दीपावली से पहले Gold ETF में नए निवेश पर लगी अस्थाई रोक, अब नही कर पाएंगे SIP?
कई म्यूचुअल फंड हाउसों ने गोल्ड ईटीएफ फंड-ऑफ-फंड्स में नए निवेश को अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिसमें नए एकमुश्त निवेश और एसआईपी पंजीकरण शामिल हैं।

गोल्ड ईटीएफ फंड-ऑफ-फंड्स में नए निवेश पर रोक।
HighLights
गोल्ड ईटीएफ फंड-ऑफ-फंड्स में नए निवेश पर रोक।
नए एकमुश्त निवेश, एसआईपी पंजीकरण अस्थायी रूप से बंद।
नियामकीय चर्चाओं और सोने की मांग के कारण प्रतिबंध।
एजेंसी, नई दिल्ली। कई म्यूचुअल फंड हाउसों ने शुक्रवार से गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETF) फंड-ऑफ-फंड्स (एफओएफ) में नए निवेश को अस्थायी रूप से रोक दिया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रतिबंध नए लंपसम निवेश, नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) रजिस्ट्रेशन और मौजूदा एसआईपी के तहत किए जाने वाले अतिरिक्त निवेश, जिसमें टॉप-अप सुविधाएं भी शामिल हैं, पर लागू होगा।
कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड सहित कई फंड हाउसों ने गुरुवार देर रात नोटिस जारी कर कामकाज रोके जाने की घोषणा की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ फंड हाउसों ने स्विच-इन ट्रांजैक्शन और नए सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगा दी है। निवेशकों को भेजी गई सूचनाओं के मुताबिक, ये कदम अस्थायी हैं और अगले आदेश तक लागू रहेंगे।
एक फंड हाउस ने बताया कि यह कदम नियामकीय स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद उद्योग जगत के माध्यम से मिले निर्देशों के अनुरूप उठाया गया है। ये प्रतिबंध केवल नई सदस्यताओं, नई एसआईपी रजिस्ट्रेशन और मौजूदा एसआईपी के तहत स्टेप-अप अनुरोधों पर लागू होंगे।
पहले से जारी SIP और STP चलती रहेगी
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा जारी नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध लागू होने से पहले पंजीकृत एसआईपी और एसटीपी की मौजूदा किस्तों की प्रोसेसिंग पहले की तरह जारी रहेगी।
साथ ही निवेशकों के रिडेम्प्शन और स्विच-आउट अनुरोधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इसी तरह, एक अन्य फंड हाउस ने कहा कि गुरुवार को निर्धारित कट-ऑफ समय के बाद जमा किए गए आवेदन अस्वीकार किए जा सकते हैं और निवेशकों का पैसा वापस किया जा सकता है।
प्रतिबंध लागू होने से पहले पंजीकृत सभी व्यवस्थित निवेश लेनदेन बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जारी किए गए नोटिसों में इस कदम का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, हालांकि निवेशकों के लिए रिडेम्प्शन की सुविधा जारी रखी गई है।
दीवाली और दशहरे से पहले क्यों लगा प्रतिबंध?
यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाया गया है जब दशहरा और दीवाली से पहले आमतौर पर सोने की मांग में तेजी देखी जाती है।
भारत घरेलू मांग को पूरा करने के लिए काफी हद तक सोने के आयात पर निर्भर है और सोने का अधिक आयात व्यापार घाटे को बढ़ाने के साथ-साथ रुपए पर भी दबाव डाल सकता है।
इस वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से नागरिकों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा था कि एक वर्ष तक किसी भी समारोह या अवसर पर सोने के आभूषण नहीं खरीदने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय हित में हमें एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने का निर्णय लेना चाहिए।
