EPS Calculation: ₹30000 है सैलरी, तो कितनी बनेगी पेंशन? देखिए 10 साल की नौकरी का पूरा कैलकुलेशन
EPS Calculation: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की EPS योजना के तहत ₹30,000 की सैलरी पर 10 साल की नौकरी के बाद पेंशन की गणना समझाई गई है।
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10 साल में कितनी बनंगी पेंशन?
HighLights
EPS पेंशन गणना का सूत्र और ₹30,000 सैलरी पर उदाहरण।
10 साल की सेवा पर ₹4,286 मासिक पेंशन मिलेगी।
EPFO की वेज सीलिंग अब ₹25,000 हुई, नए नियम लागू।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) एक बड़ा सहारा बनकर उभरती है। लेकिन EPF कवरेज के लिए बेसिक सैलरी की अधिकतम सीमा (wage ceiling) को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,00 कर दिया गया है, तब से कर्मचारियों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि अगर उन्होंने 10,15, 20 या कितने साल भी काम किया तो उन्हें कितनी पेंशन (Pension) मिलेगी और इसका हिसाब वे कैसे लगाएं।
अब बता दें कि कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF के नियमों के मुताबिक, रेगुलर मासिक पेंशन पाने के लिए किसी भी कर्मचारी को कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी करना अनिवार्य होता है। तो ऐसे में हम समझेंगे कि अगर बेसिक सैलरी 30,000 रुपए है और किसी कर्मचारी ने 10 साल काम किया है तो फिर कितनी पेंशन मिलेगी।
कैलकुलेशन समझिए
EPFO के अनुसार EPS पेंशन का फॉर्मूला है-
मासिक पेंशन = (पेंशनेबल सैलरी × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70
* पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary): आखिरी 60 महीनों के औसत वेतन के आधार पर।
* पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service): EPS में योगदान वाले कुल सालों की संख्या।
10 साल में कितनी बनेगी पेंशन?
अब ये समझते हैं कि अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी ₹30,000 है और आपका योगदान सीलिंग लिमिट से ऊपर असली सैलरी पर हो रहा है, तो पेंशन की गणना इस प्रकार होगी:
10 साल की नौकरी पर: (30,000 × 10) / 70 = ₹4,286
यानी 10 साल की नौकरी पर आपको हर महीने लगभग ₹4,286 की गारंटीड पेंशन मिलेगी।
नए नियम के तहत अब EPF के दायरे में
नए नियम के मुताबिक, अब ऐसे एंप्लॉयीज भी अनिवार्य रूप से EPFO के तहत आएंगे, जिनकी बेसिक सैलरी 25,000 रुपये तक होगी। अगर किसी व्यक्ति की बेसिक सैलरी 25,000 रुपये है तो इसका 12% कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयीज की सैलरी से जाएगा। यह अमाउंट 3000 रुपये होगा। 3000 रुपये का ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी करेगा। एंप्लॉयर को अनिवार्य रूप से इस नियम का पालन करना होगा। इससे एंप्लॉयीज को रिटायरमेंट पर फायदा होगा।
