जीवन बीमा में मिलते हैं ये 5 तरह के बोनस, किन पॉलिसी में मिलता है और कैसे होती है काउंटिंग? पूरी डिटेल
Insurance Policy Benefits: जीवन बीमा में बोनस एक अतिरिक्त राशि है जो बीमा कंपनियां पॉलिसीधारकों को उनके निवेश से प्राप्त ...और पढ़ें
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जीवन बीमा बोनस: जानें इसके प्रकार, गणना और किन पॉलिसियों पर मिलता है लाभ
HighLights
जीवन बीमा बोनस कंपनी के निवेश अधिशेष से मिलता है।
यह केवल पार्टिसिपेटिंग पॉलिसियों पर ही लागू होता है।
बोनस के पांच मुख्य प्रकार होते हैं, जैसे साधारण, चक्रवृद्धि।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| बोनस... यह एक ऐसा पैसा होता है, जिसका प्रत्येक नौकरीपेशा हर वर्ष इंतजार करता है। लेकिन यह सिर्फ नौकरियों तक ही सीमित नहीं है। जीवन बीमा में भी बोनस का प्रविधान है, जिसको जीवन बीमा बोनस कहा जाता है। यह वह अतिरिक्त रकम होती है, जिसके कंपनी बीमाधारक को उसके बेसिक सम एश्योर्ड से अतिरिक्त देती है। आइए जानते हैं इसके बारे में वो सबकुछ, जो आपके लिए जरूरी साबित हो सकता है।
कहां से बोनस देती हैं बीमा कंपनियां
जब पॉलिसीधारक प्रीमियम जमा करता है तो वह रकम बीमा कंपनी की कुल संपत्ति का हिस्सा बन जाती है। कंपनी इस राशि का कुछ हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों या बॉन्ड में और कुछ हिस्सा इक्विटी यानी शेयरों में निवेश करती है।
इस निवेश से बीमा कंपनी (Insurance Company) को एक रकम मिलती है, जो उसके पास एक सरप्लस बनाती है। बीमा कंपनी इसी सरप्लस या अतिरिक्त राशि को अपने पालिसीधारकों को बोनस के तौर पर बांटती है।
कौन सी पॉलिसी पर मिलता है बोनस
सभी प्रकार की बीमा पालिसी पर बोनस का प्रविधान नहीं है। केवल पार्टिसिपेटिंग (लाभ के साथ) बीमा पालिसी में ही बोनस की सुविधा होती है। इन पालिसी में कंपनी के लाभ का एक हिस्सा बोनस के तौर पर पालिसीधारक को मिलता है। टर्म प्लान और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) में बोनस नहीं मिलता। इसका कारण यह है कि इन प्राफिट शेयरिंग (लाभ साझेदारी) का विकल्प नहीं होता है।
बोनस के प्रकार और गणना
सिंपल रीवर्शनरी बोनस: यह पालिसी की सम एश्योर्ड राशि पर हर साल तय प्रतिशत के हिसाब से जुड़ता रहता है। भुगतान केवल परिपक्वता या डेथ क्लेम पर होता है। मान लीजिए, आपका सम एश्योर्ड पांच लाख रुपये है और बोनस रेट दो प्रतिशत है। ऐसे में साल का बोनस ₹10 हजार रुपये होगा।
कंपाउंड रीवर्शनरी बोनस: इसमें हर साल के बोनस की गणना पिछले बोनस को जोड़कर कुल राशि पर की जाती है। यानी यह कंपाउंड ब्याज की तरह बढ़ता है। मान लीजिए, पांच लाख रुपये के सम एश्योर्ड पर दो प्रतिशत की दर से पहले साल 10 हजार रुपये का बोनस मिला है। अगले साल कुल राशि पांच लाख दस हजार रुपये पर दो प्रतिशत की दर से 10,200 रुपये का बोनस मिलेगा।
अंतरिम बोनस: अगर पॉलिसी मैच्योर हो जाए या पालिसीधारक की मृत्यु बोनस घोषणा से पहले हो जाए, तो कंपनी बीच का बोनस अंतरिम बोनस के रूप में देती है। इसकी गणना घोषित बोनस से लेकर पालिसी मैच्योर होने या क्लेम होने के दिन तक के आधार पर की जाती है।
नकद बोनस: यह साल के अंत में नकद के रूप में मिलता है। इसे लेने के लिए पालिसी के मेच्योर होने का इंतजार नहीं करना पड़ता। मान लीजिए- आप सालाना 20 हजार रुपये का प्रीमियम दे रहे हैं और बोनस रेट दो प्रतिशत है तो आपको हर वर्ष के अंत में 400 रुपये का नकद बोनस मिलेगा।
टर्मिनल बोनस: यह एक बार मिलने वाला बोनस है, जो सिर्फ पालिसी को लंबे समय तक जारी रखने पर मिलता है। यह केवल मेच्योरिटी या मृत्यु पर दिया जाता है। सरेंडर या पेड-अप पालिसियों पर यह लागू नहीं होता।
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