित माना जाता है।
बड़ा सवालः कर्मचारी OPS बहाली की मांग क्यों कर रहे?
डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया कि कर्मचारी OPS की मांग (old pension restoration demand) इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि इसमें पेंशन की साफ गारंटी थी। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी की आखिरी बेसिक सैलरी 60,000 रुपए है, तो OPS में उसे सीधा 50% यानी 30,000 रुपए मासिक पेंशन मिलती थी, चाहे बाजार की हालत कुछ भी हो।
जबकि NPS में पेंशन इस बात पर निर्भर करती है कि 20-25 साल में कितना कॉर्पस जमा हुआ और उस पर कितना रिटर्न मिला। अगर नौकरी कम साल की रही तो पेंशन भी कम हो सकती है। UPS में भी 25 साल की सेवा जरूरी है। इसी अनिश्चितता के कारण कर्मचारी OPS को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
मंजीत पटेल ने इसे और आसान शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि, ओल्ड पेंशन स्कीम एक गैर-अंशदायी व्यवस्था थी, जिसमें कर्मचारी के अंतिम वेतन के आधार पर निश्चित पेंशन मिलती थी, जबकि एनपीएस एक बाजार-आधारित अंशदायी योजना है। सरकार के मौजूदा नियमों के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान या रिटायरमेंट से कुछ समय पहले मृत्यु या दिव्यांगता हो जाती है, तो उसके पास दो विकल्प होते हैं।
- पहला विकल्प: कर्मचारी अपना हिस्सा ब्याज सहित लेकर ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत अंतिम बेसिक सैलरी का आधा और डीयरनेस अलाउंस (DA) पा सकता है।
- दूसरा विकल्प: कुल कॉर्पस का 20 प्रतिशत निकालकर बाकी 80 प्रतिशत को बैंक में निवेश कर एनपीएस के आधार पर पेंशन ली जाए।
आठवें वेतन आयोग से क्या है मांग?
डॉ. पटेल का कहना है कि पेंशन कोई व्यापार या बिजनेस नहीं है, बल्कि यह बुढ़ापे की सोशल इनकम सिक्योरिटी की गारंटी है। डॉ. पटेल ने कैलकुलेशन समझाते हुए सवाल उठाया कि अगर कोई कर्मचारी 18 साल की उम्र में सेवा में आकर 42 साल तक लंबी और बेदाग नौकरी पूरी करता है, और अंत में केवल एनपीएस के दायरे में रहता है, तो उसके साथ नाइंसाफी है। इसके विपरीत, अगर किसी हादसे या अनहोनी के कारण कोई कम समय की सेवा के बाद भी लाभ पा जाता है, तो ज्यादा साल सेवा देने वाले का क्या गुनाह है? डॉ. पटेल की मांग है कि आठवें वेतन आयोग में ओल्ड पेंशन स्कीम को बहाल किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों का भविष्य सिक्योर हो सके।
