EPS Calculation: वेज लिमिट बढ़ने पर ₹42000 सैलरी वालों की कितनी बढ़ी पेंशन? कैलकुलेशन से समझें पूरा हिसाब
EPS calculation: यह लेख ईपीएस पेंशन की गणना पर वेज सीलिंग बढ़ने के प्रभाव को समझाता है, खासकर ₹42,000 वेतन और 10 साल की सेवा वाले कर्मचारियों के लिए।

वेज लिमिट बढ़ने पर ₹42000 सैलरी वालों की कितनी बढ़ी पेंशन?
HighLights
EPS वेज सीलिंग ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई।
₹42,000 सैलरी पर 10 साल में कितनी पेंशन?
कंपनी का 8.33% योगदान अब ₹2,088 तक।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) एक बड़ा सहारा बनकर उभरती है। लेकिन EPF कवरेज के लिए बेसिक सैलरी की अधिकतम सीमा (wage ceiling) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,00 कर दिया गया है। ऐसे में अगर आप 10 साल की नौकरी करते हैं और आपकी सैलरी ₹42000 है तो आपकी पेंशन (Pension) कितनी बनती है ये जानते हैं।
बता दें कि कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF के नियमों के मुताबिक, रेगुलर मासिक पेंशन पाने के लिए किसी भी कर्मचारी को कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करना अनिवार्य होता है।
क्या है फॉर्मूला ?
EPFO के अनुसार EPS पेंशन का फॉर्मूला है-
मासिक पेंशन = (पेंशनेबल सैलरी × पेंशनेबल सेवा) ÷ 70
* पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary): आखिरी 60 महीनों के औसत वेतन के आधार पर।
* पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service): EPS में योगदान वाले कुल सालों की संख्या।
₹42000 सैलरी पर 10 साल में कितनी बनेगी पेंशन?
अब ये समझते हैं कि अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹42000 है और आपका योगदान सीलिंग लिमिट से ऊंचे असली सैलरी पर हो रहा है, तो पेंशन की गणना इस प्रकार होगी:
10 साल की नौकरी पर: (42,000 × 10) / 70 = ₹6000
यानी ₹42000 सैलरी होने पर 10 साल की नौकरी पर आपको हर महीने लगभग ₹6000 की गारंटीड पेंशन मिलेगी।
कंपनी का योगदान
आपकी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा PF में जाता है और उतना ही हिस्सा 12% कंपनी भी मिलाती है। कंपनी के 12% का बंटवारा कुछ इस तरह होता है:
1. 8.33% EPS फंड में जाता है: पुराने नियम में ₹15,000 की लिमिट पर कंपनी अधिकतम ₹1250 हर महीने आपके पेंशन फंड में डालती थी, लेकिन अब नए नियम के ₹25,000 की लिमट पर ₹2,088 आपके फंड में जमा होंगे।
2. 3.67% EPF खाते में जाता है।
नए नियम के तहत अब EPF के दायरे में
नए नियम के मुताबिक, अब ऐसे एंप्लॉयीज भी अनिवार्य रूप से EPFO के तहत आएंगे, जिनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तक होगी। अगर किसी व्यक्ति की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है तो इसका 12% कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयीज की सैलरी से जाएगा। यह अमाउंट 3000 रुपये होगा। 3000 रुपये का ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। एंप्लॉयर को अनिवार्य रूप से इस नियम का पालन करना होगा। इससे एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट पर फायदा होगा।
