नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। संसदीय पैनल ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) की व्यवस्था को जल्द से जल्द दोबारा चालू करने का आग्रह किया है। 14,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक के घोटाले में दुरुपयोग होने के बाद आरबीआइ ने इस पर रोक लगा दी थी।

वाणिज्य मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एलओयू और एलओसी (लेटर ऑफ कम्फर्ट) पर रोक लगने से कर्ज की लागत दो-ढाई फीसद तक बढ़ गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा में टिकने की क्षमता प्रभावित हो रही है।

इससे निर्यात प्रभावित होगा तो देश में रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार समिति का मानना है कि समुचित सुरक्षात्मक उपायों के साथ एलओयू व एलओसी को जल्द से जल्द अनुमति दी जानी चाहिए। यह इस वजह से बहुत अहम है कि देश के कुल निर्यात में करीब 20 फीसद आयातित वस्तुओं का इस्तेमाल होता है। एलओयू और एलओसी का इस्तेमाल विदेश से वस्तुओं के आयात के भुगतान करने में किया जाता है।

इस साल मार्च में पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद रिजर्व बैंक ने एलओयू और एलओसी पर रोक लगा दी थी। हीरा व्यापारी नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने कथित तौर पर बड़े पैमाने पर इसका दुरुपयोग करके बैंकिंग सिस्टम को चूना लगाया और देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले को अंजाम दिया।

आयातक अपने बैंक में फीस जमा करके एलओयू जारी करने के लिए अनुरोध करते थे। इसके आधार पर विदेश स्थित बैंक आयातक के नाम पर कर्ज दे देते थे। इस कर्ज से आयातित वस्तुओं का भुगतान किया जाता था। लेकिन नीरव मोदी और उसके सहयोगियों ने पीएनबी के स्टाफ के साथ मिलकर फर्जी एलओयू जारी करवाए और विदेश स्थित बैंकों से कर्ज ले लिए जो कुल मिलाकर करीब 14,000 करोड़ रुपये हो गए।

Posted By: Nitesh

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