नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। किसी भी आपदा से निपटने के लिए बीमा सबसे कारगर रास्ता है। हम अपने परिवार का बीमा, गाड़ी या घर का बीमा कराते हैं ताकि मुश्किल हालात में आर्थिक मदद मिल सके। लेकिन, कभी-कभी कुछ गलतियों या जानकारी नहीं होने की वजह से आपका इंश्योरेंस क्लेम (बीमा दावा) रद्द हो सकता है। इंश्योरेंस लेने से पहले क्लेम को लेकर पूरी समझ रखें।

दावों के लिए डिटेल जमा करें: मान लीजिए कि कभी बाढ़ आ जाती है और इसमें आपके पॉलिसी से संबंधित दस्तावेज बह जाते हैं, तो पॉलिसी नंबर को सॉफ्ट कॉपी से ढूंढें। इसके बाद नियम और शर्तों को पढ़ें और अपने नुकसान की एक लिस्ट तैयार करें और उसे जमा करें। कोशिश करें कि बाढ़ उतरने के बाद जो वस्तु जहां पड़ी है उसे वहां से हटाया न जाए और बीमाकर्ता उस साइट या क्षतिग्रस्त संपत्ति का निरीक्षण करना चाहे तो उसे उस जगह की विजिट कराई जाए।

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ऐसी परिस्थितियों में होने वाले नुकसान का मूल्यांकन करने के लिए बीमाकर्ताओं के पास अपना मापदंड होता है। जब भी कोई बीमा लें तो दावों को दर्ज करते समय पॉलिसीधारकों को बहुत सावधान रहना चाहिए। एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर पॉलिसीधारक बीमाकर्ता की ओर से किए गए नुकसान के आकलन से संतुष्ट नहीं हैं तो दावों के निपटारे के लिए जो वाउचर मिलता है उसपर हस्ताक्षर करने से पहले मूल्यांकन की समीक्षा कर ले।

अगर मोटर बीमा पॉलिसी की बात करें तो, यह बाढ़, आग, चोरी, आग से होने वाले नुकसान को कवर करती है। ऐसे में पॉलिसीधारक को पानी में डूबे हुए वाहन की तस्वीर लेनी चाहिए और दावा फाइल करते समय उस तस्वीर को भी मेंशन करना चाहिए। जब तक बीमाकर्ता उसे देख न ले तब तक वाहन में कोई मरम्मत नहीं कराना चाहिए।

प्रोसेस में लगता है समय: किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में बीमाकर्ताओं को दावे के तुरंत निपटारे में कई मुश्किलात सामने आते हैं। बीमाकर्ताओं की कठिनाइयों को दावेदारों को भी समझना चाहिए। जब आधिकारिक प्रक्रिया की बात आए तो थोड़ा धीरज बनाएं रखें। क्योंकि क्लेम के सेटलमेंट में समय लगता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल में आई बाढ़ से होने वाले नुकसान के बाद इरदाई ने सभी बीमा कंपनियों को जल्द से जल्द दावों को सुलझाने के लिए कहा है। साथ ही सरकार ने भी सभी जीवन बीमा कंपनियों जैसे, जीवन ज्योति बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना और फसल बीमा योजना के संबंध में दावों को सुलझाने के निर्देश दिए हैं। ऐसी परिस्थितियों में बीमा के वास्तविक मूल्य को सुरक्षित करने के लिए, दावेदारों को दावे की प्रक्रिया और दावे की राशि को पूरी तरह से समझना चाहिए कि जिसका दावा वो कर रहे हैं उसके हकदार हैं भी की नहीं ये भी मालूम होना चाहिए।

यदि कोई पॉलिसीधारक निपटारे की राशि से संतुष्ट नहीं है, तो वह बीमा लोकपाल, उपभोक्ता मंच जैसी जगहों पर इस बात को उठा सकता है।

Posted By: Surbhi Jain