फेस्टिव सीजन में ऑफर्स के चक्कर में न हो जाए नुकसान, जानिए कैश-क्रेडिट कार्ड और EMI में से क्या है बेस्ट?
Festive Season Payment Method: फेस्टिव सीजन में खरीदारी के दौरान भुगतान के सही तरीके का चुनाव महत्वपूर्ण है। यह लेख ...और पढ़ें

फेस्टिव सीजन में ऑफर्स के चक्कर में न हो जाए नुकसान, जानिए कैश-क्रेडिट कार्ड और EMI में से क्या है बेस्ट? (AI Generated Image)
HighLights
फेस्टिव सीजन में भुगतान के तरीके सोच-समझकर चुनें।
कैश, क्रेडिट कार्ड और ईएमआई के फायदे-नुकसान समझें।
विशेषज्ञों के अनुसार, बचत के लिए कैश बेहतर विकल्प है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। चाहे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (Online Shopping) हो या फिर शॉपिंग मॉल, फेस्टिव सीजन में आपको तरफ सैंकड़ों ऑफर्स दिखाई देंगे (Festive Season Shopping)। हाल ही में सरकार ने UPI पर MDR चार्ज भी लगाया, जो 15 अक्टूबर से लागू होगा। अब ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि इस फेस्टिव सीजन आप पेमेंट (Best Payment Option) का कौन सा तरीका इस्तेमाल करें, जिससे आपकी थोड़-बहुत बचत हो सके। तो आइए आज आपको बताते हैं कि कैश, क्रेडिट कार्ड और ईएमआई में से आपको पेमेंट का कौन सा तरीका चुनना है।
कैसे करना चाहिए पेमेंट?
जब भी आप कहीं शॉपिंग करते हैं तो अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरह के चार्जेस लगते हैं। कैश का इस्तेमाल करेंगे तो एटीएम चार्जेस देने होंगे, यूपीआई का इस्तेमाल करेंगे तो मर्चेंट पर MDR लगेगा और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे तो प्रोसेसिंग फीस जैसे चार्जेस लगेंगे। ऐसे में आप नीचे दी गई टेबल से समझ सकते हैं कि पेमेंट का कौन सा तरीका ज्यादा सही है:
| पेमेंट का तरीका | फायदे | नुकसान / छिपे हुए चार्जेस | फेस्टिव सीजन के लिए सलाह |
| कैश / यूपीआई / डेबिट कार्ड | • कोई ईएमआई या बकाया चुकाने की टेंशन नहीं। • बजट कंट्रोल में रहता है। | • बैंक कार्ड्स पर मिलने वाले बड़े फेस्टिव डिस्काउंट्स से चूक सकते हैं। • एक साथ ज्यादा कैश निकलने से इमरजेंसी फंड कम हो सकता है। | जब आप बिना किसी झंझट के सीधे खरीदारी करना चाहते हैं और कोई बड़ा डिस्काउंट जरूरी न हो। |
| क्रेडिट कार्ड | • 10% तक का इंस्टेंट डिस्काउंट और रिवॉर्ड पॉइंट्स मिलते हैं। • पैसे तुरंत खाते से नहीं कटते (कुछ दिन बैंक मेंफ रहते हैं)। | • अगर बिल समय पर न भरा जाए, तो भारी ब्याज लगता है। | सबसे बेस्ट ऑप्शन: अगर आपके पास पूरा पैसा है और आप ड्यू डेट से पहले बिल चुका सकते हैं। |
| नो-कॉस्ट ईएमआई | • एक साथ बड़ा पैसा खर्च नहीं करना पड़ता (Cash-flow बना रहता है)। • महंगे सामान आसानी से किस्तों में आ जाते हैं। | • फुल पेमेंट पर मिलने वाला इंस्टेंट डिस्काउंट नहीं मिलता। • प्रोसेसिंग फीस (₹199-₹299) और ब्याज पर 18% GST अलग से लगता है (सामान महंगा पड़ता है)। | सिर्फ तब जब कोई बहुत जरूरी और महंगा सामान खरीदना हो और एक साथ बड़ा पैसा देना संभव न हो। |
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों का मानना है कि हमेशा ऐसे फेस्टिव सीजन में सोच-समझकर शॉपिंग करें, क्योंकि जो ऑफर्स अभी अच्छे लग रहे हैं, हो सकता है कि वो आगे आपका नुकसान करवा दें। साथ ही कैश में खरीदारी करना सही रहता है, इससे आपके पास हिसाब रहता है और तो और किसी भी तरह का चार्ज नहीं देना पड़ता है।
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