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दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में चाय, सब्जी या रेहड़ी लगाने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी? जानिए नियम, परमिशन और खर्च

Published: Thu, 24 Sep 2026 06:42 PM (IST)

दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में चाय, सब्जी या रेहड़ी लगाने के लिए 'स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, 2014' के तहत लाइसेंस ...और पढ़ें

महानगरों में दुकान लगाने के नियम

महानगरों में दुकान लगाने के नियम

HighLights

  1. स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत नियम लागू होते हैं।

  2. व्यवसाय के लिए वेंडिंग सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है।

  3. आवेदन शुल्क ₹100 से शुरू होता है, जो बदल सकता है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली और मुंबई में लाखों लोग चाय, सब्जी, फल, फास्ट फूड और अन्य सामान बेचकर अपना रोजगार चलाते हैं। वहीं कुछ ऐसे लोग हैं जो बड़े शहरों में खुद की दुकान चलाना चाहते हैं। हालांकि सड़क किनारे दुकान या रेहड़ी लगाना इतना आसान नहीं है। इसके लिए स्थानीय निकायों के नियम, वेंडिंग जोन और परमिशन की व्यवस्था लागू होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चाय, स्ट्रीट फूड या सब्जी की रेहड़ी लगाने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है और इसमें कितना खर्च आता है।

क्या है दुकान लगाने का नियम?

देश में स्ट्रीट वेंडर्स के राइट्स और रेगुलेशन के लिए "स्ट्रीट वेंडर्स (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) एक्ट, 2014" लागू है। इस कानून के तहत शहरों में स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान, सर्वे और वेंडिंग जोन तय करने की व्यवस्था की गई है। कानून के अनुसार पात्र स्ट्रीट वेंडर्स को "सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग" जारी किया जाता है, जो उन्हें निर्धारित क्षेत्र में कारोबार करने का अधिकार देता है।

बिना अनुमति नहीं लगा सकते दुकान

कानून के तहत स्थानीय निकाय और टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) यह तय करती है कि किस इलाके में दुकान लगाने की अनुमति होगी और किस इलाके में आप दुकान नहीं लगा सकते। कई बिजी मार्केट, मेट्रो स्टेशन, सरकारी दफ्तरों के आसपास और सेक्टर्स में विशेष नियम लागू हो सकते हैं, यहां आप बिना किसी परमीशन के दुकान नहीं लगा सकते हैं।

दिल्ली में क्या है नियम?

कई रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स की मानें तो दिल्ली में नगर निगमों और NDMC क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स के लिए सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग की व्यवस्था है। वेंडर को पहचान पत्र और वेंडिंग सर्टिफिकेट साथ रखना होता है। दिल्ली के नियमों के अनुसार सर्टिफिकेट निर्धारित अवधि के लिए वैध रहता है और उसका रेनुअल भी कराया जाता है।

दिल्ली सरकार के नियमों के मुताबिक स्ट्रीट वेंडर के रूप में रजिस्ट्रेश के लिए आवेदन शुल्क ₹100 निर्धारित किया गया था। हालांकि अलग-अलग स्थानीय निकायों में समय के साथ शुल्क और अन्य चार्ज बदल सकते हैं।

मुंबई में क्या नियम हैं?

मुंबई में भी स्ट्रीट वेंडिंग एक्ट, 2014 के तहत टाउन वेंडिंग कमेटी और स्थानीय प्रशासन वेंडिंग जोन तय करते हैं। पात्र वेंडर्स को सर्वे और अप्रूवल प्रोसेस के बाद वेंडिंग सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। बिना अनुमति सार्वजनिक स्थान पर कारोबार करने पर कार्रवाई हो सकती है।

दुकान लगाने के लिए जरूरी डाक्यूमेंट्स

  • आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र
  • निवास प्रमाण
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर
  • व्यवसाय से संबंधित जानकारी
  • पहले से वेंडिंग करने का कोई प्रमाण (जहां लागू हो)
  • स्थानीय निकाय द्वारा मांगे गए अन्य दस्तावेज
  • कुछ मामलों में खाद्य पदार्थ बेचने वालों को FSSAI पंजीकरण की भी जरूरत पड़ सकती है।

कितना आता है खर्च?

शहरों में दुकान, ठेला या चलित बिजनेस शुरू करने के लिए जरूरी परमीशन जानने के बाद खर्च के बारे में भी जानना जरूरी है। बता दें कि शहर, स्थान और कारोबार के प्रकार के अनुसार चार्जेस बदलता है। आवेदन शुल्क आम तौर पर कुछ ₹100 तक हो सकता है। वेंडिंग चार्ज या लाइसेंस चार्ज स्थानीय निकाय तय करते हैं। इसके अलावा रेनुअल चार्ज अलग से देना पड़ सकता है।

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एक्सपर्ट्स के अनुसार वैलिड परमिशन और डाक्यूमेंट्स का शुरुआती खर्च आमतौर पर ₹100 रुपये से लेकर कुछ हजार रुपये तक हो सकता है, जबकि वास्तविक कारोबार शुरू करने की लागत रेहड़ी, सामान और स्टॉक पर निर्भर करती है।

PM SVANidhi योजना का उठाएं लाभ

यदि कोई स्ट्रीट वेंडर मान्यता प्राप्त है या स्थानीय निकाय के रिकॉर्ड में दर्ज है, तो वह पीएम स्वनिधि योजना के तहत वर्किंग कैपिटल लोन जैसी सुविधाओं का लाभ लेने का पात्र हो सकता है। केंद्र सरकार ने स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं।