Salary Hike: अप्रेजल का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के पैसे आते ही उड़े होश! इंक्रीमेंट के बाद भी क्यों नहीं बढ़ी रकम?
अप्रेजल के बावजूद भी कई कर्मचारियों की शिकायत है कि इन-हैंड सैलरी कम आ रही है। दरअसल नए लेबर कोड ...और पढ़ें

न्यू लेबर कोड सिस्टम से घटा कर्मचारियों का इनहैंड पैसा (AI Image)
HighLights
नए लेबर कोड से बेसिक सैलरी 50% हुई अनिवार्य।
इन-हैंड सैलरी में कमी, पर पीएफ-ग्रेच्युटी बढ़ी।
रिटायरमेंट के लिए बचत हुई मजबूत, कर्मचारियों को फायदा।
नई दिल्ली| इन दिनों ज्यादातर प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों का इंक्रीमेंट हुआ है या फिर होने जा रहा है। इंक्रीमेंट किसी भी एम्प्लोई के लिए किसी त्योहार से कम नहीं होता है। लेकिन इस साल अप्रेजल (Appraisal) होने के बाद भी नौकरीपेशा वाले लोग खुश नहीं हैं। कंपनी ने अप्रेजल लेटर तो 10% (उदाहरण के तौर पर) का दिया, लेकिन सैलरी के साथ जुड़ कर आने वाले पैसे पूरे नहीं आए। इसके पीछे का कारण है नया लेबर कोड सिस्टम, आइए समझते हैं।
अप्रेजल के बाद भी क्यों कम हुई सैलरी?
जिन कर्मचारियों का अप्रेजल हो चुका है, उन्होंने गौर किया होगा कि उनके अप्रेजल लेटर में मेंशन कुल CTC के अनुसार उनकी इन हैंड सैलरी (Salary) कम आई है। इसका कारण है पिछले साल से लागू होने वाला न्यू लेबर कोड सिस्टम। दरअसल न्यू लेबर कोड के अनुसार कुल सीटीसी की 50 फीसदी बेसिक सैलरी होना जरूरी कर दिया गया है। अगर किसी की सालाना आय ₹6 लाख यानि की महीने की ₹50 हजार सैलरी है तो उसकी 25 हजार बेसिक सैलरी होना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में इन हैंड मिलने वाले पैसे में थोड़ी कटौती हो सकती है।
पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं और बाकी पैसा घर, मोबाइल फोन बिल जैसे अलग-अलग अलाउंस में देती थीं, जिससे कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी ज्यादा रहती थी। बेसिक सैलरी बढ़ाने से सैलरी का कैल्युकेशन बदल गया और जेब में आने वाले पैसे कम हो गए।
बेसिक सैलरी बढ़ने से क्या फायदे?
नए लेबर कोड सिस्टम लागू होने के बाद 50 फीसदी बेसिक सैलरी को अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन ज्यादातर लोग इसके फायदे के बारे में जानना चाहते हैं। आपको बता दें कि किसी भी संस्थान में फुल टाइम काम करने वाले कर्मचारियों को PF और ग्रेच्युटी दी जाती है। जिसका पैसा एम्प्लोई की बेसिक सैलरी के आधार पर तय किया जाता है। आपके बेसिक सैलरी का 12 फीसदी हिस्सा आपके पीएफ अकाउंट (PF Account) में जमा होता है। बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ का शेयर भी बढ़ जाएगा।
बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होने से ना सिर्फ कर्मचारी बल्कि कंपनी का भी PF योगदान बढ़ सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि रिटायरमेंट के दौरान आपकी शेविंग अधिक मजबूत होगी। साथ ही कंपनी में लंबा वक्त बिताने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले ग्रेच्युटी के पैसे में भी इजाफा होगा। यही कारण है कि अप्रेजल के बाद भी कर्मचारियों को मिलने वाली इन हैंड रकम उतनी नहीं है जितनी कागजों में देखकर आप अंदाजा लगा रहे हैं।
