Salary Management: सैलरी आते ही हो जाती है खत्म, तो फटाफट अपनाएं ये जबरदस्त फॉर्मूला; भर-भर के बचेगा पैसा
Salary Managment rule: अगर आपकी सैलरी महीने की शुरुआत में ही खत्म हो जाती है, तो 50-20-10-10-10 फॉर्मूला अपनाकर अपने खर्चों को मैनेज करें।

इस रूल से बचेंगे ढेरो पैसे (ai generated)
HighLights
सैलरी को 50-20-10-10-10 फॉर्मूले में बांटकर करें बेहतर प्रबंधन।
50% जरूरी खर्चों, 20% निवेश और 10% इमरजेंसी फंड के लिए।
10% निजी खर्चों और 10% बड़े लक्ष्यों के लिए निर्धारित करें।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: हर महीने की शुरुआत में सैलरी आती तो है लेकिन टिकती नहीं है? अकाअंट में पैसे क्रेडिट होते ही EMI, किराया, रेंट, राशन, और शॉपिंग जैसे खर्च आपका बजट बिगाड़ देते हैं। और फिर महीने के आखिरी में हाथ में कुछ नहीं बचता है।
महीने की आखिरी वाली तंगी से बचने का एक आसान तरीका है। जब भी सैलरी आती है तो उसे 5 अलग-अलग हिस्सों में बांट देना चाहिए। हर हिस्से का एक तय काम होता है। इससे आपको पहले से पता रहता है कि कितना पैसा खर्च करना है और कितना बचाना है।
क्या है फॉर्मूला?
बता दें कि यह रूल आपको बिल्कुल इमानदारी के साथ अपनाना होगा। इस फॉर्मूले में सैलरी का 50% जरूरी खर्च के लिए रखा जाता है। 20% निवेश, 10% इमरजेंसी फंड, 10% निजी खर्च और 10% बड़े लक्ष्यों के लिए रखा जाता है। अब इसे समझने के लिए हम आपको उदाहरण से समझाएंगे।
1. जरूरी खर्च के लिए बचाएं 50% सैलरी
महीने की शुरुआत होते ही इस बात की टेंशन होती है की रेंट देना है, जो समान घर में खत्म हो गया है वो लेना है तो ऐसे में सबसे पहले जरूरी खर्च का हिस्सा अलग करना चाहिए। इसमें घर का किराया, EMI, राशन, बिजली-पानी का बिल, बच्चों की फीस और रोजमर्रा की जरूरी चीजें शामिल हो सकती हैं।
अब अगर उदाहरण से समझें तो आपकी सैलरी ₹50,000 है तो इस हिस्से में करीब ₹20,000 रखे जा सकते हैं। यहां आप यह भी कोशिश कर सकते हैं कि आपका जरूरी खर्च इससे ऊपर न जाएं।
2. निवेश के लिए रखते हैं 20% पैसे
अब सैलरी को मैनेज करने के लिए दूसरा ऑप्शन भविष्य के लिए है। अब अगर आपकी सैलरी ₹50,000 है तो आपको लगभग ₹10,000 हर महीने निवेश करना जरूरी है। इस पैसे को आप अलग-अलग निवेश प्लान में निवेश कर सकते हैं।
3. इमरजेंसी के लिए निकाले 10% पैसे
कभी-कभी अचानक खर्चे आते हैं तो पैसे ही नहीं बचते हैं। ऐसे में अचानक खर्चों के लिए अलग पैसा होना बहुत जरूरी है। इसके लिए आप अपनी सैलरी का 10% अलग रख सकते है। ₹50,000 की सैलरी में यह रकम ₹5,000 महीने होगी।
4. पर्सनल खर्चों के लिए रखें 10%
अब कभी-कभी ऐसा होता है कि हम पैसे बचाने और खर्चों के चक्कर में खुद के लिए कुछ नहीं कर पाते हैं। तो ऐसे में आपको हर महीने सिर्फ बिल और निवेश के लिए ही नहीं बल्कि घूमने-फिरने, मनोरंजन और अपनी पसंद के खर्च के लिए भी पैसा अलग रखना जरूरी है। अब ₹50,000 की सैलरी में ₹5,000 इस हिस्से में रखे जा सकते हैं।
5. अपने विशलिस्ट के लिए रखें10%
अब आखिरी हिस्सा आता है आपके उन लक्ष्यों के लिए जिन्हें आप आने वाले कुछ सालों में पूरा करना चाहते हैं। इसमें गाड़ी खरीदना, घर का डाउन पेमेंट, बड़ा पर्सनल गोल शामिल हो सकता है। ₹50,000 की सैलरी में इसके लिए ₹5,000 महीने अलग किए जा सकते हैं।
अब यहां आप एक काम और कर सकते हैं कि जैसे-जैसे सैलरी बढ़ती है, इस हिस्से को भी आप थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ा सकते हैे।
नोट: इस फॉर्मूले में आप अपने इच्छा अनुसार कुछ बदलाव भी कर सकते हैं। इस रूल का मकसद सिर्फ इतना है कि आप सैलरी आते ही हर रुपये को एक काम दे दिया जाए, ताकि महीने के अंत में यह सवाल न उठे कि पैसा आखिरगया कहां।
