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क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत के बाद परिवार भरेगा बिल! क्या रिकवरी एजेंट दे सकता है धमकी? 

Published: Fri, 23 Oct 2026 07:30 AM (GMT+05:30)

यह लेख बताता है कि क्रेडिट कार्ड धारक की मृत्यु के बाद बकाया बिल का भुगतान कौन करेगा। इसमें स्पष्ट ...और पढ़ें

क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत के बाद परिवार भरेगा बिल! क्या रिकवरी एजेंट दे सकता है धमकी?

क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत के बाद परिवार भरेगा बिल! क्या रिकवरी एजेंट दे सकता है धमकी? 

HighLights

  1. मृतक क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान परिवार की जिम्मेदारी नहीं।

  2. बैंक बकाया राशि मृतक की संपत्ति से ही वसूल सकता है।

  3. संपत्ति न होने पर बैंक इसे बैड डेट मानकर राइट-ऑफ करता है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। त्योहारी सीजन में क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जाता है। लोग हर एक छोटी चीज क्रेडिट कार्ड से ही खरीदते हैं। लेकिन क्या आपने ये सोचा है कि अगर किसी हादसे में क्रेडिट कार्ड होल्डर (Credit Card Holder Death) की मौत हो गई तो उसका बकाया बिल कौन भरेगा? क्या परिवार या पत्नी को अपनी जेब से वो बिल भरना ही पड़ेगा? आइए विस्तार से जानते हैं।

क्या परिवार चुकाएगा बिल?

अगर क्रेडिट कार्ड सिर्फ किसी एक इंसान के नाम पर है तो इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि उसका बिल उसका परिवार चुकाएगा। साथ ही अगर व्यक्ति अगर शादीशुदा है तो उसकी पत्नी भी बिल चुकाने के लिए बाध्य नहीं होगी। वहीं इसका मतलब ये भी नहीं है कि बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी वो बिल माफ कर देगी।

नियम के मुताबिक, बैंक मृतक की संपत्ति (Assets) से अपने पैसे वसूल सकता है। इसे नीचे दिए गए उदाहरण के जरिए समझा जा सकता है-

मान लीजिए, पति के क्रेडिट कार्ड पर 2 लाख रुपये का बिल बकाया है। उनकी मौत के बाद पत्नी और बच्चों को विरासत में कुछ बैंक बैलेंस, एफडी या दूसरी संपत्ति मिलती है। ऐसी स्थिति में बैंक उस संपत्ति से अपने 2 लाख रुपये वसूल सकता है।

लेकिन, अगर पति की छोड़ी हुई कुल संपत्ति सिर्फ 50 हजार रुपये की ही है, तो बाकी के पैसों के लिए पत्नी को अपनी निजी बचत या सैलरी से भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। सिर्फ पत्नी होने के नाते वह कर्ज के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं हैं।

पत्नी किस केस में चुकाएगी बिल?

अगर किसी हादसे में पति की मौत हो जाती है, तो पत्नी को कुछ खास परिस्थितियों में बिल चुकाना पड़ता है। जैसे कि:

  • अगर किसी एग्रीमेंट या कार्ड की शर्तों के तहत पत्नी ने पहले ही बकाया चुकाने की जिम्मेदारी ली हो।
  • अगर कभी बैंक ने पति के कार्ड में अपना नाम भी एड-ऑन करवाया हो।

मालूम को एड-ऑन के मामले में बैंक हमेशा देखता है कि पति और पत्नी ने कितना खर्च किया। जरूरी नहीं है कि पति के बाद पत्नी हर बिल को चुकाए।

अगर पति के नाम पर कोई संपत्ति ही न हो?

अगर पति के नाम पर कोई बैंक बैलेंस, एफडी, घर या किसी भी तरह की संपत्ति नहीं है, तो बैंक के हाथ खाली रह सकते हैं। अगर पत्नी ने खुद कर्ज की जिम्मेदारी नहीं ली है और उन्हें पति से विरासत में कुछ नहीं मिला है, तो बैंक उन पर भुगतान का दबाव नहीं बना सकता।

मालूम हो कि चाहे व्यक्ति शादीशुदा हो या फिर नहीं, उसकी पत्नी या परिवार, कोई भी बिल चुकाने के लिए बाध्य नहीं होगा। यदि मृतक के नाम पर कोई संपत्ति नहीं है, तो बैंक उस बकाया राशि को 'बैड डेट' (Bad Debt) मानकर राइट-ऑफ (छोड़) देगा।

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