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अब व्यापारी जमकर उधारी में खरीदें माल, पेमेंट करेंगे बैंक! कैसे काम करता है RBI का TReDS प्लेटफॉर्म?

Published: Wed, 23 Sep 2026 03:30 PM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 03:33 PM (IST)

छोटे कारोबारियों को भुगतान में देरी की समस्या से निजात दिलाने के लिए RBI ने TReDS प्लेटफॉर्म बनाया है। यह ...और पढ़ें

TReDS से होगी कारोबारियों की पेमेंट

TReDS से होगी कारोबारियों की पेमेंट 

HighLights

  1. TReDS MSME के रुके भुगतान को तुरंत दिलाता है।

  2. यह प्लेटफॉर्म वर्किंग कैपिटल की कमी दूर करता है।

  3. बिना कोलेट्रल इनवॉइस फाइनेंसिंग की सुविधा मिलती है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| छोटे कारोबारियों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है पैसा फंसना यानि भुगतान में देरी। कई बार माल या सेवा की सप्लाई करने के बाद ग्राहक से भुगतान आने में 30, 60 या उससे ज्यादा दिन लग जाते हैं। ऐसे में कारोबार का पैसा फंस जाता है और रोजमर्रा के खर्च, वेतन और नई खरीदारी के लिए वर्किंग कैपिटल की कमी हो सकती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए TReDS यानी Trade Receivables Discounting System बनाया गया है।

TReDS RBI के रेगुलेशन वाला इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जहां MSME के बकाया इनवॉइस को फाइनेंस कराया जा सकता है। RBI के अनुसार इसमें MSME seller, buyer और financier तीनों पक्ष होते हैं।

कैसे काम करता है TReDS?

किसी MSME ने किसी बड़ी कंपनी को ₹10 लाख का सामान सप्लाई किया। कंपनी को भुगतान 60 दिन बाद करना है। MSME को अगर अभी पैसे की जरूरत है तो वह इस इनवॉइस को TReDS पर डाल सकता है। वहां बैंक या दूसरे ऑथराइज्ड financiers उस इनवॉइस को फाइनेंस करने के लिए बोली लगाते हैं। MSME चुनी गई बोली के आधार पर financier से पेमेंट पहले ले लेता है, बाद में जब इनवॉइस की भुगतान तारीख आती है, तो buyer financier को भुगतान करता है।

इस और आसानी से समझें तो अगर बायर्स के पास तत्काल भुगतान के लिए पैसा नहीं है तो वो TReDS पर अपना इनवॉइस या बिल डाल सकता है फिर वहां कोई फाइनेंसर बोली लगाकर सप्लायर्स को पैसे दे देते हैं, बाद में बायर्स के पास जब पैसे आते हैं तो वो फाइनेंसर के पैसे वापिस करता है। RBI के मुताबिक TReDS में ऐसे लेन-देन MSME के लिए "without recourse" होते हैं, यानी सामान्य TReDS transaction में buyer के default का भुगतान MSME से वापस लेने की जिम्मेदारी नहीं होती।

इस प्लेटफॉर्म की खासियत ये है कि TReDS के माध्यम से इनवॉइस का पैसा भुगतान की आखिरी तारीख तक इंतजार किए बिना प्राप्त किया जा सकता है।

TReDS प्रमुख फायदे हैं

बिक्री का पैसा जल्दी मिलने से कारोबार चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल बना रहता है।
SIDBI के अनुसार TReDS पर MSME को उसके invoices/bills के आधार पर बिना कोलेट्रल के वित्तीय सहायता मिल सकती है।
Delayed payment की समस्या कम होती है जिससे MSME को ग्राहक के भुगतान का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता।
बैंक लोन पर निर्भरता कम होती है, कारोबार के लिए अलग से working-capital loan लेने की जरूरत कुछ मामलों में कम हो सकती है।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

MSME को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के किसी ऑथराइज्ड TReDS प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करना होता है। SIDBI के अनुसार भारत में RXIL, M1xchange और Invoicemart जैसे प्लेटफॉर्म हैं। यहां ऑनबोर्डिंग प्रोसेस में बिजनेस/KYC डिटेल्स, PAN, GSTIN, रजिस्टर्ड एड्रेस और बैंक स्टेटमेंट्स मांगे जाते हैं। इसके बाद वेरिफिकेशन और एग्रीमेंट की प्रक्रिया होती है।

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ध्यान रखें अलग-अलग TReDS प्लेटफॉर्म पर डाक्यूमेंट्स, चार्जेस और ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए रजिस्ट्रेशन से पहले संबंधित RBI ऑथराइज्स प्लेटफॉर्म की मौजूदा शर्तें जरूर देखें। Registration करने से पहले MSME को यह देखना चाहिए कि उसके प्रमुख buyers किस platform पर मौजूद हैं और वहां कितने financiers उपलब्ध हैं।