यहां यह समझना जरूरी है कि यूलिप लंबी अवधि के जीवन बीमा उत्पाद हैं। जबकि इन्हें अल्पकालिक निवेश के साधन के तौर पर बेचने का चलन बढ़ गया है। बाजार तेजी में हों तो ये प्रोडक्ट हाथों-हाथ बिकते हैं।

भारतीय शेयर बाजारों में बीते कुछ समय से म जबूती का रुख बना है। अंतरराष्ट्रीय संकेतों के चलते भले ही अब बाजार में गिरावट आई है।

लेकिन बाजार की तेजी के बाद जीवन बीमा कंपनियों के यूलिप आधारित पॉलिसी प्रोडक्ट्स पर जोर देना शुरू किया है। आंकड़े भी बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में अधिकांश निजी बीमा कंपनियों के प्रीमियम का बड़ा हिस्सा यूलिप (यूनिट लिंक्ड पॉलिसी) के जरिये आया है। वित्त वर्ष 2014 में नए व्यवसाय प्रीमियम में 30 फीसद से कम हिस्सेदारी वाले यूलिप का आज निजी बीमा कंपनियों के नए व्यवसाय प्रीमियम में 60 फीसद से अधिक की योगदान है। कुछ मामलों में तो यह 70-80 फीसद है।

यूलिप अपने पारदर्शी ढांचे और लचीलेपन की वजह से ग्राहकों के लिए शानदार प्रोडक्ट है। हालांकि यूलिप पर शेयर बाजार की उठापठक का खतरा रहता है। इस कमजोरी ने नियामकों को विवश कर दिया है कि वे निवेशकों को ऐसे प्रोडक्ट से जुड़े जोखिमों और सुनहरे अवसरों के प्रति जागरूक करें।

यहां यह समझना जरूरी है कि यूलिप लंबी अवधि के जीवन बीमा उत्पाद हैं। जबकि इन्हें अल्पकालिक निवेश के साधन के तौर पर बेचने का चलन बढ़ गया है। बाजार तेजी में हों तो ये प्रोडक्ट हाथों-हाथ बिकते हैं। यूलिप की इतनी बिक्री के पीछे 2008 से पहले की अवधि में भी मोटे तौर पर यही धारणा काम करती रही है, जिसमें अल्पकालिक लाभ को लंबी अवधि के लाभ पर हावी दिखाया गया। लेकिन निवेशकों के लिए बेहतर होगा कि निवेश लंबी अवधि का हो तो यूलिप लेने का विचार करें।

एक प्रोडक्ट सबके लिए नहीं

यह जरूरी नहीं है कि एक प्रोडक्ट सब के लिए सही हो। इसलिए यह सलाह दी जाती है

कि आप यूलिप खरीदने से पहले कंपनी प्रतिनिधि से ये कुछ सवाल अवश्य करें।

क्या पॉलिसी में निवेश की समय सीमा 10 साल से अधिक है?

यूलिप के लिए बने नए नियमों में लॉकइन-पीरियड को बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है। लेकिन यूलिप का पूरा लाभ लेने के लिए इसे कम से कम 12-15 साल रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त ध्यान रखना चाहिए कि म्यूचुअल फंड की तरह यूलिप का भी बाजारों में निवेश होता है। इसलिए आपको बाजार जोखिमों के लिए तैयार रहना चाहिए। यह जोखिम इक्विटी फंड में ही नहीं, बल्कि डेट फंड में भी होता है।

क्या आपके पास पर्याप्त कवर है

आमतौर पर लोग सालाना आय का 5-6 गुना का बीमा कवर लेते हैं। लेकिन मुमकिन है कि बीमा की पूरी जरूरत यूलिप से पूरी नहीं हो। इसलिए यूलिप लेने से पहले टर्म इंश्योरेंस भी लें। यदि जीवन बीमा सालाना प्रीमियम का 10 गुना नहीं हो तो आपको कर संबंधी छूट नहीं मिलेगी और मेच्योरिटी पर मिलने वाली राशि पर भी

टैक्स लगेगा। इतना ही नहीं, धारा 80 सी के तहत कटौती की अधिकतम सीमा सिर्फ 1.50 लाख

रुपये ही है।

क्या पूरी अवधि तक अपने बीमा प्रीमियम का भुगतान कर सकते हैं?

यूलिप के लिए जरूरी है कि आप प्लान की पूरी अवधि तक निवेश जारी रखें। इसलिए ऐसी पॉलिसी लें जिसका पूरी अवधि तक भुगतान कर सकें और इससे आपके अन्य आर्थिक लक्ष्य प्रभावित नहीं हों। यह भी जरूरी है कि आप यूलिप से जुड़े प्लान और प्योर टर्म प्लान के बीच मृत्यु संबंधी शुल्कों (मोर्टलिटी चार्जेस) की विस्तृत तुलना कर लें। यूलिप खरीदने के बाद यह उचित होगा कि आप प्रीमियम का नियमित भुगतान

अवश्य करें। इसके प्रदर्शन पर नजर बनाए रखें। यूलिप ग्राहकों को लचीलापन देता है,

जिसका फायदा आप उठा सकते हैं। यूलिप प्लान में आप असेट आवंटन में आसानी से

बदलाव कर सकते हैं। इसलिए फंड स्विच करने और प्रीमियम री-डायरेक्शन की सुविधा मिलती है। यह सब बीमा कंपनी की वेबसाइट पर बड़ी आसानी से एक क्लिक के जरिये किया जा सकता है।

गलत प्रोडक्ट बेचने का मामला

बीमा जागरूकता कम होने से अक्सर लोग दबाव में आकर पॉलिसी लेते हैं। हालांकि, नियामक अब काफी सतर्क है और लगातार कंपनियों पर साफ सुथरी प्रक्रिया अपनाने का दबाव बनाए हुए है। इसके बावजूद ग्राहकों को बीमा खरीदते वक्त उसकी पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए ताकि कोई एजेंट या कंपनी आपकी जरूरत के विपरीत कोई गलत प्रोडक्ट आपको न बेच पाए।

बीमा कंपनी और ग्राहक दोनों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। शेयर बाजार की उछाल में हवाई किला बनाने की जरूरत नहीं है। बीमा कंपनियों के लिए मुख्यत: यूलिप के दम पर विकास एक चिंता की बात

है। आर्थिक चक्र घूमने से यदि मंदी आई तो फिर ग्राहकों का विश्वास ऐसे उत्पादों से टूट जाएगा। अंतिम बात, बीमा का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा है। इसलिए भले ही आप यूलिप आधारित पॉलिसी खरीदें। लेकिन उसे लेने से पहले उसके सुरक्षा पक्ष पर पूरा ध्यान दें, क्योंकि यह आपके और आपके परिजनों के भविष्य के लिए है। निवेश के लिए तो कई और विकल्प आपके पास उपलब्ध होंगे।

मनोरंजन साहू

मुख्य एजेंसी अधिकारी

रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस

Posted By: Babita Kashyap

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