नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। अगर आप पर्याप्त बीमा सुरक्षा खरीदने के लिए यूलिप (यूनिट लिंक्ड इन्वेस्टमेंट प्लान) का इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं तो आप अपनी अधिकांश या कहें तो समूची आय इसी में खर्च कर देंगे। जब हम ‘बीमा’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो इसका आशय है कि यह ऐसी वित्तीय सुरक्षा, जो आपके साथ कोई अनहोनी होने पर आपके परिवार को मिलेगी।

एक सामान्य नियम के अनुसार किसी भी कमाने वाले व्यक्ति के पास कम से कम दस साल की आय की बीमा सुरक्षा होनी चाहिए। लेकिन दुनिया भर में यूलिप के जरिये बीमा सुरक्षा लेने पर आपको दस गुना वार्षिक प्रीमियम भरना होगा। ऐसे में वार्षिक आय के मुकाबले दस गुना बीमा सुरक्षा लेने के लिए आपको अपनी समूची आय प्रीमियम के तौर पर अदा करनी होगी। इस गणना में किसी भी तरह का अंतर नहीं आ सकता है। बीमा उत्पादों के मार्केटिंग से जुड़े लोग कुछ भी कहें, लेकिन परिवार वाले किसी भी व्यक्ति को टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी के जरिये दस गुना बीमा कवर खरीदने से पहले यूलिप (अथवा किसी भी अन्य निवेश उत्पाद) में एक भी पैसा नहीं लगाना चाहिए। एक बार अपने परिवार को दस गुना बीमा कवर देकर उनका भविष्य सुरक्षित करने के बाद निवेश के बारे में अलग से विचार करें।

मैं अपने इस कथन को उदाहरण देकर समझाता हूं। मान लीजिए, टैक्स कटौती के बाद आपकी वार्षिक आय दस लाख रुपये है। तो फिर आपको कम से कम एक करोड़ रुपये की बीमा सुरक्षा लेनी चाहिए। आप सोचते हैं कि अगर आपके साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो आपका परिवार कैसे वित्तीय चुनौतियों से निपट पाएगा। आपको लगता है कि ऐसी स्थिति में दस गुना वार्षिक आय परिवार के लिए पर्याप्त होगी। कुछ परिवारों को इससे भी ज्यादा राशि की जरूरत पड़ सकती है। अगर आपको मेरे कथन पर विश्वास नहीं है तो आप खुद कई वर्षो का वास्तविक बजट बनाएं। आपके लिए अच्छी बात यह है कि अगर आप टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं तो एक करोड़ रुपये के बीमा का प्रीमियम बहुत कम यानी काफी किफायती होगा। इसके विपरीत यूलिप बेचने वाले लोगों के लिए यह बुरा गणित है कि अगर आप एक करोड़ रुपये का बीमा कवर यूलिप के जरिये खरीदते हैं तो आपको हर साल दस लाख रुपये प्रीमियम भरना होगा। आप दस लाख रुपये प्रीमियम कैसे भर सकते हैं, जब आपकी कुल आय इतनी ही है।

अगर आप इसके बारे में इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने वालों से बात करेंगे तो वे आपको बताएंगे कि यूलिप में बीमा के साथ निवेश भी करते हैं। सैद्धांतिक रूप से यह बात सही है, लेकिन किसी भी समझदार व्यक्ति को पहले पर्याप्त बीमा सुरक्षा लेनी चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो आप पाएंगे कि टर्म इंश्योरेंस किफायती प्रीमियम के लिहाज से बेहतर साबित होगा। एक बार जब आप बीमा सुरक्षा ले लें, इसके बाद निवेश के विभिन्न विकल्पों पर सोचना चाहिए। दोनों आवश्यकताओं को अलग-अलग पूरा करना बेहतर होगा।

यह बेहतर विकल्प इसलिए है कि किसी भी निवेश का आकलन अलग-अलग अवधि के लिए तरलता, उथल-पुथल, सुरक्षा, पारदर्शिता, रिटर्न और उपयोगिता जैसे मानकों पर किया जाना चाहिए। एक ही बचतकर्ता की अलग समय पर विभिन्न किस्म की बचतों के लिए जरूरतें अलग होती हैं। कभी-कभी परिस्थितियां बदलने पर आप कुछ पैसा एक तरह के निवेश से निकालकर दूसरे तरह के निवेश में लगाना चाहते हैं। उदाहरण के लिए उथल-पुथल लेकिन बेहतर रिटर्न देने वाले निवेश के स्थान पर आपको सुरक्षित व स्थिर निवेश विकल्पों की आवश्यकता हो सकती है। किसी अन्य समय पर किसी के समक्ष पेशागत संकट आने या नौकरी जाने की स्थिति का सामना करना पड़ता है तो आप आपको एक-दो साल के लिए निवेश करना बंद करने की जरूरत हो सकती है।

ये ऐसे वास्तविक मसले है जिनसे हर किसी को कभी न कभी निपटना होता है। सवाल है कि क्या यूलिप इस तरह की आवश्यकताओं को समायोजित करने में सक्षम हैं। ऐसा कतई नहीं है। यह ऐसा उत्पाद है जिसमें बीमा और निवेश के लिए लंबे समय की वचनबद्धता होती है। एक बार यूलिप लेने के बाद इसमें बदलाव की कोई खास गुंजाइश नहीं होती है। क्या यह उत्पाद आवश्यकता को पूरा कर पाएगा। आपको यह सवाल अवश्य करना चाहिए।

वार्षिक प्रीमियम का अधिकतम दस गुना तक ही बीमा कवर क्यों: प्रत्येक बचतकर्ता को एक सवाल अवश्य पूछना चाहिए कि यूलिप में वार्षिक प्रीमियम का अधिकतम दस गुना तक ही बीमा कवर क्यों दिया जाता है। इसका जवाब आपको बचतकर्ता विरोधी सोच को स्पष्ट कर देगा। भारतीय बीमा उद्योग में यह सोच गहरे तक रची-बसी है। इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडा का आदेश है कि यूलिप उत्पादों में खरीदारों को प्रीमियम के मुकाबले कम से कम दस गुना बीमा कवर दिया जाना चाहिए। कम से कम बीमा सुरक्षा की शर्त लगी है। बीमा कंपनी चाहे तो ज्यादा बीमा कवर दे सकती है, लेकिन यूलिप उत्पादों में न्यूनतम दस गुना ही बीमा सुरक्षा दी जाती है। ऐसा क्यों। ऐसा इसलिए क्योंकि वे बीमा कारोबार में दिलचस्पी रखती ही नहीं हैं। 

Posted By: Nitesh

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