आयकर अधिनियम में कर छूट पाने की सामान्य रियायतों से अलग कुछ ऐसे प्रावधान भी हैं जिन पर

वेतनभोगी कर्मचारी दस्तावेज प्रस्तुत कर रियायतों का लाभ उठा सकते हैं। इसमें लीव ट्रैवल अलाउंस (एलटीए), आवास भत्ता (एचआरए) आदि आते हैं जिनका क्लेम आप आयकर विभाग से प्राप्त कर सकते हैं।

इस वर्ष यह लाभ प्राप्त करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने नए फॉर्म जारी किए हैं। लिहाजा यदि आप इस वर्ष इन मदों में कर रियायतों का लाभ लेना चाहते हैं तो आपको नए फॉर्म के जरिये ही इनका क्लेम करना होगा। नए नियम पहली जून 2016 से लागू हो जाएंगे।

क्यों है यह नियम?

यह नियम अथवा प्रावधान रखने की मूल वजह यह है ताकि लोग टैक्स कानून की खामियों का लाभ न उठा पाएं। इसलिए सरकार ने इन टैक्स रियायतों का लाभ लेने की प्रक्रिया को सख्त बनाया है। ऐसा करना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि अभी तक इसका कोई निश्चित फॉर्मेट या मानक ही नहीं था। वित्त विधेयक 2015 में सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 192 (2डी) के जरिये पहले ही नियोक्ताओं को इन रियायतों को देने से पूर्व सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करने का अधिकार दे दिया था। लेकिन अभी तक न तो इसके लिए नियम तय हुए थे और न ही फॉर्म को अंतिम रूप दिया जा सका था। अब सीबीडीटी ने इन सभी भ्रांतियों को दूर कर दिया है।

यदि आप एचआरए, एलटीए और होम लोन पर चुकाए गए ब्याज की छूट प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको फॉर्म 12बीबी भर कर देना होगा। ऐसा करने की एक वजह नियोक्ताओं को भी ज्यादा जवाबदेह बनाना है। अभी तक कर्मचारी एलटीए और एचआरए में टैक्स रियायत क्लेम करते थे तो उनके द्वारा दिए गए बिलों या दस्तावेजों के

कलेक्शन की वैधानिक जिम्मेदारी नियोक्ता की नहीं थी। इससे यह संशय बना रहता था कि कर्मचारी ने इस दावे के एवज में जो राशि प्राप्त की है वह उसी मद पर खर्च की है अथवा नहीं।

अब नियमों में हुए बदलाव के बाद नियोक्ताओं को कर्मचारियों को यह छूट देने से पहले सभी दस्तावेज एकत्र करने होंगे और एक निश्चित प्रारूप में सारी जानकारी प्राप्त करनी होगी। नए नियम के मुताबिक ये रियायतें प्राप्त करने के लिए जिन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी वे इस प्रकार हैं।

एचआरए अधिसूचना के मुताबिक एक लाख रुपये से अधिक के एचआरए पर कर छूट का दावा करने वाले व्यक्ति को मकान मालिक का नाम, पता और स्थायी खाता संख्या (पैन) किराये की रसीद के साथ देना अनिवार्य

होगा।

एलटीए, एलटीसी लीव ट्रैवल अलाउंस अथवा लीव ट्रैवल कंसेशन पर टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को अपने खर्चों का प्रमाण और टिकट अथवा बोर्डिंग पास नियोक्ता के पास जमा करने होंगे। हाउसिंग लोन

आवास कर्ज पर अदा किए जाने वाले ब्याज पर कर्ज देने वाली संस्था का नाम, पता और उसकी पैन संख्या देनी होगी।

Posted By: Babita Kashyap