जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। 22 वर्ष पहले निजी क्षेत्र के लिए बीमा क्षेत्र को खोलने के बाद शुक्रवार (25 नवंबर, 2022) को नियामक एजेंसी इरडा ने इस सेक्टर में अभी तक के सबसे बड़े सुधारों की घोषणा की है। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) की हैदराबाद में हुई बैठक में वर्ष 2047 में देश के हर नागरिक को जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति का बीमा कवरेज देने के उद्देश्य से इन सुधारों को लागू किया है।

पंजीयन के साथ कई अन्य नियमों को बनाया गया है आसान

इसके तहत देश में बीमा कंपनियों के पंजीयन को आसान बनाया गया है, निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देने के लिए नियमों को और आसान बनाया गया है, बीमा उत्पाद बेचने वाले कारपोरेट एजेंट्स और बीमा मार्केटिंग एजेंट्स को ज्यादा आजादी से काम करने की छूट दी गई है, बीमा कंपनियां आसानी से पूंजी बाजार से पैसा जुटाएं- इसका भी इंतजाम किया गया है और सॉल्वेंसी मार्जिन के मद में रकम रखने संबंधी नियमों को भी उदार बनाया गया है ताकि बीमा कंपनियों को अतिरिक्त राशि की जरूरत कम पड़े।

साधारण बीमा क्षेत्र कंपनियां जल्द शुरु करेगी अपनी सेवाएं

इरडा बोर्ड की बैठक में एक अहम फैसला यह हुआ है कि गो-डिजिट जेनरल इंश्योरेंस कंपनी को शेयर बाजार से पूंजी जुटाने की इजाजत दे गई है। इसके अलावा एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में एक्साइड लाइफ इंश्योरेंस के विलय के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। क्षमा जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पंजीयन की भी इजाजत दी गई है। साधारण बीमा क्षेत्र में यह कंपनी अब जल्द ही अपनी सेवाएं देनी शुरु कर देगी।

19 प्रस्ताव हैं लंबित

इरडा की तरफ से प्राप्त जानकारी के मुताबिक उसके पास बीमा कारोबार शुरु करने से संबंधित 19 प्रस्ताव अभी लंबित हैं। बोर्ड की आगामी बैठक में इन पर फैसला होने की संभावना है। इरडा ने इस बैठक में एक अहम फैसला यह किया है कि बीमा कंपनियों में प्राइवेट इक्विटी फंड्स के सीधे निवेश को मंजूरी दे दी गई है। अभी तक प्राइवेट इक्विटी फंड्स को बीमा क्षेत्र में निवेश के लिए अलग से एक कंपनी (एसपीवी) का गठन करना पड़ता है। अब इसकी अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

नए नियम से मिलेगी राहत

मालूम हो कि अभी कई बीमा कंपनियां विस्तार के लिए अतिरिक्त निवेश की तलाश हैं, उन्हें इस नये नियम से काफी राहत मिलेगी। एक अन्य छूट यह दी गई है कि मुख्य प्रवर्तक कंपनी को ही बीमा सेक्टर में उतरने संबंधी बाध्यता खत्म कर दी गई है। यानी किसी कारपोरेट घराने की सब्सिडियरियां भी अपने बूते ही बीमा कारोबारे में उतर सकती हैं। इरडा ने एकल निवेशकों के दायरे को भी बढ़ा दिया है। बीमा कंपनी की कुल पेड-अप कैप्टिल का 25 फीसद तक हिस्सेदारी एकल निवेशक के पास रहने की इजाजत दे दी है, अभी यह सीमा 10 फीसद थी। 25 फीसद से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वालों को प्रवर्तक माना जाएगा। अभी 10 फीसद से ज्यादा इक्विटी रखने वालों को ही प्रवर्तक माना जाता था।

बीमा सेक्टर की कई समस्याओं का हुआ समाधान

इन फैसलों पर आइसीआइसीआइ के एमडी भार्गव दासगुप्ता ने कहा है कि नियामक एजेंसी ने एक साथ बीमा सेक्टर की कई समस्याओं का समाधान कर दिया है। भारत का बीमा सेक्टर पहले से भी ज्यादा आकर्षक बन गया है। कारोबार करना और आसान हो गया है और वितरण मॉडल ज्यादा बेहतर तरीके से काम करेंगे। बीमा कंपनियों को एक बड़ी छूट यह दी गई है कि अब उन्हें अतिरिक्त पूंजी जुटाने के लिए हर बार इरडा के पास जाने की जरूरत नहीं है। अब उन्हें पेड-अप कैप्टिल का 50 फीसद तक बगैर इरडा को सूचना दिए ही बाजार से जुटाने की छूट दे दी गई है अभी तक यह सीमा 25 फीसद की थी। इसका फायदा यह होगा कि कंपनियां जरुरत के हिसाब से कम समय में अतिरिक्त पैसे का इंतजाम कर सकेंगी।

मार्केटिंग करने की होगी छूट

बीमा कंपनियों के उत्पादों को आम जनता तक पहुंचाने के काम में जुटे इंटरमीडियरीज यानी कारपोरेट एजेंट्स, इंश्योरेंस मार्केटिंग एजेंट्स को अब ज्यादा कंपनियों के साथ साझेदारी कर सकती हैं। कारपोरेट एजेंस्ट अभी तक इन्हें तीन बीमा कंपनियों की पालिसियों को बेचने का अधिकार मिला था लेकिन शुक्रवार के फैसले के बाद ये नौ कंपनियों के उत्पादों की मार्केटिंग कर सकती हैं। दूसरी तरफ मार्केटिंग एजेंट्स को दो की जगह छह बीमा कंपंनियों के उत्पाद बेचने की छूट मिल गई है। अब मार्केटिंग एजेंट्स को पूरे राज्य में मार्केटिंग करने की छूट होगी।

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Edited By: Sonu Gupta

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