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GST को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला, छोटे व्यापारियों के ITC रजिस्ट्रेशन को लेकर नई गाइडलाइंस; सप्लायर्स की गलती नहीं पड़ेगी भारी!

Published: Fri, 02 Oct 2026 12:13 PM (IST)

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि ...और पढ़ें

GST को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला

GST को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला

HighLights

  1. सप्लायर की गलती पर खरीददार का ITC स्वतः नहीं कटेगा।

  2. कोर्ट ने CGST एक्ट की धारा 16(2)(c) पर दिशानिर्देश दिए।

  3. हजारों व्यापारियों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सप्लायर द्वारा टैक्स जमा न करने या रजिस्ट्रेशन रद होने से खरीददार का ITC अपने-आप नहीं काटा जा सकता। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने 424 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला दिया।

क्या है पूरा मामला?

इन याचिकाओं में व्यापारियों ने शिकायत की थी कि उन्होंने सप्लायर को GST चुकाया था, लेकिन सप्लायर ने सरकार को टैक्स जमा नहीं किया, रिटर्न नहीं भरा, या उनका रजिस्ट्रेशन रद हो गया। इस वजह से विभाग ने खरीददार का ITC काट लिया या रिवर्स कर दिया।

कोर्ट ने सेक्शन 16(2)(c) को संवैधानिक ठहराया, लेकिन साफ निर्देश दिए कि इसे यंत्रवत (Mechanically) या बिना जांच के लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को लेन-देन की सच्चाई, माल या सेवा की वास्तविक प्राप्ति और खरीददार की भूमिका की जांच करनी होगी। सिर्फ सप्लायर का डिफॉल्ट होना व्यापारियों की ITC काटने का पर्याप्त आधार नहीं है।

कोर्ट ने GST विभाग को दिए निर्देश

कोर्ट ने GST विभाग को कई गाइडलाइन भी जारी कीं, जैसे नोटिस में पूरे सबूत होने चाहिए, खरीददार को सुनवाई का पूरा मौका मिलना चाहिए और फैसला तर्कसंगत होना चाहिए। अगर लेन-देन असली है तो ITC नहीं काटना चाहिए।

यह फैसला उन हजारों व्यापारियों के लिए राहत भरा है, जिनका ITC सप्लायर की गलती की वजह से फंस गया था। कोर्ट ने कहा कि सप्लायर की गलती जांच का आधार बन सकती है, लेकिन ITC अपने-आप नहीं काटा जा सकता।

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कोर्ट ने ये फैसला शौर्या अलॉयज प्राइवेट लिमिटेड बनाम पंजाब राज्य और अन्य जुड़े हुए मामलों में, सीडब्ल्यूपी-34296-2024, जो 01.10.2026 को सुनाया, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने CGST एक्ट के सेक्शन 16(2)(c) को लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण गाइडलाइन तय की है।