आपने डिस्काउंट ब्रोकिंग का नया कांसेप्ट सफलतापूर्वक उतारा है। क्या है डिस्काउंट ब्रोकरेज का मॉडल?

-शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के लिए डिस्काउंट ब्रोकरेज एकदम नया, अनोखा और आर्थिक दृष्टि से बेहद लाभकारी मॉडल है। इसमें बाजार में ट्रेडिंग करने वालों को बेहद कम ब्रोकरेज पर कारोबार करने का मौका देते हैं। इसके लिए उनसे ब्रोकरेज के नाम पर प्रत्येक सौदे पर केवल 15 से 20 रुपये की राशि ली जाती है। डिस्काउंट ब्रोकर के साथ ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को इससे ब्रोकरेज राशि में 95 फीसद तक बचत हो सकती है। परंपरागत ब्रोकरों के जरिये कारोबार करने पर बहुत अधिक ब्रोकरेज देनी पड़ती है।

परंपरागत ब्रोकिंग से डिस्काउंट ब्रोकिंग किस तरह अलग है?

-देखिए, दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर तो ग्राहकों से वसूला जाने वाला कमीशन यानी ब्रोकरेज है। परंपरागत ब्रोकर ग्राहकों से सौदे के वॉल्यूम के प्रतिशत के आधार पर ब्रोकरेज वसूलते हैं। जबकि डिस्काउंट ब्रोकर किए गए सौदे पर पहले से तय ब्रोकरेज लेते हैं।

मसलन, अगर आप परंपरागत ब्रोकर के जरिये एक लाख रुपये की कीमत के शेयरों की खरीद करते हैं। वह आधा फीसद के हिसाब से ब्रोकरेज लेता है तो सौदे के अंत में आपको 500 रुपये की दलाली चुकानी होगी। लेकिन अगर यही एक लाख का सौदा हमारे जैसे डिस्काउंट ब्रोकर के जरिये करते हैं तो आपको ब्रोकरेज के रूप में मात्र 15 रुपये अदा करने होंगे। किसी भी निवेशक अथवा ट्रेडर के लिए यह बड़ी बचत है।

यह व्यवस्था नकद सौदों के लिए ही है या ऑप्शन, फ्यूचर और कमोडिटी सौदों पर भी लागू है?

-डिस्काउंट ब्रोकरेज में यही सबसे बड़ा लाभ है कि ब्रोकरेज की दर कारोबार के प्रत्येक सेगमेंट में समान रहती है। आप चाहे शेयर या कमोडिटी खरीदें, ऑप्शन में हाथ आजमाएं, या फ्यूचर ट्रेडिंग करें, सबमें आपको प्रत्येक

सौदे पर सिर्फ 15 रुपये का ही ब्रोकरेज देना होगा। दिलचस्प यह है कि फ्यूचर, ऑप्शन और कमोडिटी में इसकी वजह से निवेशक की बचत और अधिक हो जाती है। मान लीजिए आपने निफ्टी ऑप्शन के 20 लॉट खरीदे। ब्रोकर 50 रुपये प्रति लॉट के हिसाब से ब्रोकरेज लेता है, तो आपको कुल 1,000 रुपये उसे देने होंगे। अगर यही सौदा मनीपाम जैसे डिस्काउंट ब्रोकरेज के साथ करते हैं तो केवल 15 रुपये ब्रोकरेज के देने होंगे।

परंपरागत ब्रोकरेज तथा डिस्काउंट ब्रोकरेज में और क्या फर्क हैं?

-ब्रोकरेज की परंपरागत व्यवस्था में आमतौर पर ब्रोकर हर ग्राहक को एक रिलेशनशिप मैनेजर उपलब्ध कराता है। जबकि डिस्काउंट ब्रोकिंग में हम एक केंद्रीकृत ग्राहक सपोर्ट डेस्क के जरिये उनकी मदद करते हैं। उनके किसी भी सवाल का जवाब देने में ये डेस्ककर्मी सक्षम हैं। जरूरत पडऩे पर इस डेस्क के जरिये ग्राहकों को ट्रेडिंग में भी मदद उपलब्ध कराते हैं। दूसरी तरफ परंपरागत ब्रोकिंग में कई शाखाएं काम करती हैं। जबकि हम ऑनलाइन रहते हुए एक केंद्रीकृत शाखा से हर जगह के ग्राहकों को सेवा देते हैं।

परंपरागत ब्रोकर कभी-कभी ट्रेडिंग टिप्स भी देते हैं। लेकिन हम डिस्काउंट ब्रोकिंग में टिप्स नहीं देते, बल्कि ग्राहकों को जागरूक करने और उनके ज्ञानवर्धन के लिए तरह-तरह का मैटीरियल उपलब्ध कराते हैं। इससे वे स्वयं अपने निवेश संबंधी फैसले लेने में सक्षम हो सकते हैं। यह मैटीरियल वेबसाइट पर, न्यूजलेटर और सोशल वेबसाइट के जरिये उपलब्ध कराते हैं।

मतलब डिस्काउंट ब्रोकिंग में ऑनलाइन ट्रेडिंग ही करनी होगी? ग्राहक ब्रोकर के पास आकर अथवा फोन पर ट्रेडिंग नहीं कर सकता?

-ऐसा बिल्कुल नहीं है। ग्राहक डिस्काउंट ब्रोकर के पास आकर अथवा फोन पर भी कारोबार संबंधी ऑर्डर दे सकते हैं। वैसे डिस्काउंट ब्रोकर आफिस आकर कारोबार करने की सुविधा मुहैया नहीं कराते। लेकिन मनीपाम में ग्राहकों का आफिस में स्वागत है। हम मोबाइल एप के जरिये और टेबलेट पर भी कारोबार करने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। हमारा मानना है कि निवेशक को खुद कारोबार करने और फैसले लेने में सक्षम होना चाहिए, ताकि वह निवेश संबंधी निर्णयों के लिए ब्रोकरों पर निर्भर न रहे।

परंपरागत के मुकाबले डिस्काउंट ब्रोकर होने के नाते आप कैसे इतनी प्रतिस्पर्धी दरों में ब्रोकरेज सेवाएं दे पाते हैं?

-परंपरागत ब्रोकिंग में कई ऑफिस खोलने होते हैं। सैकड़ों कर्मचारी रखने पड़ते हैं। इस पर लागत आती है। जबकि डिस्काउंट ब्रोकर नवीनतम तकनीकी का इस्तेमाल कर इस बड़ी लागत को बचाते हैं। यही बचत हम

ग्राहक के साथ बांटते हैं। यहां मैं स्पष्ट कर दूं कि डिस्काउंट ब्रोकरेज के तहत ब्रोकर अलग-अलग दरों पर ब्रोकरेज तय करते हैं। कोई 15 रुपये लेता है तो कोई 20 रुपये। मनीपाम में हम ग्राहकों से हर सौदे पर 15 रुपये ब्रोकरेज लेते हैं।

निर्दोष कुमार गौड़

एमडी व सीईओ

मनीपाम इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस

Posted By: Babita Kashyap