नए आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर, 2015 तक देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या 40 करोड़ को पार कर गई है। इंटरनेट उपयोग में चीन के बाद भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश हो गया है। इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल हर तरह के कारोबार को प्रभावित करेगा। हर क्षेत्र की कंपनियां इस बदलते माहौल के लिए खुद

को तैयार कर रही हैं। ग्राहकों को भी इस बदले माहौल के लिए तैयार रहना चाहिए। इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह कंपनियों के साथ ही ग्राहकों के हितों को भी बढ़ावा देगा।

दरअसल, इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल ग्राहकों के फैसला लेने के तौर-तरीके को प्रभावित करने लगा है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप का एक अध्ययन बताता है कि 40 फीसद शहरी ग्राहक कोई भी उत्पाद या सेवा खरीदने से पहले उसके बारे में इंटरनेट पर रिसर्च करते हैं। स्मार्टफोन के ग्राहकों की बढ़ती संख्या इसमें नया आयाम जो रहा है। इंटरनेट और स्मार्टफोन के बढ़ते प्रचलन की वजह से ग्राहकों के फैसला लेने का तौर तरीका बदलता जा रहा है। वर्ष 2017 तक 31-32 करोड़ भारतीयों के पास स्मार्टफोन होगा। यह आने वाले दिनों में कई तरह का बदलाव

लाने जा रहा है। बीमा भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां इंटरनेट का बढ़ता दायरा कई बदलाव करेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या देश की बीमा कंपनियां इस बदलाव के लिए तैयार हैं? बीमा कंपनियों की तैयारियों को देख कर लगता है कि उन्होंने इस मुद्दे को समझना शुरू कर दिया है।

निम्न चार मुद्दे हैं जहां बीमा कंपनियों ने इंटरनेट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना

शुरू कर दिया है।

1. ज्यादा से ज्यादा बीमा कंपनियों ने ग्राहकों के साथ इंटरनेट के जरिए संपर्क साधना शुरू कर दिया है। यह कंपनियों को भौगोलिकी सीमा की बाधाओं को खत्म कर ग्राहकों तक पहुंच बढ़ाने का आसान साधन हो गया है। साथ ही ग्राहकों की बदलती हुई जरूरत के मुताबिक उनकी बीमा की मांग में बदलाव करने और इस बारे में उन्हें जानकारी उपलब्ध कराना आसान हो गया है।

2. इंटरनेट के जरिये बीमा पॉलिसियों की बिक्री आज की एक बड़ी हकीकत है। अब कंपनियों के लिए किसी मध्यवर्ती के जरिये बीमा बेचने की बाध्यता खत्म हो गई है। बीमा कंपनी और ग्राहकों के बीच सीधा संपर्क हो गया है।

3. इंटरनेट ने बीमा कंपनियों को ग्राहकों की समस्या का समाधान तुरंत सुनने और उनका ज्यादा बेहतर तरीके से समाधान करने को भी सुविधाजनक बना दिया है। मेरा मानना है इंटरनेट के इस तेजी से बढ़ रहे प्रभाव के बावजूद ग्राहकों का सीधा कंपनी के साथ व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क साधने की ललक अभी खत्म नहीं होने वाली है। इसलिए बीमा कंपनियों को दोनों तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बनानी होगी।

आइबीएम की रिपोर्ट बताती है कि हेल्थ बीमा जैसे क्षेत्र के लिए इंटरनेट सबसे ज्यादा बदलाव वाला जरिया बन सकता है। कुछ हेल्थ बीमा कंपनियों ने इस बदलते माहौल को स्वीकार किया है और इस हिसाब से अपनी रणनीति को बदलना भी शुरू कर दिया है। इसके बावजूद इस बात के साफ प्रमाण मिलने लगे हैं कि इंटरनेट का बढ़ता प्रसार कंपनियों को यह साबित करने का मौका देगा कि उनके लिए ग्राहकों के हितों से ज्यादा कुछ भी महत्व नहीं रखता। जो कंपनी इस तथ्य को जल्दी से अपनाएगी वह निश्चित तौर पर अपनी प्रतिद्वंदियों से आगे रहेगी।

संदीप पटेल

एमडी व सीईओ

सिग्ना टीटीके हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी

Posted By: Babita Kashyap

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