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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 27, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कारोबारियों को राहत, 30 सितंबर तक टला ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’

By Surbhi JainEdited By:
Published: Wed, 27 Jun 2018 11:39 AM (IST)

सीजीएसटी और एसजीएसटी कानून की धारा 9 (4) के तहत ‘रिवस चार्ज मैकेनिज्म’ का प्रावधान है

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नई दिल्ली (हरिकिशन शर्मा)। कारोबारियों को मिल रही राहत जारी रखते हुए सरकार ने जीएसटी कानून के ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’,टीडीएस व टीसीएस संबंधी प्रावधानों को एक बार फिर टालने का फैसला किया है। जीएसटी कानून के ये तीन विवादित प्रावधान अब 30 सितंबर तक लागू नहीं होंगे।

सूत्रों ने कहा कि जीएसटी क्रियान्वयन समिति (जीआइसी) की हाल में हुई बैठक में यह फैसला किया गया है। फिलहाल ये तीनों विवादित प्रावधान 30 जून तक निलंबित थे। अगले एक-दो दिन में सरकार इसकी आधिकारिक घोषणा कर देगी। जिस समय जीएसटी काउंसिल की बैठक नहीं होती है, उस समय जीआइसी इस तरह के निर्णय करती है। इसके बाद जब काउंसिल की बैठक होती है, तब वह जीआइसी के निर्णयों पर मुहर लगा देती है।

उल्लेखनीय है कि सीजीएसटी और एसजीएसटी कानून की धारा 9 (4) के तहत ‘रिवस चार्ज मैकेनिज्म’ का प्रावधान है लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर छोटे और बड़े व्यापारियों को आपत्ति रही है। यही वजह है कि जीएसटी काउंसिल ने छह अक्टूबर को हुई बैठक में ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’ के नियम को 31 मार्च 2018 तक और इसके बाद 10 मार्च, 2018 को हुई बैठक में इसे 30 जून तक टालने का फैसला किया गया था। हालांकि अब भी स्थिति अनुकूल न देख इसका क्रियान्वयन 30 सितंबर तक निलंबित रखने का फैसला किया गया है। वैसे, इस दौरान सरकार ने कंपोजीशन स्कीम लेने वाले डीलरों के लिए रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के नियम को लागू करने की कोशिश में जीएसटी काउंसिल के एक मंत्रिसमूह का गठन भी किया लेकिन अब तक समूह ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है।

‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’ की तरह ही जीआइसी ने टीडीएस व टीसीएस के प्रावधानों का क्रियान्वयन भी 30 सितंबर तक टालने का फैसला किया है। सीजीएसटी कानून की धारा 51 और 52 में टीडीएस (टैक्स डिडेक्टेड एट सोर्स) और टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स) के संबंध में प्रावधान है। टीसीएस संबंधी धारा के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को जीएसटी काटकर सरकार के खाते में जमा कराने का प्रावधान है। ई-कॉमर्स से जुड़ी कंपनियां इस प्रावधान को लेकर आपत्ति जता चुकी हैं। यही वजह है कि देश में जीएसटी एक जुलाई 2017 से लागू होने के बाद भी सरकार ने अब तक टीडीएस और टीसीएस से संबंधित धाराओं का क्रियान्वयन नहीं किया है। ये दोनों धाराएं अब तक ठंडे बस्ते में ही रहीं हैं।

क्या है ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’:

सीजीएसटी और एसजीएसटी कानून की धारा 9 (4) और आइजीएसटी कानून की धारा 5 (4) के तहत ‘रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म’ का प्रावधान है। इसका मतलब है कि अगर कोई पंजीकृत व्यापारी किसी अपंजीकृत व्यापारी से एक दिन में पांच हजार रुपये से अधिक का सामान खरीदता है या सेवा प्राप्त करता है तो जीएसटी जमा करने की जिम्मेदारी पंजीकृत व्यापारी की होगी। उन्हें अपने बही-खातों में इसे दर्ज करते हुए जीएसटी का भुगतान खुद ही करना होगा। यह बात अलग है कि बाद में उन्हें इसका इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल सकता है।

एक साल में जीएसटी हो गया सुगम: अढिया

वित्त सचिव हसमुख अढिया ने कहा है कि एक साल के भीतर जीएसटी सुगम हो गया है। इसका अनुपालन भी बेहतर है और अब सरकार का फोकस रिटर्न फार्म को सरल बनाने पर होगा। अढिया ने एक इंटरव्यू में कहा कि जीएसटी ने करों का अंबार खत्म कर दिया। नए टैक्स के तहत 1.11 करोड़ करदाता पंजीकृत हो चुके हैं। रिटर्न फाइलिंग और कर भुगतान में हर महीने सुधार हुआ। कुछ समय बाद अनुपालन 96 फीसद तक पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर की अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग्स (एएआर) के विरोधाभासी फैसलों से उत्पन्न समस्याएं सुलझाने के लिए राजस्व विभाग केंद्रीय अपीलेट अथॉरिटी बनाने पर विचार कर रहा है। इस संबंध में जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में फैसला हो सकता है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम उत्पादों में से नेचुरल गैस और हवाई ईंधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाना आसान है। जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इसके बारे में विचार हो सकता है।