नई दिल्‍ली, राहुल जैन। पर्सनल फाइनेंस को लेकर हम सभी को ये मालूम है कि हमें बचत करनी चाहिए, इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स खरीदना चाहिए, टैक्स बचाना चाहिए और निवेश करना चाहिए। हालांकि, अधिकतर लोग इस बात से अनजान है कि शुरुआत कहां से करनी है। प्राथमिकताएं तय करने से लक्ष्यों को हासिल करने में काफी अधिक मदद मिलती है। यहां पर आपको पर्सनल फाइनेंस पिरामिड (Personal Finance Pyramid) से मदद मिल सकती है। आइए, जानते हैं कि ये क्या है और इसके प्रमुख कॉम्पोनेंट्स कौन-कौन से हैं? आइए पता लगाते हैं।

पर्सनल फाइनेंस पिरामिड क्या है?

वास्तव में पर्सनल फाइनेंस पिरामिड महत्ता के आधार पर फाइनेंस को बेहतर तरीके से मैनेज करने का एक अप्रोच है। बिल्कुल नीचे से शुरुआत करते हुए ऊपर की ओर बढ़ना इसका सबसे बुनियादी नियम है। इसके साथ-ही-साथ सभी पहलुओं को एक साथ एड्रेस करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

प्रोटेक्शनः पिरामिड का आधार

जीवन में कब क्या हो जाएगा, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। कोई भी आपदा किसी भी पल आ सकती है। वित्तीय तौर पर समझदारी इसी बात में है कि आप बुरे वक्त के लिए तैयार हों। इस तरह प्रोटेक्शन यानी सुरक्षा पिरामिड में सबसे पहले आता है। लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस किसी भी तरह की दुर्घटना की स्थिति में जरूरी फाइनेंशियल बैकअप उपलब्ध कराते हैं। जहां जीवन बीमा से आपको इस बात का सुकून मिल जाता है कि आपके नहीं रहने पर आपके प्रियजन लड़खड़ाएंगे नहीं। वहीं, हेल्थ इंश्योरेंस से हॉस्पिटलाइजेशन की स्थिति में आपकी जेब से कोई खर्च नहीं होता है।

इसके साथ-साथ इस बात को सुनिश्चित करना भी समान रूप से अहम है कि सभी इंश्योरेंस प्लान की कवरेज पर्याप्त हो। एक पॉपुलर नियम के अनुसार आपकी लाइफ इंश्योरेंस कवरेज आपके मौजूदा सालाना इनकम का दस गुना होना चाहिए। अगर आप मेट्रो सिटी में रहते हैं तो आपके पास कम-से-कम 10 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस होना चाहिए। इसकी वजह है कि मेट्रो शहरों में नॉन-मेट्रो शहरों से चिकित्सा पर ज्यादा खर्च आता है। सभी प्लान्स की तुलना कीजिए और अपनी जरूरत के हिसाब से सबसे अच्छा प्लान चुनिए।

भविष्य के लक्ष्यों और इमरजेंसी के लिए बचत

इमरजेंसी की स्थिति कभी भी पैदा हो सकती है और यह मजबूत फाइनेंशियल प्लान को भी पटरी से उतार सकती है। भविष्य के लक्ष्यों और इमरजेंसी के लिए बचत करना इस पिरामिड में दूसरे स्थान पर आता है। कोविड ने मुश्किल समय के लिए बचत की अहमियमत को जाहिर कर दिया है और आदर्श तौर पर आपके पास कम-से-कम एक साल का इमरजेंसी फंड होना चाहिए। सेविंग अकाउंट से थोड़ा ज्यादा रिटर्न देने वाले लिक्विड फंड्स में अनुशासित और सतत तरीके से निवेश के जरिए ये फंड तैयार किए जा सकते हैं।

पर्याप्त इमरजेंसी फंड तैयार करने के बाद भी आपको रूकना नहीं चाहिए। इनकम बढ़ने के साथ हर महीने बचत बढ़ा दीजिए। इमरजेंसी फंड बनाते समय एसएलआर (सेफ्टी, लिक्विडिटी और रिटर्न) सिद्धांत को फॉलो करना चाहिए। ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश कीजिए, जिसमें जरूरत पड़ने पर आपको आसानी से पैसे मिल जाएं।

धन के सृजन के लिए निवेश

जहां अनुशासित तरीके से बचत एक मजबूत वित्तीय रणनीति की रीढ़ होती है, वहीं महंगाई दर के चलते यह वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने में कारगर नहीं भी सिद्ध हो सकता है। इसलिए संपत्ति में इजाफा करने के लिए आपको सिस्टेमैटिक तरीके से अपनी बचत की गई रकम को इंवेस्ट करने की जरूरत होती है। यहां आपका निवेश इस तरीके से होना चाहिए कि वह आपके लक्ष्यों एवं जोखिम लेने की क्षमता को पूरा करता हो। इसके साथ ही आपके द्वारा किए जाना वाला निवेश ऐसे फंड में होना चाहिए जिसमें महंगाई दर को पीछे छोड़ने का दम हो।

इक्विटी में इंवेस्टमेंट से यहां पर मदद मिलती है क्योंकि इक्विटी में लंबी अवधि में महंगाई दर सूचकांक से ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता होती है। इस पर गौर कीजिए। यहां तक कि 10 फीसदी सालाना रिटर्न देने वाले इक्विटी म्यूचुअल फंड में हर महीने 5,000 रुपये के निवेश से आप 20 साल में 37 लाख रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं।

मार्केट-लिंक्ड और फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट्स में निवेश से आप आसानी से भविष्य के लक्ष्यों के लिए धन का सृजन कर सकते हैं।

विरासत के लिए जायदाद की प्लानिंग

वित्तीय योजना बनाते समय और उसके प्रबंधन के समय जायदाद की प्लानिंग को लोग अक्सर नजरंदाज कर देते हैं। जहां हम में से अधिकतर लोग अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए कई तरह के कदम उठाते हैं, वहीं अपनी वित्तीय विरासत को किसी और को सौंपने को लेकर प्रोएक्टिव तरीके से नहीं सोच पाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों और म्यूचुअल फंड हाउसेज के पास 51,500 करोड़ रुपये की ऐसी रकम पड़ी है, जिसे क्लेम करने वाला कोई नहीं है। इसकी वजह ये है कि लोग नॉमिनी बनाना भूल जाते हैं। इससे होता है कि मृतक के प्रियजन को रुपये नहीं मिल पाते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में आपको अपने सभी सेविंग अकाउंट्स, इंवेस्टमेंट, प्रोविडेंट फंड अकाउंट और इंश्योरेंस की खरीद पर निश्चित तौर पर नॉमिनी बना लेना चाहिए। इसके साथ ही साथ अपने घर के विश्वसनीय सदस्यों को अपने निवेश और बीमा की जानकारी देनी चाहिए। इसके साथ ही आपके नहीं रहने पर एसेट्स का वितरण किस प्रकार करना है, इस संबंध में एक विस्तृत वसीयत तैयार कर लीजिए। बाद में किसी तरह का कंफ्यूजन ना हो, इसके लिए वसीयत को रजिस्टर करवाना मत भूलिए।

(लेखक Edelweiss Wealth Management में पर्सनल वेल्‍थ के प्रेसिडेंट एवं हेड हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

Edited By: Manish Mishra