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Health Insurance Claim: प्राइवेट कंपनियां डॉक्टर के नाम पर कर रहीं मनमानी? हेल्थ क्लेम रिजेक्शन पर सरकार का बड़ा खुलासा!

Published: Mon, 27 Jul 2026 06:22 PM (IST)

सरकार ने संसद में बताया कि बीमा कंपनियां मनमानी से क्लेम खारिज नहीं करतीं, बल्कि पॉलिसी शर्तों और प्रोटोकॉल के ...और पढ़ें

Health Insurance Claim: प्राइवेट कंपनियां डॉक्टर के नाम पर कर रहीं मनमानी? हेल्थ क्लेम रिजेक्शन पर सरकार का बड़ा खुलासा

Health Insurance Claim: प्राइवेट कंपनियां डॉक्टर के नाम पर कर रहीं मनमानी? हेल्थ क्लेम रिजेक्शन पर सरकार का बड़ा खुलासा

HighLights

  1. बीमा कंपनियों ने 11% स्वास्थ्य क्लेम खारिज किए।

  2. क्लेम पॉलिसी शर्तों, प्रोटोकॉल के आधार पर तय।

  3. डॉक्टर की सलाह क्लेम पास होने की गारंटी नहीं।

नई दिल्ली। कई बार आपने देखा होगा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने आपका रिजेक्ट इस बात पर रिजेक्ट कर दिया क्योंकि उन्हें मेडिकल रूप से जरूरी नहीं लगा, जबकि आप डॉक्टर के कहने पर ही भर्ती हुए थे। बीमा रेगुलेटर IRDAI की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत की स्वास्थ्य बीमा कंपनियों ने 11% स्वास्थ्य बीमा क्लेम रिजेक्ट किए थे, जिनकी कुल कीमत ₹26,037 करोड़ थी।

बीमा कंपनियों का बढ़ती मनमानी को देखते हुए, समाजवादी पार्टी से सासंद देवेश शाक्य ने सरकार से इस पर जवाब मांगा। जिसके जवाब में आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक लंबा-चौड़ा जवाब दिया। आइए जानते हैं कि इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से क्या कहा गया।

सवाल: क्या इंश्योरेंस कंपनियां अपनी मर्जी से क्लेम रिजेक्ट कर रही हैं?
जवाब:संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में प्रतापराव जाधव ने बताया कि इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI के अनुसार, कंपनियां किसी भी क्लेम को सीधे खारिज नहीं करतीं। वे पॉलिसी की शर्तों, मरीज की क्लिनिकल रिपोर्ट, इलाज करने वाले डॉक्टर की सलाह और 'स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल' के आधार पर हर एक केस की जांच परख करके क्लेम तय करती हैं।

सवाल: क्या क्लेम पास करने में डॉक्टर की सलाह को सबसे ऊपर माना जाएगा?
जवाब: ये मरीजों के लिए सबसे बड़ा सवाल था। लेकिन सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल IRDAI के पास ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, जिसमें इलाज करने वाले डॉक्टर की राय को इंश्योरेंस क्लेम पास करने के लिए सबसे ऊपर माना जाए। जिसका मतलब है कि आखिरी फैसला डॉक्टर की राय पर नहीं, बल्कि कंपनी की पॉलिसी और नियम के आधार पर ही क्लेम होगा।

सवाल: 'गैर-जरूरी मेडिकल' आधार पर क्लेम रिजेक्ट होने का कोई डेटा है?
जवाब: सरकार ने स्पष्ट किया कि IRDAI सिर्फ ओवरऑल रिजेक्ट हुए हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम का डेटा इकट्ठा करती है। 'मेडिकल जरूरत नहीं' (non-medical necessity) जैसे खास कारणों से खारिज किए गए क्लेम का अलग से कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है। इसलिए, कंपनियों के हिसाब से ऐसा कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।

ये जवाब उन लोगों के लिए जानना बेहद जरूरी है जो हेल्थ इंश्योरेंस पर निर्भर हैं। इससे ये साफ होता है कि डॉक्टर के अस्पताल में भर्ती होने की सलाह देने मात्र से ये गारंटी नहीं मिलती कि इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम पास ही कर देगी। साथ ही ये जानना भी जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह पर कोई क्लेम रिजेक्ट नहीं हो सकता है।

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