यह एक ऐसी व्यवस्था है, जहां ग्राहक अपनी पॉलिसी से संबंधित समस्त कागजात डिजिटल फॉर्मेट में इलेक्ट्रॉनिक तौर पर सुरक्षित रखवा सकते हैं। इससे इन कागजात को वर्षों सुरक्षित रखने के झंझट और गुम हो जाने की संभावना से निजात मिलेगी।

शर्मा जी के पास एक परंपरागत बीमा पॉलिसी थी। इस पर हर तीन साल में पंद्रह वर्षों तक नियमित धनराशि मिलनी थी। तीन साल बाद तो उन्हें 75 हजार रुपये मिल गए। परंतु छठे साल पर उन्हें उनका पैसा नहीं मिला, क्योंकि एक जरूरी कागज कहीं गुम हो गया था। बीमा कंपनी उस कागज की मांग कर रही थी। हालांकि एक साल बाद उनकी राशि मिल गई, मगर इसके लिए उन्हें भारी मशक्कत और दौड़भाग करनी पड़ी। यह उत्पीड़न से कम नहीं था।

दावे के निपटान और पैसों के भुगतान के लिए बीमा पॉलिसी से संबंधित सभी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के बारे में बहुत कुछ कहा और लिखा जा चुका है। एक भी कागज खोने से भारी समस्या खड़ी हो सकती है। आपका सारा निवेश पानी में जा सकता है। सौभाग्यवश, भारतीय बीमा नियामक इरडा ने इस समस्या के समाधान के लिए 2013 में ई-रिपॉजिटरी लांच करने की घोषणा कर दी थी। यह एक ऐसी व्यवस्था है जहां ग्राहक अपनी पॉलिसी से संबंधित समस्त कागजात डिजिटल फॉर्मेट में इलेक्ट्रॉनिक तौर पर सुरक्षित रखवा सकते हैं। इससे इन कागजात को वर्षों सुरक्षित रखने के झंझट और गुम हो जाने की संभावना से निजात मिलेगी।

ये ई-रिपॉजिटरीज एक तरह की इलेक्ट्रानिक तिजोरियां हैं। इनमें विभिन्न कंपनियों से संबंधित अलग-अलग बीमा पॉलिसियों और उनसे संबंधित दस्तावेजों को कागज के बजाय डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित रखा जा सकता है। यदि आपके पास किसी साधारण बीमा कंपनी की हेल्थ पॉलिसी तथा जीवन बीमा कंपनी की टर्म पॉलिसी है तो आपको अलग-अलग पॉलिसियां मेंटेन करने की जरूरत नहीं है। दोनों पॉलिसियों को एक ही यूनीक ई-अकाउंट नंबर पर लॉग-इन करके मैनेज और ट्रैक किया जा सकता है। इससे दो पॉलिसियों के लिए अलग केवाईसी (नो योर कस्टमर) कागजात जमा करने की आवश्यकता भी नहीं रहती है।

इसके अलावा दावे की जरूरत पड़ने पर ग्राहक और बीमा कंपनी दोनों को एक बटन क्लिक करने पर सभी कागजात आसानी से और सही सलामत स्थिति में प्राप्त हो जाते हैं। इससे दावे की प्रक्रिया में तेजी आने से रकम का भुगतान जल्द हो जाता है।

ई-केवाईसी लागू होने से न केवल सेवाओं की डिलीवरी में तेजी आएगी, बल्कि धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े का जोखिम भी खत्म होगा। बीमा कंपनी को भी केवाईसी की जांच करने और प्रक्रिया को पूर्ण करने में आसानी होगी। ग्राहक के कागजात जमा कराने या ओरिजिनल पेपर देखने का इंतजार नहीं करना होगा। चूंकि समस्त प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक है, लिहाजा, पेपर डॉक्यूमेंट को संग्रहीत करने के झंझट से भी निजात मिलेगी।

मुफ्त में मिलेगी सेवा
ई-रिपॉजिटरीज की सेवा सभी बीमा ग्राहकों को मुफ्त में प्राप्त होगी। कोई भी ग्राहक जो यूआइडीएआइ में पंजीकृत है और जिसके पास आधार कार्ड है, इस सुविधा का लाभ उठा सकता है।

कैसे मिलेगा इसका लाभ
इरडा ने ई-रिपॉजिटरी एजेंट के रूप में पांच कंपनियों का चयन किया है। ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक इनमें से किसी भी एक का चुनाव कर सकते हैं। इसके बाद उन्हें अपनी पॉलिसियों से संबंधित ब्योरा उस कंपनी को देना होगा। फिर कंपनी की तरफ से पॉलिसियों से संबंधित सारा ब्योरा वास्तविक समय के आधार पर मेंटेन और अपडेट किया जाएगा। कंपनी ग्राहक को एक लिंक प्रदान करेगी। इसके माध्यम से वह महज एक बटन के क्लिक से अपनी पॉलिसियों के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इसमें प्रीमियम राशि, अदा करने की तिथि, फंड वैल्यू, मेच्योरिटी की तारीख सभी कुछ शामिल हैं।

पूछताछ की भी सुविधा
इसके अलावा इसमें पूछताछ की सुविधा भी है। ग्राहक को यदि अपनी पॉलिसियों के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी चाहिए तो वह भी उसे ई-रिपॉजिटरी और बीमा कंपनी की ओर से प्रदान की जाएगी। पॉलिसी के डीमैटीरियलाइजेशन से बीमा कंपनियों को भी पॉलिसियों को मैनेज करने, अपने सेवा मानक सुधारने तथा धोखाधड़ी व फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

इन ई-रिपॉजिटरीज से बीमा उद्योग का इंफ्रास्ट्रक्चर तो मजबूत होगा ही, साथ ही उन्हें विभिन्न ग्राहकों की पहचान कर उनकी बीमा संबंधी विशिष्ट जरूरतें पूरी करने का अवसर भी मिलेगा। इससे अंतत: बीमा उत्पादों की आवश्यकता आधारित बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।
स्नेहिल गंभीर
सीओओ, अवीवा लाइफ इंश्योरेंस

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