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शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना और प्रॉपर्टी...वित्त मंत्री के बयान के बाद समझें इन पर कितना लगता है LTGC टैक्स

Published: Wed, 14 Oct 2026 01:16 PM (IST)Updated: Wed, 14 Oct 2026 02:31 PM (IST)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के LTCG और STT पर बयान के बाद, यह लेख शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना और प्रॉपर्टी ...और पढ़ें

शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना और प्रॉपर्टी...वित्त मंत्री के बयान के बाद समझें इन पर कितना लगता है LTGC टैक्स

शेयर, म्यूचुअल फंड, सोना और प्रॉपर्टी...वित्त मंत्री के बयान के बाद समझें इन पर कितना लगता है LTGC टैक्स

HighLights

  1. शेयरों पर ₹1.25 लाख तक LTCG टैक्स-फ्री, फिर 12.5%।

  2. डेट म्यूचुअल फंड पर अब शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स।

  3. सोने और प्रॉपर्टी पर LTCG गणना के विशेष नियम।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने LTCG और STT को लेकर बड़ा बयान दिया। वित्त मंत्री के बयान से बाजार (Share Market) में भी हलचल देखने को मिली। कई लोगों को लगा कि सरकार LTCG और STT खत्म करने वाली है। हालांकि वित्त मंत्री ने इसे लेकर कुछ नहीं कहा।

बाजार में निवेश के कई तरीके मौजूद हैं। शेयर बाजार में दिलचस्पी रखने वाले शेयर मार्केट में निवेश करते हैं। तो जो मार्केट से रिस्क से थोड़ा दूर रहना चाहते हैं और कंपाउंडिंग का फायदा लेना चाहते हैं, तो वो म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करते हैं। वहीं जो लोग मार्केट से जुड़ा किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं, वो गोल्ड और रियल एस्टेट में निवेश करते हैं।तो आइए समझते हैं कि LTCG की इतनी चर्चा क्यों होने लगी है और अलग-अलग निवेश के लिए ये टैक्स कैसे काम करते हैं।

1. शेयर्स (Stocks)

अगर आप लिस्टेड इक्विटी शेयर्स को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो इनसे होने वाला फायदा लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। स्टॉक्स के लिए एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पूरी तरह टैक्स फ्री हैं। इससे ऊपर के फायदों पर 12.5% की दर से टैक्स देना पड़ता है।

मान लीजिए कि आपको एक साल में शेयरों पर कुल ₹2 लाख का फायदा हुआ, तो शुरुआती ₹1.25 लाख पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन बाकी बचे ₹75000 पर 12.5% का टैक्स सेस और सरचार्ज के साथ देना होगा।

2. म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds)

म्यूचुअल फंड्स पर टैक्स के नियम इस बात पर निर्भर करते हैं कि फंड किस कैटेगरी का है। हर फंड के लिए अलग-अलग नियम लागू होते हैं। जैसे इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड (Equity-Oriented Mutual Funds) में निवेश पर 12 महीने से ज्यादा होल्ड पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। वहीं यहां भी शुरुआती ₹1.25 लाख पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन उससे ऊपर की कमाई पर 12.5% का LTCG आपको देना होगा।

बात करें डेट म्यूचुअल फंड की तो अगर आपने 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद डेट म्यूचुअल फंड खरीदे हैं, तो इनसे होने वाला पूरा फायदा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। आप इन्हें आप इन्हें कितने भी लंबे समय तक रखें, मुनाफा आपकी सामान्य इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्सेबल होगा। इसमें कोई इंडेक्सेशन (Indexation) का फायदा नहीं मिलता। लेकिन 1 अप्रैल 2023 के पहले खरीदे गए डेट फंड्स पर पुराने नियों ट्रांजिशन प्रोविजंस के आधार पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% LTCG लग सकता है।

3. सोना (Gold)

अगर आप गोल्ड में निवेश करते हैं तो टैक्स गोल्ड के फॉर्मेट के हिसाब से तय होगा। फिजिकल गोल्ड और डिजिटल माध्यम से खरीदे गए गोल्ड पर टैक्स के अलग-अलग नियम लागू होते हैं। अगर आप फिजिकल गोल्ड जैसे गहने या बिस्किट खरीदते हैं और फिर उन्हें 24 महीने से ज्यादा के लिए होल्ड करते हैं तो फिर यहां लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बनेगा। ध्यान देने वाली बात ये है कि यहां बिना इंडेक्सेशन के सीधे 12.5% टैक्स लगता है।

बात करें गोल्ड ETFs की, तो क्योंकि ये लिस्टेड सिक्योरिटीज हैं, इसलिए इन्हें 12 महीने से ज्यादा रखने पर लॉन्ग-टर्म माना जाता है। वहीं गोल्ड म्यूचुअल फंड्स लेने पर 24 महीने होल्ड करने के बाद से LTCG टैक्स लगेगा। ध्यान रहे कि शेयरों की तरह सोने के मुनाफे पर ₹1.25 लाख की छूट का फायदा नहीं मिलता है। सोने पर होने वाला फायदा पूरी तरह लॉन्ग-टर्म मुनाफा टैक्स के दायरे में आता है। अगर इसे कम समय के लिए रखकर बेचा जाए, तो टैक्स स्लैब के हिसाब से शॉर्ट-टर्म टैक्स लगता है।

4. प्रॉपर्टी (Property / Real Estate)

जमीन और मकान खरीदना अचल संपत्ति में आता है। तो अगर इन्हें 24 महीने से ज्यादा समय के लिए रखा जाए, तो इससे होने वाला मुनाफा LTCG कहलाता है। वहीं संशोधित नियमों के तहत प्रॉपर्टी के लॉन्ग-टर्म गेन पर बिना इंडेक्सेशन के 12.5% टैक्स लगता है।

जो लोग 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई प्रॉपर्टी बेच रहे हैं, उनके लिए सरकार ने राहत दी है। ऐसे लोग टैक्स के दो कैलकुलेशन में तुलना कर सकते हैं। पहला 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) और दूसरा 20% (इंडेक्सेशन के साथ)। जो भी टैक्स कम बैठेगा, उन्हें वही चुकाना होगा। बता दें कि प्रॉपर्टी के मामलों में भी शेयरों की तरह ₹1.25 लाख सालाना छूट का नियम लागू नहीं होता है। 24 महीने या उससे कम समय में प्रॉपर्टी बेचने पर शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एसटीजीसी) लगता है।

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