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PF Rule Change: संकट के समय घट सकता है पीएफ योगदान, आपकी सैलरी पर क्या होगा असर?

Published: Wed, 16 Sep 2026 12:02 PM (IST)

EPS Scheme Rules: नई EPF स्कीम 2026 के तहत सरकार राष्ट्रीय संकट के दौरान कर्मचारी और नियोक्ता के पीएफ योगदान ...और पढ़ें

PF Rule Change: संकट के समय घट सकता है पीएफ योगदान, आपकी सैलरी पर क्या होगा असर?

PF Rule Change: संकट के समय घट सकता है पीएफ योगदान, आपकी सैलरी पर क्या होगा असर?

HighLights

  1. नई EPF स्कीम 2026 के तहत पीएफ योगदान में बदलाव संभव।

  2. सरकार संकट में अस्थायी रूप से योगदान घटा या टाल सकती है।

  3. इससे टेक-होम सैलरी बढ़ेगी, पर पीएफ जमा पर असर।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नई EPF स्कीम के तहत सरकार ने एक ऐसा प्रावधान किया है, जिससे किसी बड़े राष्ट्रीय संकट, महामारी या आपदा के दौरान आपके पीएफ का गणित बदल सकता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है की PF Contribution पर क्या असर पड़ेगा। आइए इसे विस्तार से जानते हैं।

क्या है सरकार की नई स्कीम?

नई EPF स्कीम 2026 के तहत केंद्र सरकार कर्मचारी का योगदान, नियोक्ता का योगदान या दोनों को अस्थायी तौर पर घटाने या टालने का फैसला कर सकती है। ये राहत एक बार में ज्यादा से ज्यादा 3 महीने के लिए ही दी जाएगी। संकट खत्म होने के बाद फिर से पुराना नियम यानी सामान्य पीएफ कटने लगेगा।

कर्मचारी खुद कम नहीं कर सकते योगदान!

इस स्कीम की खास बात ये है कि कर्मचारी खुद अपनी मर्जी से अपना पीएफ कंट्रीब्यूशन कम नहीं कर सकते। ये फैसला पूरी तरह से केंद्र सरकार के हाथ में होगा कि वो इसे पूरे देश में लागू करती है या किसी खास इलाके के लिए। यानी कि ये जरूरी नहीं है कि देश के हर कर्मचारी के पीएफ में कटौती हो।

सैलरी पर क्या होगा असर?

अगर सरकार संकट के समय पीएफ का योगदान घटाती है, तो आपकी सैलरी से कम पैसे कटेंगे। इससे मुश्किल वक्त में आपके हाथ में ज्यादा कैश रहेगा और टेक-होम सैलरी बढ़ जाएगी। लेकिन उस टाइम पीरियड में पीएफ खाते में कम पैसे जमा होंगे, इसलिए आपके लॉन्ग-टर्म रिटायरमेंट फंड और उस पर मिलने वाले ब्याज पर थोड़ा असर पड़ सकता है। यानी ये हमेशा के लिए कोई छूट नहीं है, बल्कि सिर्फ बुरे वक्त में मिलने वाली एक अस्थायी राहत है।

क्या पहले भी ऐसा हुआ है?

मालूम हो कि ये कोई नया नियम नहीं है। कोरोना के टाइम पर भी सरकार ने कंपनियों और कर्मचारियों के लिए वैधानिक पीएफ योगदान की दर को 12% से घटाकर 10% कर दिया था ताकि उस मुश्किल दौर में सबका कैश फ्लो बेहतर बना रहे।

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