नई दिल्ली, सुमित राय। भारत में लाइफ इंश्योरेंस से जुड़ा बिजनेस बेहद अहम मोड़ पर है। आने वाले समय के जोखिम को ध्यान में रखते हुए एवं फाइनेंशियल प्रोटेक्शन की जरूरत को महसूस करते हुए लोग महामारी के इस वक्त में जीवन बीमा के महत्व को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं। विभिन्न चुनौतियों के बावजूद इंडस्ट्री ने बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए बेहद कम समय में अपने आप में बहुत बदलाव किए हैं। भारत के लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर ने इस मुश्किल वक्त में ग्राहकों की सेवा करने के लिए अपने वितरण से जुड़ी ताकत का डिजिटलीकरण किया है। इतना ही नहीं अपने जोखिम प्रबंधन से जुड़े मॉडल को भी और मजबूत बनाया है।

पिछला एक साल रहा है काफी अहम

पिछला एक वर्ष इंडस्ट्री के लिए एडजस्टमेंट वाला दौर रहा है। आमने-सामने बैठकर बातचीत किसी भी बिजनेस का सबसे बुनियादी तत्व होता है। कोरोना महामारी ने इस चीज को बिल्कुल अव्यवहारिक बना दिया है। हाल के वर्षों में इस सेक्टर में भी डिजिटल और ई-कॉमर्स मॉडल काफी फले-फूले हैं। हालांकि, अब भी भारतीय लाइफ इंश्योरेंस के लिए विश्वसनीय परामर्शदाता की सलाह लेते हैं, जो उनके जीवन के अलग-अलग चरण में उनकी मदद करते हैं।

हालांकि, 2020 में इस बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला। देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से आमने-सामने की बातचीत पर बिल्कुल विराम लग गया। ऐसी परिस्थितियों में हर सेक्टर में ग्राहकों ने वर्चुअल माध्यमों का सहारा लिया। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनियों के लिए भी डिजिटल माध्यमों को अपनाना अपरिहार्य हो गया। नतीजन, पिछले एक साल में इंडस्ट्री ने तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए काफी अधिक निवेश किया है। इससे इंश्योरेंस सेक्टर की कंपनियों को देश के विभिन्न राज्यों के अलग-अलग शहरों में काम कर रहे वर्कफोर्स को नए सिरे से प्रशिक्षित करने, ग्राहकों को परामर्श देने और इंश्योरेंस प्रोडक्ट खरीदने में उनकी मदद जैसे बहुत से कार्यों में मदद मिलती है।

वित्त वर्ष 2020-21 के शुरुआती महीनों में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की नई पॉलिसी से होने वाली आमदनी में काफी अधिक गिरावट देखने को मिली। इसकी वजह ये है कि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां और वितरक इन सभी चीजों से निपटने में लगे हुए थे। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों को ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने थे, जो उनके वितरकों के लिए भी डिजिटल बदलाव में कारगर सिद्ध होते। ग्राहकों से संवाद करने के नए तरीके सीखने के साथ-साथ उनसे सार्थक बातचीत के लिए डेटा एनालिटिक्स के इस्तेमाल से लेकर इंश्योरेंस और डिस्ट्रिब्यूटर ने इन चुनौतियों को पार पाने के लिए एकसाथ मिलकर काम किया।

ये चुनौतियां भी आईं सामने

डिजिटल तरीकों को अपनाना तो एक तरह से अपरिहार्य हो गया था लेकिन इसे अमल में लाने के बाद धोखाधड़ी की अधिक घटनाओं का जोखिम काफी बढ़ गया है। पेमेंट नेटवर्क के दुरुपयोग और डेटा चोरी जैसी चीजें पहले से हो रही थीं लेकिन इंडस्ट्री के समक्ष एक नई चुनौती पैदा हो गई है। यह चुनौती है एक वास्तविक ग्राहक और एक संदिग्ध ग्राहक को पहचाने में पेश आनी वाली दिक्कत। व्यक्तिगत तौर पर बातचीत नहीं हो पाने से एक ग्राहक के रिस्क प्रोफाइल का पूरी तरह से आकलन इंडस्ट्री के लिए कठिन कार्य बन गया है।

किसी भी तरह की धोखाधड़ी की घटना को रोकने के लिए एक ठोस रिस्क इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की जिम्मेदारी इंडस्ट्री की है। इससे वास्तविक ग्राहकों को प्रभावी तरीके से सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए डेटा एनालिटिक्स से पूर्वानुमान वाले मॉडल तैयार करने में काफी मदद मिली है। ऐसे मॉडल से धोखाधड़ी वाले रिक्वेस्ट को क्लेम की बजाय पॉलिसी खरीदने के समय ही चिह्नित करने में मदद मिलती है।

हालांकि, इस आवश्यक सर्विस सेक्टर में बाजार से जुड़ी वास्तविकताएं काफी तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में महामारी के इस काल में भारत को इंश्योरेंस की सर्विस देना काफी मुश्किल काम बन गया है। महामारी की दूसरी लहर के असर ने इस स्वास्थ्य संकट की समाप्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। विश्वसनीय जानकारी और डेटा के अभाव में इंश्योरेंस इंडस्ट्री अजीबो-गरीब स्थिति में है। भविष्य की अपेक्षाओं को फिर से परखना अब अगली चुनौती बन गई है। देश में जैसे-जैसे अधिक लोगों को टीका लगाया जाएगा, इंडस्ट्री में भारत के स्वास्थ्य से जुड़े भविष्य को लेकर समझ बेहतर होगी।

आने वाले समय में बढ़ेगी इंश्योरेंस सेक्टर की हिस्सेदारी

भारत इंश्योरेंस के सबसे कम प्रसार वाले देशों में शामिल है। देश में इंश्योरेंस का प्रसार जीडीपी के 3.76 फीसद पर है। यह इस मार्केट की संभावनाओं को दिखाता है। इसकी वजह यह है कि देश की बड़ी आबादी या तो इंश्योरेंस कवर से बाहर है या कम इंश्योरेंस कवर में है। भारत जैसे देश में हेल्थकेयर से जुड़े अधिकतर खर्चे लेग अपनी जेब से देते हैं, कोविड-19 महामारी इस परिप्रेक्ष्य में लोगों को जागृत करने वाली साबित हो सकती है। इससे आने वाले समय में भारत में इंश्योरेंस सेक्टर की हिस्सेदारी और अधिक बढ़ सकती है क्योंकि यह सेक्टर अभी केंद्र में है।

(लेखक Edelweiss Tokio Life Insurance के एमडी और सीईओ हैं। प्रकाशित विचार लेखक के निजी हैं।)

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