नई दिल्‍ली, संदीप भारद्वाज। पहली नौकरी मिलने की खुशी की तुलना किसी और चीज से नहीं की जा सकती। कॉलेज पूरा कर खुद से पैसे कमाना एक सुखद अहसास होता है, और जैसे ही पहली सैलरी खाते में आती है, तो अक्सर लोग परिवार के लिए कुछ खरीदने या अपने पसंदीदा गैजेट खरीदने का रुख करते हैं। इस उत्साह के बीच निवेश खास तौर से लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट शायद अंतिम बात होगी, जिसके बारे में विचार किया जाएगा। यहीं हम गलती करते हैं और बाद में हमारी लाइफस्‍टाइल ऐसी हो जाती है जो सिर्फ मंथली सैलरी पर निर्भर करने लगती है। 

हालांकि कैरियर की शुरुआत से ही निवेश करना एक बुद्धिमानी वाला निर्णय है, जो आपको लंबी अवधि में ज्यादा पूंजी और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करेगा। आइए कुछ ऐसे कारणों पर नजर डालते हैं कि आखिर क्यों बचत सबकी योजना का हिस्सा होना चाहिए :

कम्पाउंडिंग का बड़ा असर

शायद आपने भी कंपाउंड इंटरेस्ट की क्लास में झपकी ली होगी, लेकिन यह समझना कोई मुश्किल नहीं है कि निवेश जितने लंबे समय के लिए होगा, उसकी कीमत उतनी ही बढ़ेगी। पॉलीनॉमिकल फंक्शन के तौर पर समय इसके पॉलीनॉमिक की डिग्री है। इसी वजह से बचत में कंपाउंडिंग तेज बढ़ोत्‍तरी लाता है और लंबी अवधि में ज्यादा फायदा पहुंचाता है। 

ज्यादा उलझने के बजाय आइए उदाहरण से कंपाउंडिंग के फायदे समझते हैं। 60 वर्ष को रिटायरमेंट की आयु मानते हुए, दो लोग प्रति माह 1000 हजार रुपये निवेश करते हैं। 25 वर्षीय अंकित के पास निवेश के लिए 35 वर्ष का समय है, जबकि सिद्धार्थ की आयु 35 है और उसके पास निवेश के लिए बस 30 वर्ष का समय है। दोनों को 12 फीसदी का सालाना रिटर्न मिल रहा है। ऐसे में अंकित के पास रिटायरमेंट की आयु तक खाते में 64 लाख रुपये होंगे, जबकि सिद्धार्थ के पास 35 लाख रुपये होंगे। किसको पता था कि 5 वर्ष का अंतर 29 लाख रुपये के अंतर में बदल जाएगा। इतनी राशि किसी भी व्यक्ति और उनके परिवार के जीवनस्तर को बदल सकती है।

बात अभी इतनी ही नहीं है। कपांउंडिंग और भी रोचक है। आइए एक और उदाहरण लेते हैं, जहां हिना और सरिता दोनों 30 वर्ष की हैं। हिना पहले 15 वर्ष तक प्रति माह 2 हजार रुपये निवेश करने में सक्षम होती है, जिसके बाद वह निवेश करना बंद कर देती है और पैसे भी नहीं निकालती व इस राशि को अगले 15 वर्ष तक कंपांउंडिंग के लिए छोड़ देती है। वहीं, दूसरी तरफ सरिता अगले 30 वर्षों के लिए प्रति माह एक हजार रुपये निवेश करने का निर्णय लेती है। कागजी गणित में दोनों ने एक समान राशि निवेश की है। खैर, सरिता के पास बचत में सिर्फ 35 लाख रुपये होंगे, जबकि हिना के पास कुल बचत 55 लाख रुपये होगी। 

साधारण शब्दों में कहें तो कंपाउंडिंग किसी भी सेविंग पर बड़ा असर दिखाता है। जल्दी और ज्यादा निवेश अंत में बेहतर सेविंग देता है। बीच-बीच में आने वाली मंदी और उठती-गिरती अर्थव्यवस्था से यह सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा भी कैरियर के शुरुआत से ही निवेश करने के कुछ अन्य फायदे हैं:

बेहतर मानसिक सेहत और स्वास्थ्य: कैरियर के शुरुआत से ही निवेश करने से भविष्य में बेहतर आर्थिक स्थिति की नींव तैयार हो जाती है। इस तरह के निवेश से भविष्य की आर्थिक चिंताओं से छुटकारा मिलता है व जीवन और बेहतर हो जाता है। 

बेहतर खर्च की आदत: तुरंत खरीदारी करने की आदत के बजाय बचत करने के बाद खरीदारी करने की आदत बेहतर होती है। जब आपके पास सीमित कमाई होती है, तो आप सोच-समझकर सिर्फ जरूरत की चीजों पर खर्च करते हैं। इसके अलावा प्रत्येक माह का निवेश भविष्य की बचत है जो अभी हमेशा बिल के तनाव से कहीं बेहतर है।

विभिन्न निवेश के विकल्प चुनने की स्वतंत्रता: शुरुआत से ही निवेश करने से आपको ज्यादा से ज्यादा विकल्पों को चुनने की स्वतंत्रता मिलती है। विभिन्न निवेश के विकल्प अलग-अलग प्रकार के जोखिम और रिटर्न के साथ आते हैं। शुरुआत से ही निवेश करने से जोखिम लेने का समय मिलता है और छोटे झटकों से उबरने का मौका होता है। वहीं, देर से निवेश करने के कारण ज्यादा सुरक्षित विकल्प ही चुनने पड़ते हैं, जिनका लंबी अवधि में ज्यादा फायदा नहीं होता है। 

इसलिए बेहतर आर्थिक स्वतंत्रता और प्रचुरता उन्हें मिलती है, जो अपनी कमाई को बुद्धिमानी के साथ उपयोग करते हैं।

लॉन्ग टर्म इन्‍वेस्टमेंट अब लोगों का पसंदीदा विकल्प बनती जा रही है। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग का उपयोग कर कई फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म एप आधारित निवेश के लिए सलाह दे रहे हैं। इसलिए बेहतरीन टेक्नोलॉजी का फायदा लेते हुए कैरियर के शुरुआत से ही निचेश करना शुरू करिए और अपना भविष्य सुरक्षित करिए। 

(लेखक एंजेल ब्रोकिंग के चीफ सेल्स ऑफिसर हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

Posted By: Manish Mishra

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