नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। मौजूदा वक्त में कई सारे लोग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले कर रखते हैं। पर कई बार ऐसा होता है कि, लोग पुराने हेल्‍थ इंश्‍योरेंस को बदल कर दूसरे प्लान को अपनाने के बारे में सोचते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, अपने पुराने हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्लान से, नए हेल्‍थ इंश्‍योरेंस प्लान में स्विच करते वक्त, कुछ बेसिक बातों का ध्यान रखना बेहद ही जरूरी है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

ए एंड एम इंश्योरेंस ब्रोकर प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर सुमित वाधवा के अनुसार, हेल्थ पॉलिसी को पोर्ट करते वक्त हमें यह देखने की जरूरत है कि, नई हेल्थ पॉलिसी के तहत, हमारा हॉस्पिटलाइजेशन पीरियड कितने दिनों का है। हेल्थ इंश्योरेंस देने वाली कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जो लगभग 180 दिनों तक का हॉस्पिटलाइजेशन कवर देती हैं। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को स्विच करते वक्त, इस बात पर ध्यान देना भी काफी जरूरी हो जाता है कि, उसमें डॉक्टर की फीस और दवाइयों का खर्च कवर होता है या नहीं। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को स्विच करने से पहले, हमें नई पॉलिसी के सभी नियम और शर्तों को बेहतर तरीके से जान लेना भी जरूरी है। हमें यह भी देख लेना चाहिए कि, हमारी बीमा पॉलिसी में किन बीमारियों का कवर शामिल है।

इन बातों पर ध्यान देना भी है जरूरी

ऑप्टिमा मनी मैनेजर के फाउंडर पंकज मठपाल के अनुसार, बीमा पॉलिसी देने वाली कंपनियों का जिन हॉस्पिटल के साथ समझौता होता है, वे उसी में भर्ती होने पर इंश्योरेंस का कवर देती हैं। ऐसे में हमें यह देख लेना चाहिए कि, हमारे आस पास कौन-कौन से हॉस्पिटल मौजूद हैं। और हमारी पॉलिसी में उनका नाम शामिल है या नहीं। इसके अलावा अपनी बीमा पॉलिसी को स्विच करने से पहले रूम रेंट का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। रूम रेंट का मतलब यह है कि, जब आप अस्पताल में भर्ती होते हैं, तो वहां के कमरे के लिए आपको कितना किराया देना पड़ेगा।

पंकज मठपाल यह भी कहते हैं कि, हर बार हमें पुरानी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को छोड़कर नई में स्विच करने की जरूरत नहीं होती है। हमारी पुरानी कंपनियां ही, हमारी जरूरतों के हिसाब से हमें प्लान ऑफर करती हैं।

Edited By: Abhishek Poddar