इन कारोबारियों को तुरंत करा लेना चाहिए GST Registration, ना कराने पर घटेगा मुनाफा, कानूनी पचड़े में भी पड़ सकते हैं
देश में GST लागू होने के 9 साल बाद भी छोटे कारोबारियों में रजिस्ट्रेशन को लेकर भ्रम है। यह लेख ...और पढ़ें

GST रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जरूरी बातें
HighLights
सामान के लिए ₹40 लाख, सेवा के लिए ₹20 लाख टर्नओवर सीमा।
ई-कॉमर्स, अंतर-राज्यीय व्यापार के लिए GST रजिस्ट्रेशन अनिवार्य।
रजिस्ट्रेशन न करने पर भारी जुर्माना, ITC हानि, कानूनी पचड़े।
नई दिल्ली| देश में GST लागू हुए 9 साल पूरे होने वाले हैं। अभी भी देश के लाखों छोटे कारोबारी आज भी इस बात को लेकर भ्रम में रहते हैं कि उन्हें GST Registration कब कराना चाहिए? कई व्यवसायियों का मानना है कि केवल बड़ी कंपनियों को GST की जरूरत होती है। दरअसल निश्चित टर्नओवर का जबकि नियमों के मुताबिक तय टर्नओवर पार करते ही रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाता है।
कितने टर्नओवर पर GST Registration जरूरी?
GST के नियमों के मुताबित सामान (Goods) बेचने वाले कारोबारियों के लिए अधिकांश राज्यों में सालाना एग्रीगेट टर्नओवर ₹40 लाख से अधिक होने पर GST Registration जरूरी है। वहीं, सेवा (Services) देने वाले कारोबारियों के लिए यह सीमा ₹20 लाख है। यदि कोई कारोबारी सामान और सेवाएं दोनों देता है, तो आमतौर पर ₹20 लाख की सीमा लागू होती है। वहीं कुछ विशेष तरह के कारोबार में टर्नओवर की सीमा निर्धारित नहीं है, उनके लिए GST Registration कराना हर हाल में अनिवार्य है।
इनमें ई-कॉमर्स के माध्यम से बिक्री करने वाले बिजनेस, यानि ऑनलाइन सामान बेचने वाले, एक राज्य से दूसरे राज्य में व्यापार करने वाले और रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM) यानि जो सर्विस सेक्टर सीधे सरकार को टैक्स देते हैं, उनके लिए ये रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
कई कारोबारी केवल बिक्री (Sales) को ही टर्नओवर मान लेते हैं, जबकि GST में एग्रीगेट टर्नओवर में टैक्सेबल सप्लाई, एक्सपोर्ट, इंटर-स्टेट सप्लाई और कुछ अन्य सप्लाई भी शामिल होती हैं। इसकी गणना पूरे भारत में एक ही PAN के तहत होने वाले कारोबार को जोड़कर की जाती है।
GST Registration के क्या फायदे हैं?
VAT, Excise Duty, Service Tax, Entry Tax जैसे इनडायरेक्ट टैक्स की बजाय GST के तहत सरल टैक्स सिस्टम।
रजिस्टर्ड कारोबार अपने कच्चे माल, मशीनरी और अन्य खरीद पर चुकाए गए GST का क्रेडिट ले सकते हैं। इससे वास्तविक टैक्स बोझ कम होता है।
GST से इंटर-स्टेट व्यापार में कई बाधाएं खत्म हुईं। अलग-अलग राज्यों के अलग टैक्स नियमों की समस्या से छुटकारा।
GST रजिस्ट्रेशन और नियमित रिटर्न फाइलिंग से कंपनी की क्रेडिबिलिटी बढ़ती है। बड़ी कंपनियां और बैंक भी ऐसे कारोबारियों को प्राथमिकता देते हैं।
रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग और रिफंड जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो गई हैं, इससे पारदर्शिता आई और कागजी कार्रवाई कम हुई है।
GST रिफंड और एकीकृत टैक्स सिस्टम से निर्यातकों को लाभ मिला है और भारतीय उत्पादों का कॉम्पटीशन भी मजबूत हुआ है।
GST Registration ना कराने के नुकसान
- GST कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन कराने का पात्र होने के बावजूद GST Registration नहीं कराता, तो उस पर भारी जुर्माना लग सकता है।
- रजिस्ट्रेशन ना कराने पर विभाग पिछली तारीख से GST देनदारी निकाल सकता है और बकाया टैक्स के साथ ब्याज भी वसूल सकता है।
- बिना GST Registration के व्यापारी अपनी खरीद पर दिए गए GST का ITC नहीं ले सकता। इससे लागत बढ़ जाती है और मुनाफा कम हो सकता है।
- अधिकांश कॉरपोरेट कंपनियां और बड़े खरीदार GST-रजिस्टर्ड सप्लायर्स को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि उन्हें ITC का लाभ मिलता है। बिना GSTIN वाले कारोबारियों को ऑर्डर गंवाने पड़ सकते हैं।
- GST विभाग अब डेटा एनालिटिक्स, आयकर डेटा, ई-वे बिल और डिजिटल लेनदेन के आधार पर बिना रजिस्ट्रेशन वाले कारोबारियों की पहचान कर रहा है। पकड़े जाने पर नोटिस और जांच का सामना करना पड़ सकता है। कई बार टैक्स चोरी और कानूनी कार्रवाई जैसी समस्याएं भी आ सकती हैं।
