नई दिल्‍ली, मनीश कुमार मिश्र। कोविड- 19 महामारी के बाद की दुनिया ने लोगों के सोचने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। लोगों के स्वास्थ्य से लेकर उनके फाइनेंस, उनके काम करने के तरीके से लेकर हर क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं। यहां तक की बीमा क्षेत्र में भी काफी बदलाव आया है। कोरोना महामारी ने लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को लेकर लोगों को बहुत अधिक जागरूक किया है। वहीं, पॉलिसी की संरचना जो उपभोक्ता अभी चाहता है, वह काफी विकसित है।

इंडस्ट्री के आंकडों के अनुसार उपभोक्ता अब वह रन ऑफ मिल पॉलिसी नहीं चाहता है, जो सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने के खर्च को कवर करें। COVID-19 के बाद, वे एक समग्र योजना खरीदने की ओर ज्यादा इच्छुक हैं जो ओपीडी के खर्चों को भी कवर करती हो। ओपीडी के अंदर मेडिकल विशेषज्ञ की सलाह पर निदान या उपचार के लिए किसी क्लिनिक, अस्पताल या संबंधित सुविधा से जुड़े खर्चें शामिल होते हैं। इसके लिए व्यक्ति को एक मरीज के रूप में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती है।

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम में हेड-हेल्थ इंश्योरेंस, अमित छाबड़ा कहते हैं, 'एक ओपीडी कवर अधिक लाभ के साथ आता है और आपको व्यापक कवर उपलब्‍ध कराता है - बुखार जैसी साधारण चीज से लेकर जटिल डे-केयर प्रक्रियाओं तक। इसके अलावा, यह आपको उन भारी फार्मेसी बिलों और डायग्नोस्टिक टेस्ट का भी क्षतिपूर्ति करता है। कुल मिलाकर, ये चिकित्सा खर्च लंबी अवधि में बहुत ज्यादा बढ़ सकता हैं और ओपीडी कवर न होने पर आपको फाइनेंशियल झटका लग सकता हैं। इसलिए आज के समय में, यह एक अनिवार्य ऐड-ऑन है, जिसे बहुत से उपभोक्ताओं ने पहले ही महसूस कर लिया है।'

OPD Coverage की बढ़ी मांग

पॉलिसीबाजार के आंकड़ों के अनुसार, ओपीडी कवरेज की मांग तेजी से बढ़ रही है। लगभग 15 प्रतिशत ग्राहक अब हेल्थ इंश्योरेंस के साथ-साथ ओपीडी कवर भी ले रहे हैं, यह संख्या पहले शून्य हुआ करती थी। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अस्पताल में भर्ती होने के मामले में चिकित्सा देखभाल के खर्च को कवर करती है, लेकिन जब चिकित्सा देखभाल से संबंधित खर्चों की बात आती है, जिसमें रोगी का अस्पताल में भर्ती होना शामिल नहीं होता है, तो वे आमतौर पर कवर नहीं होते हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों से पता चलता है कि ओपीडी में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 70% से ज्यादा खर्च शामिल है। और यह खर्च आमतौर पर ज्यादातर लोगों द्वारा अपनी जेब से खर्च किया जाता है। इसके अलावा, ओपीडी खर्च पहले हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों द्वारा कवर नहीं किया जाता था। इसका मतलब यह था कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद, किसी को भी डॉक्टर से परामर्श, दवाएं, परीक्षण और चेक-अप जैसे खर्चों का भुगतान अपनी जेब से करना पड़ता था।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, COVID-19 उपचार पर खर्च की गई कुल राशि का 30-50 प्रतिशत COVID उपचार के मामले में जेब से खर्च होता है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि उपभोक्ता इन खर्चों के बारे में ज्यादा जागरूक हो गया है। और वह ऐसी स्वास्थ्य कवरेज चाहता है जो इस खर्च को भी कवर करे।

आंकड़ों की मानें तो उपभोक्ताओं के बीच सबसे आम ओपीडी कवर की खासियत यह है कि आप डॉक्‍टर से पर्सनली जाकर मिल सकते हैं। ग्राहकों का मानना है कि यह "डिजिटल ओपीडी" से बेहतर विकल्प है, क्योंकि डिजिटल ओपीडी में केवल ऑनलाइन किए गए डॉक्टर परामर्श शामिल हैं, लेकिन चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श को शामिल नहीं किया जाता है।

हालांकि अभी टियर-1 और टियर-2 शहरों में ओपीडी कवर लेने का चलन अधिक हुआ है, लेकिन टियर-3 शहरों और उसके बाहर भी धीरे-धीरे इसका रुझान देखने को मिल रहा है।

इसके अलावा, ज्यादातर पॉलिसीधारक भुगतान के कैशलेस मोड को पसंद करते हैं जहां उन्हें कुछ भी अग्रिम भुगतान नहीं करना पड़ता है और क्लेम की प्रतिपूर्ति की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इसके बजाय, वे केवल कैशलेस मार्ग अपना सकते हैं जो कि आसान है।

महिला ग्राहकों की तुलना में लगभग 80 प्रतिशत पुरूष ओपीडी कवरेज का चयन कर रहे हैं। ओपीडी कवर का चयन करने के लिए वरीयता उन पॉलिसीधारकों में भी ज्यादा है जो अधिक बीमित राशि का कवर चुनते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, आम तौर पर सभी बीमा उपभोक्ताओं में से 30 प्रतिशत 1 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य बीमा कवर का चयन करते हैं।

इन उपभोक्ताओं में से 30 प्रतिशत ग्राहक किसी न किसी प्रकार के ओपीडी कवर का विकल्प चुनते हैं। ओपीडी एड-ऑन कवर का विकल्प चुनने वाले ज्यादातर ग्राहक बीमा राशि का उपयोग डॉक्टर परामर्श, निदान और फार्मेसी लागत से संबंधित खर्चों के लिए करते हैं।

ओपीडी हेल्थ कवर के अंतर्गत आने वाले सामान्य खर्च

डॉक्टर से कंसल्‍टेशन: एक रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में डॉक्टर के परामर्श शुल्क को कवर नहीं किया जाता है। ओपीडी ऐड-ऑन का विकल्प चुनकर, आप यह सुनिश्चित करते हैं कि यह खर्च भी आपकी पॉलिसी द्वारा कवर किया गया है। यह ऐड-ऑन परिवार योजनाओं में विशेष रूप से उपयोगी है, जिसमें बच्चों के लिए कवरेज भी शामिल है, क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर चिकित्सीय सलाह लेने की संभावना होती है।

डायग्नोस्टिक टेस्ट: एक ओपीडी ऐड-ऑन डायग्नोस्टिक टेस्ट के खर्च को भी कवर करता है, भले ही आप किसी बीमारी से पीड़ित हों या नहीं। यह तब तक लागू होता है जब तक टेस्ट आपके डॉक्टर द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।

फार्मेसी खर्च: निर्धारित दवाओं पर होने वाला खर्च बहुत ज्यादा है, लेकिन रेगुलर हेल्थ इंश्योरेंस प्लान के तहत कवर नहीं होते हैं। ओपीडी कवर के साथ, ये खर्चे भी आपकी पॉलिसी द्वारा कवर किए जाते हैं।

डेन्टल चिकित्सा प्रक्रियाएं और अन्य सहायता: डेन्टल चिकित्सा प्रक्रियाएं - जैसे रूट कैनाल उपचार, फिलिंग और दांत निकालना, रेगुलर हेल्थ पॉलिसी द्वारा कवर नहीं की जाती हैं। दूसरी ओर, अगर आपने ओपीडी ऐड-ऑन कवर का विकल्प चुना है, तो न केवल आपको ऐसी प्रक्रियाओं के लिए किए गए खर्चों से सुरक्षा मिलती है, बल्कि डेन्चर की लागत भी एक निर्दिष्ट सीमा तक कवर की जाती है। वास्तव में, हियरिंग-एड्स और आईवियर- जैसे कॉन्टैक्ट लेंस और चश्मे की लागत भी एक निर्दिष्ट सीमा तक कवर की जाती है।

Edited By: Manish Mishra

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