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AC-TV, फ्रिज खरीद पर दिए जा रहे 'No Cost EMI' के झांसे से बचें, छिपी हुई 3 लागतों पर ध्यान देना जरूरी

By Jagran BusinessEdited By: Ashish Kushwaha
Published: Sat, 19 Sep 2026 08:03 PM (IST)Updated: Sat, 19 Sep 2026 08:37 PM (IST)

उपभोक्ता वस्तु लोन लेते समय शून्य ब्याज के आकर्षण से बचने और छिपी हुई लागतों पर ध्यान देने की सलाह ...और पढ़ें

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HighLights

  1. अतिरिक्त लागतों जैसे प्रोसेसिंग फीस की अच्छी तरह पड़ताल करें।

  2. लोन देने वाले संस्थान की आरबीआई पंजीकरण की जांच करें।

  3. कुल ईएमआई अपनी आय के 40 प्रतिशत से अधिक न होने दें।

नई दिल्ली। आज बड़ी संख्या में लोग उपभोक्ता वस्तुएं जैसे- फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन, एयर कंडीशनर और स्मार्टफोन लोन पर लेते हैं। इसको कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन (उपभोक्ता वस्तु लोन) भी कहा जाता है। ऐसा कर्ज लेने वालों में नए उपभोक्ताओं या पहली बार लोन लेने वालों की बड़ी संख्या होती है। कई सारी कंपनियां उपभोक्ता वस्तुओं पर शून्य ब्याज या बिना ब्याज लोन का आफर देती हैं। इस प्रकार के लोन बड़ी आसानी से मिल जाते हैं। हालांकि, कई बार ऐसे लोन पर चुकाई गई राशि कंपनी का आफर से अधिक हो सकती है। उपभोक्ता वस्तुओं पर लोन लेते समय ध्यान रखने योग्य बातें बता रहे हैं मनोज कुमार।

अतिरिक्त लागत

उपभोक्ता वस्तु बेचने वाली कंपनियां कई बार बिना ब्याज समान मासिक किस्त (ईएमआइ) की पेशकश करती हैं। ऐसे मामलों में सामान खरीदने वाले उपभोक्ता को कोई ब्याज नहीं देना पड़ता है, बल्कि निर्माता और व्यापारी खरीद के समय ब्याज को सब्सिडी के तौर पर उधार देने वाले बैंक या वित्तीय संस्थान को देते हैं। लेकिन उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लेनदेन में कोई अतिरिक्त लागत तो नहीं है। बिना ब्याज वाले ईएमआइ प्रस्ताव में उपभोक्ता से प्रोसेसिंग फीस या सामान पर मिलने वाली छूट को खत्म करके ब्याज की वसूली की जा सकती है। ऐसे में लोन लेने से पहले प्रोसेसिंग फीस, सुविधा शुल्क, लागू कर और पूर्व-भुगतान फीस की अच्छी तरह पड़ताल कर लेनी चाहिए।

लोन देने वाले संस्थान की जांच

जानकारों का कहना है कि उपभोक्ताओं को इस प्रकार की वस्तुओं पर लोन देने वाले संस्थान की पड़ताल अच्छे से करनी चाहिए। उपभोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लोन देने वाला संस्थान आरबीआइ के पास पंजीकृत बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) हो। यदि उधार देने वाला बैंक या एनबीएफसी आरबीआइ के पास पंजीकृत नहीं है तो वह आपके डाटा के साथ खिलवाड़ कर सकता है जिससे आपकी वित्तीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। साथ ही लोन देने वाले बैंक या एनबीएफसी को केवल आवश्यक डिजिटल डाटा की सहमति प्रदान करें।

जरूरत पर ही खरीदारी

विशेषज्ञों का कहना है कि पहली बार औपचारिक वित्तीय प्रणाली में प्रवेश के लिए उपभोक्ता वस्तु लोन एक बेहतर विकल्प है। ऐसे लोन की समय पर अदायगी के जरिये एक उपभोक्ता अपना अच्छा क्रेडिट प्रोफाइल बना सकता है। लेकिन कई बार ऐसे में लोन में छिपी हुई लागत होती है जो इसको काफी महंगा बना देती है और पुनर्भुगतान में दिक्कत हो सकती है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर ही उपभोक्ता वस्तुएं लोन पर खरीदें। यदि जरूरी न हो तो ऐसी खरीदारी को स्थिगित करना अधिक समझादारी भरा फैसला हो सकता है।

40 प्रतिशत से अधिक न हो कुल ईएमआइ

कई बार लोग पहले से ही ईएमआइ चुका रहे होते हैं और नई उपभोक्ता वस्तुएं लोन पर लेने की योजना बनाते हैं। तमाम वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति पर उसकी कुल आय का 40 प्रतिशत से अधिक ईएमआइ नहीं होना चाहिए। ऐसे में लोन पर उपभोक्ता वस्तु लेने से पहले अपनी पुरानी ईएमआइ का ध्यान रखना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि नया लोन लेने के बाद कुल ईएमआइ 40 प्रतिशत से अधिक न हो।

खाते में पर्याप्त पैसा हो

ऐसे लोन के मामले में अधिकांश बैंक या वित्तीय संस्थान उपभोक्ताओं को आटो-डेबिट (खाते से अपने आप पैसा कटना) का विकल्प देते हैं। समय पर मासिक किस्त के भुगतान के लिए अपने संबंधित बैंक खाते में पर्याप्त पैसा रखें। यदि किसी कारणवश आटो-डेबिट विफल हो जाता है तो 24-48 घंटे के भीतर मैन्युअल भुगतान करके बैंक या वित्तीय संस्थान को सूचित करें। अगले क्रेडिट-ब्यूरो रिपोर्टिंग चक्र से पहले बकाया चुकाने से शुल्क और क्रेडिट स्कोर के नुकसान को सीमित किया जा सकता है।

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