नई दिल्‍ली, धीरेंद्र कुमार। आमतौर पर लोगों का मानना है कि अगर आप रिटायरमेंट के लिए बचत करना चाहते हैं तो ऐसी किसी स्कीम या प्रोडक्ट में निवेश करना चाहिए, जो सिर्फ इसी मकसद के लिए हो। लेकिन यह सच नहीं है। आप अन्य तरीकों से भी बचत कर सकते हैं और बाद में इसका प्रयोग रिटायरमेंट का प्लान बनाने में किया जा सकता है। इंप्लॉईज प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) और नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) जैसे प्रोडक्ट मौजूद होने के चलते लोग रिटायरमेंट प्लान के लिए ऐसी स्कीमों को प्राथमिकता देते हैं। 

ये प्रोडक्ट खासतौर पर रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही बनाए गए हैं। इन प्रोडक्ट्स में निवेश करने पर टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है। इसलिए इन्हें टैक्स सेविंग भी कहा जाता है। कुल मिलाकर देखें तो रिटायरमेंट के लिए बचत करने का एक बड़ा लालच टैक्स देनदारी कम करना भी होता है। 

लेकिन ऐसा नहीं है कि अगर आप बैंक में या म्‍युचुअल फंड में रकम जमा करते हैं तो इसका इस्तेमाल रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों के लिए नहीं कर सकते हैं। किसी भी अन्य सेविंग की तरह रिटायरमेंट सेविंग का आकलन भी सुरक्षा, लिक्विडिटी, रिटर्न और टैक्स बचत के आधार पर किया जाना चाहिए।

रिटायरमेंट सेविंग को लेकर पारंपरिक या पुरानी सोच के साथ एक और बड़ी समस्या है। यह समस्या जोखिम को ठीक तरह से या बिल्कुल न समझ पाने से जुड़ी है। पारंपरिक सोच कहती है कि आपके निवेश की वैल्यू थोड़ी सी भी कम नहीं होनी चाहिए। वहीं, यह सोच इस बात को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देती है कि महंगाई आपके निवेश की असल वैल्यू को साल दर साल कम कर रही है। 

कुछ लोग किस्मत वाले हैं जिनके पास इनकम का ऐसा सोर्स है जो महंगाई बढ़ने के साथ इनकम बढ़ाता है। जैसे प्रॉपर्टी। इससे उनको अच्छा रिटर्न मिलता है। बाकी लोग जिनके पास प्रॉपर्टी नहीं है उनको जिंदगी भर महंगाई के असर से निपटने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत होती है।

निवेश में सबसे ज्यादा जोखिम कम अवधि में आने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर बताया जाता है। इक्विटी में कम अवधि में भले ही उतार-चढ़ाव का जोखिम होता है, लेकिन लंबी अवधि में निवेश करने पर रिटर्न इस जोखिम की भरपाई कर देता है। लंबी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव की चिंता नहीं करनी चाहिए। लंबे समय के दौरान इसमें मुनाफा होता लगभग तय होता है। 

ऐसे लोग जो रिटायरमेंट के लिए सेविंग तो करना चाहते हैं लेकिन इसके लिए सही विकल्प चुनने में समय नहीं लगाना चाहते हैं, उनके लिए नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस सही विकल्प है। चाहे काम करने के दौरान रिटायरमेंट के लिए निवेश करने की बात हो या रिटायरमेंट के बाद रकम इस्तेमाल करने की जरूरत, एनपीएस दोनों मानकों पर खरा उतरता है।

एनपीएस अनिवार्य पेंशन सिस्टम के साथ-साथ स्वैच्छिक पेंशन सिस्टम के तौर पर काम करता है। केंद्र और राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के लिए अनिवार्य पेंशन प्रणाली का प्रयोग कर रही हैं। हालांकि, यह अफसोस की बात है कि एनपीएस की स्वैच्छिक योजना लोगों में ज्यादा लोकप्रियता हासिल करने में सफल नहीं हो सकी है।

बचत करने के इच्छुक बहुत से लोग मुझे ईमेल करते हैं। इस दौरान मुझे जो जानकारी मिलती है उससे एक बात साफ होती है कि पर्सनल फाइनेंस पर लोगों को सलाह देने वाले और निवेश के लिए प्रोडक्ट बेचने वाले रिटायरमेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए एनपीएस अपनाने की सलाह नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा वे बचत करने वालों को ऐसे प्रोडक्ट बेच देते हैं या खरीदने की सलाह देते हैं, जो उनकी जरूरत के मुताबिक ठीक नहीं होते हैं। इसकी वजह जानना मुश्किल नहीं है।

एनपीएस में बिचौलियों को उतना कमीशन नहीं मिलता, जितना दूसरे प्रोडक्ट्स पर मिलता है। इसका मतलब है कि लोगों को खुद से ही एनपीएस के फायदों को समझना होगा और इसमें निवेश शुरू करना होगा।

एनपीएस में निवेश से होने वाले फायदे में से एक फायदा यह भी है कि इसमे 50 हजार रुपये तक के निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है। फिलहाल किसी अन्य तरह के निवेश में यह छूट उपलब्ध नहीं है। टैक्स बचत के बाद भी बहुत कम लोग ऐसे हैं, जो एनपीएस को निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प मानते हैं। 

इसके अलावा, इस प्रोडक्ट के कम बिकने की एक वजह यह है कि एनपीएस को बेचने के भी खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जो लोग एनपीएस के फायदों के बारे में जानते हैं वे इसका इस्तेमाल उत्साह के साथ कर रहे हैं। और जो लोग प्रोडक्ट चुनने के लिए बिचौलियों पर निर्भर हैं वे एनपीएस का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। इसलिए लोगों को एनपीएस को नए सिरे से जानने और समझने की जरूरत है।

रिटायरमेंट प्लान को ध्यान में रखते हुए एनपीएस एक बेहतरीन विकल्प है। लेकिन व्यापक तौर पर इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऐसे लोग जो रिटायरमेंट के लिए सेविंग करना चाहते और इसके चुनाव में ज्यादा समय भी नहीं लगाना चाहते हैं, उनके लिए एनपीएस एक बेहतर विकल्प है। चाहे काम करने के दौरान रिटायरमेंट के लिए निवेश करने की बात हो या रिटायरमेंट के बाद रकम इस्तेमाल करने की जरूरत, एनपीएस दोनों मानकों पर खरा उतरता है। 

(लेखक वैल्‍यू रिसर्च के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

 

Posted By: Manish Mishra

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