नई दिल्ली, किशोर ओस्तवाल। अपनी पिछली रिपोर्ट में हमने बताया था कि निफ्टी 15200 से 15500 के स्तर लिए आगे बढ़ रहा है। हमारे अनुमान के अनुसार ही निफ्टी ने 15161 पर बंद होने से पहले 15238 का उच्च स्तर बनाया है। हमने वॉरेन बफे वैल्यूएशन मैथड़ का भी उल्लेख किया था, जो बाजार पूंजीकरण और जीडीपी का रेश्यो होता है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण इस हफ्ते 2.7 ट्रिलियन डॉलर हो गया है। वहीं, जीडीपी ग्रोथ के भी 23 फीसद के संकुचन से 2.8 फीसद  तक आने का अनुमान है।

इस तरह यह रेश्यो अभी भी 100 फीसद से कम है, जो कि बहुत सकारात्मक है। जब तक यह रेश्यो 120 से नीचे रहेगा, बाजार में तेजी जारी रहेगी, क्योंकि 120 वह आंकड़ा है, जहां से गिरावट के संकेत मिल सकते हैं। वास्तव में, बुल के अत्यधिक उच्च स्तर पर होने की परिस्थिति में यह रेश्यो 149 तक भी जा सकता है। उदाहरण के तौर पर साल 2007 में बाजार के गिरने से पहले यह रेश्यो 149 फीसद तक पहुंचा था।

तीसरी तिमाही में अर्निंग ग्रोथ 20 फीसद से अधिक रही है। कई सालों के बाद पहली बार हमने इस तरह के आंकड़े देखे हैं। कई कंपनियों ने बॉटम लाइन में 50 फीसद से 8000 फीसद ग्रोथ की घोषणा की है, जो कल्पना से भी अधिक है। उदाहरण के लिए, भंसाली इंजीनियरिंग ने बॉटम लाइन में 817 फीसद की वृद्धि की घोषणा की, Ineos ने 317 फीसद की घोषणा की, जबकि कुछ रासायनिक कंनियों ने 7800 फीसद की ग्रोथ की भी घोषणा की।

यह मुख्य रूप से 3 कारकों के चलते है। पहला चीन, दूसरा 25 फीसद कर व्यवस्था और तीसरा कोविड-19 के चलते रियायतें और मांग में वृद्धि के उपाय। कमोडिटी सेक्टर पर भी व्यापक प्रभाव देखा गया। चाइना फैक्टर ने इसके पक्ष में बहुत अधिक काम किया है। लगभग सभी धातुएं अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर हैं। फरवरी में भी यह ट्रेंड जारी है और इसलिए व्यापक रूप से यह उम्मीद की जाती है कि मार्च तिमाही में दिसंबर तिमाही से अच्छे आंकड़े आएंगे। वित्त वर्ष 2021 के अंत तक हम पिछले वर्ष की तुलना में अधिक ग्रोथ पा लेंगे, भले ही हमने 1 तिमाही को पूरी तरह खो दिया हो। यह ऐसे परिदृश्य में एक अनूठा मामला होगा, जो सभी वैश्विक निवेशकों को भारत आने के लिए आकर्षित करेगा।

रसायन, धातु और आईटी सेक्टर ने बहुत अच्छा किया है। लेकिन सरप्राइज पैक बैंकिंग (निजी और सार्वजनिक दोनों) सेक्टर है। सकल एनपीए तेजी से कम हो रहा है। कृपया याद रखें कि हमने Sbi को 149 पर खरीदा था, जो अब 400 पर है, इंडसइंड बैंक को 280 में खरीदा था, जो अब 1060 पर है, एक्सिस को 300 पर खरीदा था, जो अब 750 पर है और आईसीआईसीआई को 275 में खरीदा था, जो अब 650 पर है और हम मानते हैं कि तेजी अभी खत्म नहीं हुई है। सुधारों, कम एनपीए और उच्च रिकवरी ने चमत्कार किया है। दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बिक्री की घोषणा के साथ बैंकिंग इंडस्ट्री में समेकन स्वाभाविक है। उद्देश्य बहुत सरल है, बैंक के आकार को बड़ा और सुसंगत बनाना।

40 लाख करोड़ रुपये (2021 में 20 और 2022 में 20) के अतिरिक्त खर्च से भारत में बैंकिंग सेक्टर कई अधिक बढ़ जाएगा। यह बैंकिंग क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा। इसलिए पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को अहमियत दी जानी चाहिए। हमने पहले बैंक निफ्टी में 18,000 के स्तर पर 30,000 का लक्ष्य तय किया था, जो 35,000 तक बढ़ चुका है। अब हम अपना लक्ष्य बढ़ाकर 44,000 और 50,000 कर रहे हैं और यह सब 2021 में होगा। इसका मतलब यह भी है कि ऊपर बताए गए बैंक 50 से 80 फीसद तक वृद्धि करेंगे।

हम 2021 में निफ्टी का लक्ष्य भी बढ़ाकर 16600 से 16700 करते हैं। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है कि अभी भी भारत में 40-45 बिलियन डॉलर का निवेश आना बाकी है। इसके अलावा हमारा मानना ​​है कि प्रमुख एफडीआई विनिर्माण क्षेत्र में आएगा, क्योंकि भारत में कर की दर सबसे कम है, जो 15 फीसद है। आपको इसकी भी सराहना करनी चाहिए कि नया एफडीआई रिजीम कई क्षेत्रों विशेषकर रियल एस्टेट के लिए गेम चेंजर साबित साबित होगा। Microsoft यदि अपना मैन्यूफैक्चरिंग बेस भारत (लोकतंत्र, कम लागत, आसान श्रम, कच्चे माल की आसान उपलब्धता और सबसे कम कर) में लाना चाहता है, तो कम से कम 5 मिलियन वर्ग फुट के वाणिज्यिक स्थान की आवश्यकता होगी।

इसके बाद उनके विदेशी टेक्नोक्रेट्स और स्थानीय प्रतिभाओं के लिए उतने ही आवासीय स्थान की आवश्यकता होगी। कमोडिटी की मांग के परिणामी चक्र काम करेंगे। अब तक वियतनाम चीन से निकलने वाली कंपनियों के लिए नए स्थान के रूप में अग्रणी देश है। हालांकि, हमें यकीन है कि भारत वह सब कर रहा है, जो भारत में अधिक निवेश को आकर्षित करेगा। भारत ने केवल इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाने के मकसद से अगले 5 वर्षों में 100  बिलियन डॉलर के इन्फ्रा खर्च की योजना बनाई है। बजट 2021 इस ओर पहला कदम था।

100 बिलियन डॉलर का इन्फ्रा खर्च काफी बड़ा है, लेकिन संसाधन कहां से आएंगे? विनिवेश इसका उपाय है। सरकार ने अगले 5 वर्षों में पीएसयू कंपनियों की बिक्री से 25 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। अकेला तेल और गैस क्षेत्र 10 लाख करोड़ से अधिक दे देगा, जो कि 100 बिलियन डॉलर से अधिक है। अकेले बीपीसीएल 1 लाख करोड़ रुपये दे देगा और इसलिए 8 लाख करोड़ रुपये प्राप्त करना मुश्किल नहीं है। फिर कोयला खदान बेचने की बात आती है। 5 जी की नीलामी और अधिक पैसा लाएगी। 15 फीसद टैक्स से विदेशों से इनफ्लो के द्वार खुलेंगे। 

पीएम नरेंद्र मोदी का ग्लोबल विज़न हमारी समझ से परे है। लेकिन एफपीआई ने इसे अच्छी तरह से समझा है और इसीलिए पिछले 10 महीनों में 37 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। अब 40 से 45 बिलियन डॉलर का निवेश और आना है। क्या यह वहां रुकेगा या नए द्वारा खोले जाएंगे, इसका आकलन तो तब ही किया जाएगा, जब हम वहां पहुंचेंगे। तथ्य यह है कि हमारे पीएम ठीक वही कर रहे हैं, जो करने की आवश्यकता है और एफपीआई 1991 के बाद से इस दिन के लिए इंतजार कर रहे थे, जब हमने पहली बार इसके लिए द्वार खोले थे।

यह सुनिश्चित है कि हम आने वाले वर्षों में चीन की तुलना में अधिक इनफ्लो प्राप्त करेंगे और निवेशित रहने से निवेशकों को अच्छे परिणाम मिलेंगे। इस प्रकार हम दृढ़ता से मानते हैं कि भारत की स्थिति इस समय सबसे अच्छी स्थिति है और इसलिए हम 2021 में ही निफ्टी का 16600 से 16700 का स्तर देखेंगे और इस बात को ध्यान में रखते हुए निवेश करें। 

(लेखक सीएनआई रिसर्च के सीएमडी हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

 

Edited By: Pawan Jayaswal