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नए व्यापारी जान लें GST फाइलिंग का नियम! टर्नओवर, GSTR-1 और GSTR-3B की लास्ट डेट और न भरने वालों पर क्या कार्रवाई?

Published: Wed, 16 Sep 2026 03:44 PM (IST)

छोटे कारोबारियों के लिए समय पर GST रिटर्न फाइल करना महत्वपूर्ण है, ताकि लेट फीस और GST नंबर रद्द होने ...और पढ़ें

GST फाइलिंग की पूरी डिटेल

GST फाइलिंग की पूरी डिटेल

HighLights

  1. समय पर GST रिटर्न फाइल करना लेट फीस और ब्याज से बचाता है।

  2. GSTR-1, GSTR-3B और QRMP योजना के तहत रिटर्न दाखिल करें।

  3. रिटर्न न भरने पर GST नंबर रद्द, 'Nil Return' भी अनिवार्य।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| GST रजिस्ट्रेशन कराने वाले छोटे कारोबारियों और व्यापारियों के लिए समय पर GST रिटर्न फाइल करना बेहद जरूरी है। रिटर्न फाइल नहीं करने पर न केवल लेट फीस और ब्याज देना पड़ सकता है, बल्कि GST नंबर भी सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। ऐसे में कारोबारियों को यह समझना जरूरी है कि उन्हें कौन-सा रिटर्न कब दाखिल करना है।

GST पोर्टल के अनुसार सामान्य (Regular) टैक्सपेयर को GSTR-1 और GSTR-3B रिटर्न फाइल करना होता है। GSTR-1 में बिक्री (Outward Supply) का विवरण दिया जाता है, जबकि GSTR-3B में कर देनदारी और टैक्स भुगतान की जानकारी दर्ज की जाती है।

क्या हैं GST फाइल करने के नियम?

जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है, वे QRMP (Quarterly Return Monthly Payment) योजना के तहत तिमाही आधार पर GSTR-1 और GSTR-3B दाखिल कर सकते हैं। वहीं अन्य नियमित टैक्सपेयर्स को हर महीने रिटर्न भरना होता है। हर महीने रिटर्न भरने वाले करदाताओं के लिए GSTR-3B दाखिल करने की सामान्य लास्ट डेट अगले महीने की 20 तारीख होती है। वहीं QRMP योजना के तहत तिमाही रिटर्न भरने वालों के लिए अलग-अलग राज्यों के अनुसार 22 या 24 तारीख निर्धारित की गई है।

रिटर्न नहीं भरा तो क्या होगा?

अब सबसे जरूरी सवाल का जवाब जान लेते हैं कि अगर GST नियमों के तहत रिटर्न दाखिल नहीं कर पाए तो क्या होगा? ऐसा होने पर लेट फीस और ब्याज लगाया जा सकता है। लगातार रिटर्न नहीं भरने वाले टैक्सपेयर्स के GST रजिस्ट्रेशन पर कार्रवाई भी हो सकती है। इसके अलावा खरीदारों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) मिलने में दिक्कत आती है, जिससे कारोबारी संबंध प्रभावित हो सकते हैं।

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कारोबार नहीं हुआ तब भी रिटर्न जरूरी?

कई छोटे व्यापारी यह मान लेते हैं कि यदि किसी महीने कारोबार नहीं हुआ तो रिटर्न दाखिल करने की जरूरत नहीं है। लेकिन GST पोर्टल के अनुसार रेगुलर टैक्सपेयर को ‘Nil Return’ भी दाखिल करनी होती है। यानी बिक्री या खरीद नहीं होने पर भी रिटर्न भरना जरूरी है। ऐसा न करने पर फाइलिंग ड्यू होती है।