एक युवा व्यवसायी रमेश पार्टियों के दौरान कभी-कभी धूमपान करता है। हालांकि, उसने अपना जीवन बीमा आवेदन भरते समय अपनी धूमपान की आदतों को नहीं बताया। उसने इसे खास तवज्जो नहीं दी। उसके विचार से चूंकि वह नियमित रूप से स्मोक नहीं करता इसलिए यह आवश्यक नहीं होता।

यह आमतौर पर होने वाली एक दुविधा है जिससे कभी-कभी धूमपान करने वाला प्रत्येक व्यक्ति उस समय गुजरता है जब वह जीवन बीमा कवर के लिए आवेदन करता है। वे दो कारणों से चिंतित होते हैं। एक जीवन बीमा कंपनी को यह पता लगने पर क्या होगा कि वह कभी कभार ही धूमपान करता है। दो, क्या इस श्रेणी के ग्राहकों के

साथ अनवरत धूमपान करने वाले व्यक्ति की तरह व्यवहार किया जाता है। जीवन बीमा कंपनियां चाहती हैं कि उनके ग्राहकों का स्वास्थ्य अच्छा हो। आपकी धूमपान की आदतों को बताना ऐसे शुद्ध जोखिम उत्पादों जैसे टर्म प्लान में अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। वजह यह है कि यहां प्रीमियम दरें बहुत कम होती हैं। साथ ही एक ही पॉलिसी की तीन-तीन प्रीमियम हो सकती हैं और यह कई बार लोगों की धूमपान करने की आदतों पर निर्भर करता हैं। धूमपान करने वाला व्यक्ति, धूमपान नहीं करने वाला व्यक्ति और कभी कभार धूमपान करने वाले व्यक्ति के

लिए अलग अलग प्रीमियम की दरें हो सकती हैं। धूमपान कभी नहीं किया है तो अपेक्षाकृत काफी कम कीमत अदा कर सकते हैं। ऐसा इसलिए है कि जीवन का जोखिम कम होता है। दूसरी तरफ धूमपान करने वाले व्यक्तियों के लिए ज्यादातर कंपनियों की दरें बहुत अधिक ही होती हैं।

कौन है धूमपान करने वाला व्यक्ति जीवन बीमा कंपनी आपको धूमपान करने वाला व्यक्ति मानती है यदि आप अपने बीमा आवेदन में धूमपान से संबंधित प्रश्न का उत्तर हां में देते हैं। धूमपान करने वाले व्यक्ति के रूप में वर्गीकृत करना आपके सिगरेट, सिगार, हुक्का और तंबाकू चबाने के उपयोग को संदर्भित करता है। साथ ही

निकोटिन पैच या गम का उपयोग करने पर भी आप धूमपान करने वाले व्यक्ति की श्रेणी में आते हैं। ज्यादातर जीवन बीमा कंपनियां आमतौर पर निकोटिन के किसी भी प्रकार के उपयोग की जांच करती हैं। चाहे आपने

निकोटिन उत्पादों का सेवन नियमित रूप से किया हो, किसी निर्दिष्ट समयसीमा में किया हो या कभी-कभी सिगरेट पीते हैं।

फॉर्म में आपका उत्तर हां होना चाहिए। यदि आप ऑनलाइन टर्म प्लान की प्रीमियम दरों की तुलना करेंगे तो यह देखा गया है कि धूमपान करने वाले व्यक्तियों को धूमपान नहीं करने वाले व्यक्तियों से लगभग डेढ़ से दो गुना तक ज्यादा प्रीमियम देना पड़ता है। इस वजह से कभी कभार धूमपान करने वाले व्यक्ति भी अपनी इस आदत के बारे में

उल्लेख नहीं करते। दूसरी तरफ शुद्ध टर्म प्लान के लिए प्रतिस्पर्धात्मक दरें होने के कारण जीवन बीमा कंपनियों के लिए यह अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है कि वे आपके चिकित्सा संबंधी विवरणों का पूरी तरह से परीक्षण करें। विशेष रूप से धूमपान नहीं करने वाले व्यक्ति के आवेदन के लिए उनके रक्त और मूत्र नमूनों का परीक्षण किया जाता है। क्या अपने बीमा आवेदन प्रपत्र में अपनी धूमपान की स्थिति को छिपाना सही है? इसका सीधा जबाव है नहीं। वजह यह है कि जीवन बीमा कंपनी आपकी गैर मौजूदगी में आपके परिवार को दावे का भुगतान करेगी। इसलिए यह आपके लिए भी अत्यावश्यक है कि आप अपना बीमा आवेदन फॉर्म भरते समय ईमानदार और स्पष्ट रहें। यह आपके और बीमा कंपनी के बीच कानूनी अनुबंध है।

अगर आपने गलत सूचना दी है तो हो सकता है कि बाद में आपके मुआवजा लेने संबंधी प्रस्ताव को खारिज कर दिया जाए। आपको यह सुनने में अप्रिय लग सकता है लेकिन धूमपान करने के बारे में झूठ बोलने या तथ्य को छुपाने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। जीवन बीमा कंपनी के पास दावे की स्थिति में या किसी भी अन्य कारण से

विचाराधीन पॉलिसी को तीन वर्षों के भीतर स्थगित करने का अधिकार सुरक्षित है।

धूमपान की आदतों के बारे में प्रारंभ से ही ईमानदार रहने से यह सुनिश्चित होता है कि आपको पॉलिसी के लाभ प्राप्त हों। यही नहीं अगर आपने बीमा पॉलिसी खरीदने के बाद धूमपान शुरू कर दिया है तो उसके बारे में भी जानकारी बीमा कंपनी को दे देनी चाहिए। यही आपके हित में होगा। साथ ही अगर पॉलिसी खरीदने के बाद आप स्मोक करना छोड़ देते हैं तो इसके बारे में भी एक वर्ष बाद आप बीमा कंपनी को जानकारी दे सकते हैं। साथ ही बीमा कंपनी आपको आवश्यक जांच के बाद प्रीमियम की दरों में छूट भी दे सकती है।

मुनिष शारदा

एमडी व सीईओ

फ्यूचर जनराली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस

Posted By: Babita Kashyap

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप